Ambala Airport: उत्तर भारत के प्रमुख सैन्य और व्यापारिक केंद्र अंबाला छावनी के खाते में एक और बड़ी ऐतिहासिक उपलब्धि जुड़ने जा रही है। लंबे समय से फाइटर जेट्स की गड़गड़ाहट के लिए पहचाने जाने वाले अंबाला एयरफोर्स स्टेशन के ठीक बगल में बना डोमेस्टिक एयरपोर्ट अब नागरिक उड़ानों के लिए पूरी तरह मुस्तैद है।
हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने इस ड्रीम प्रोजेक्ट की समीक्षा के बाद दावा किया है कि तकनीक के मामले में यह देश का सबसे आधुनिक डोमेस्टिक एयरपोर्ट होगा, जहां कड़ाके की ठंड और घने कोहरे (जीरो विजिबिलिटी) के बीच भी विशेष इंस्ट्रूमेंटेशन के जरिए विमान बिना किसी बाधा के उतर और उड़ान भर सकेंगे।
मंत्री अनिल विज ने परखा जमीनी काम, कार्गो टर्मिनल बनाने के भी निर्देश
बीते दिनों अनिल विज ने खुद लोक निर्माण विभाग (PWD) और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) के आला अधिकारियों के साथ टर्मिनल का बारीकी से निरीक्षण किया। वीआईपी लाउंज, यात्री लॉबी, बैगेज स्कैनर, सीसीटीवी कंट्रोल रूम और सुरक्षा जांच चौकियों का जायजा लेने के बाद उन्होंने अधिकारियों को अंतिम टच देने के निर्देश जारी किए हैं।
भविष्य की व्यापारिक संभावनाओं को देखते हुए विज ने अधिकारियों को अभी से ‘ऑफ-एयरपोर्ट एयर कार्गो टर्मिनल’ विकसित करने की रूपरेखा तैयार करने को कहा है, जिससे अंबाला के प्रसिद्ध साइंटिफिक टूल्स और कपड़ा उद्योग को वैश्विक बाजार तक सीधी पहुंच मिल सके।
कुरुक्षेत्र से बनारस और अयोध्या तक का सफर होगा आसान; चार राज्यों को सीधा फायदा
भौगोलिक दृष्टि से जीटी रोड पर स्थित होने के कारण इस एयरपोर्ट का फायदा सिर्फ अंबाला या हरियाणा तक सीमित नहीं रहने वाला है। पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लाखों यात्रियों के लिए यह चंडीगढ़ या दिल्ली जाने के मुकाबले कहीं अधिक सुगम विकल्प बनेगा।
हरियाणा के कुरुक्षेत्र, यमुनानगर, कैथल, करनाल और पानीपत जैसे जिलों के लोग सीधे यहां से कनेक्ट हो सकेंगे। रूट फाइनल होने की प्रक्रिया पर बात करते हुए विज ने बताया कि धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अंबाला से अयोध्या, बनारस, आगरा और श्रीनगर के लिए एटीआर-42 विमानों के संचालन की तैयारी है, जिसे भविष्य में बढ़ाकर 15 उड़ानों तक ले जाया जाएगा।
अड़चनों से भरा था रास्ता, विज की ‘लॉबिंग’ से रक्षा मंत्रालय ने दी 20 एकड़ जमीन
इस हवाई अड्डे को धरातल पर देखना इतना आसान नहीं था। शुरुआती सर्वे में चुनी गई जमीन को तकनीकी रूप से रिजेक्ट कर दिया गया था। इसके बाद अनिल विज ने हार न मानते हुए वायुसेना स्टेशन से सटी सेना की 20 एकड़ जमीन को नागरिक उड्डयन के लिए हस्तांतरित करवाने का बीड़ा उठाया।
करीब दो साल तक केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और वायुसेना के शीर्ष अधिकारियों के साथ कई दौर की बैठकों के बाद ₹133 करोड़ के एवज में यह जमीन राज्य सरकार को मिली। हाल ही में केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू से मुलाकात के बाद अब उड्डयन मंत्रालय की एक उच्च स्तरीय टीम जल्द ही अंबाला में फाइनल ऑपरेशन्स की समीक्षा करेगी।
सांस्कृतिक पहचान से जुड़ेगा नाम, रोजगार के खुलेंगे नए द्वार
अनिल विज ने इस हवाई अड्डे का नाम स्थानीय सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर को समर्पित करते हुए ‘अंबा एयरपोर्ट, अंबाला छावनी’ रखने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री को भेजा है।
उनका तर्क है कि अंबाला का नाम ऐतिहासिक रूप से मां अंबा देवी के नाम पर ही पड़ा है। बहरहाल, इस एयरपोर्ट के चालू होते ही अंबाला और आस-पास के इलाकों में होटल, टैक्सी, लॉजिस्टिक्स और टूरिज्म सेक्टर में बूम आना तय माना जा रहा है, जिससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।

