Chandigarh News: यूटी प्रशासन के एस्टेट ऑफिस की ओर से शहर के विभिन्न प्राइम सेक्टरों में 10 रिहायशी फ्रीहोल्ड प्लॉटों के लिए ई-नीलामी शनिवार से शुरू होगी। बोलीदाता 29 जून सुबह 11 बजे तक ऑनलाइन लाइव बोली लगा सकेंगे। इससे पहले दस्तावेजों की जांच 24 से 26 जून के बीच की गई थी। सफल आवेदकों के लिए ई-नीलामी पोर्टल शनिवार को सुबह 9 बजे से खोल दिया जाएगा। एस्टेट ऑफिस द्वारा जारी सूची के अनुसार ये प्लॉट सेक्टर 15-बी, 20, 21, 23, 27-डी, 30-ए, 37-ए और 44-बी में स्थित हैं। प्लॉटों का आकार 100 वर्ग मीटर से लेकर 502.316 वर्ग मीटर तक है। सबसे छोटा प्लॉट सेक्टर 44-बी में 100 वर्ग मीटर का है, जिसकी रिजर्व प्राइस 3.30 करोड़ रुपये तय की गई है।
वहीं सबसे बड़ा प्लॉट सेक्टर 44 में 502.316 वर्ग मीटर का है, जिसकी बेस प्राइस लगभग 16.58 करोड़ रुपये रखी गई है। इन प्लॉटों में खास आकर्षण यह है कि आठ प्लॉट पार्क फेसिंग हैं, जिन पर सफल बोलीदाता को 5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क देना होगा। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, चंडीगढ़ में इस तरह के प्राइम सेक्टर प्लॉटों की ई-नीलामी बेहद कम होती है, जिससे यह अवसर निवेशकों के लिए खास माना जा रहा है। हालांकि, अंतिम कीमत बोली प्रक्रिया के बाद ही तय होगी।
गौरतलब है कि रिहायशी प्रॉपर्टी नीलामी और रजिस्ट्रेशन से बीते वर्ष रिकॉर्ड राजस्व प्राप्त हुआ था। पिछले साल प्रशासन ने 13 रिहायशी प्लॉटों की नीलामी की थी, जिससे कुल 168.85 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित हुआ था। यह राशि तय रिजर्व प्राइस 75.29 करोड़ रुपये से दोगुने से भी अधिक रही थी। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार कलेक्टर रेट में वृद्धि के चलते शहर में प्रॉपर्टी की कीमतों में लगातार तेजी देखी जा रही है। इसका असर न केवल नीलामी बल्कि रजिस्ट्रेशन बाजार पर भी पड़ा है। इसी क्रम में वीआईपी सेक्टर-9 में साढ़े आठ कनाल की एक कोठी की रजिस्ट्री 126 करोड़ रुपये में की गई, जो अब तक की सबसे महंगी संपत्तियों में से एक मानी जा रही है। प्रशासन के अनुसार यह अब तक की सबसे बड़ी रजिस्ट्री है, जिस पर लगभग 6.30 करोड़ रुपये की स्टांप ड्यूटी वसूली गई, जिससे रिकॉर्ड राजस्व अर्जित हुआ है।
कमर्शियल और इंडस्ट्रियल प्रापर्टी की ई-नीलामी पर फिलहाल रोक
प्रशासन ने इस बार केवल रेजिडेंशियल फ्रीहोल्ड प्लॉटों को ही नीलामी प्रक्रिया में शामिल किया है, जबकि कमर्शियल और इंडस्ट्रियल प्रापर्टी की ई-नीलामी फिलहाल रोक दी गई है। शहर में कई कमर्शियल और इंडस्ट्रियल प्लॉट खाली पड़े हैं और उन्हें नीलामी के लिए शॉर्टलिस्ट भी कर लिया गया था, लेकिन मौजूदा लीजहोल्ड व्यवस्था के कारण इनकी बिक्री प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। चंडीगढ़ में रेजिडेंशियल संपत्तियां फ्रीहोल्ड आधार पर उपलब्ध हैं, जबकि अधिकांश कमर्शियल संपत्तियां अभी भी लीजहोल्ड श्रेणी में आती हैं। इसी वजह से प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक कमर्शियल संपत्तियों को फ्रीहोल्ड नहीं किया जाता, तब तक उनकी ई-नीलामी शुरू नहीं की जाएगी। प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि कमर्शियल प्रॉपर्टी को फ्रीहोल्ड करने का प्रस्ताव पहले ही केंद्र सरकार को भेजा जा चुका है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद ही कमर्शियल और इंडस्ट्रियल संपत्तियों की नीलामी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।
दूसरी ई-नीलामी 15 अगस्त से, प्रमुख सेक्टरों की साइट्स शामिल
एस्टेट ऑफिस ने पूरे साल के लिए प्रॉपर्टी नीलामी का बड़ा रोडमैप तैयार किया है। प्रस्ताव के तहत सालभर में 40 रिहायशी, 40 कमर्शियल बूथ व दुकानें और 40 इंडस्ट्रियल प्लॉटों की ई-नीलामी की योजना बनाई गई है। इस व्यापक योजना की शुरुआत पहले चरण में 10 रिहायशी फ्रीहोल्ड प्लॉटों की ई-नीलामी से की जा रही है। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार ट्राईसिटी में चंडीगढ़ की प्रॉपर्टी पहले से ही सबसे महंगी मानी जाती है और यहां के रिहायशी प्लॉटों को लेकर देशभर के निवेशकों में खासा क्रेज देखा जाता है।
इसी को देखते हुए ई-नीलामी की प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से पूरे वर्ष लागू करने का निर्णय लिया गया है। नीलामी कार्यक्रम के अनुसार दूसरी ई-ऑक्शन 15 अगस्त से शुरू होगी, जिसमें सेक्टर 32, 33, 35, 37, 38, 40, 33-सी, 40-ए और 44-ए की साइट्स शामिल रहेंगी। इसके बाद तीसरी तिमाही की नीलामी 15 नवंबर से प्रस्तावित है, जिसमें सेक्टर 15-सी, 20, 23, 33, 44, 46, 37, 38 और 40 की विभिन्न आवासीय साइट्स ई-ऑक्शन में रखी जाएंगी। वहीं चौथी तिमाही की ई-नीलामी 15 फरवरी 2027 से शुरू होगी, जिसमें सेक्टर 44, 19-बी, 33, 37, 38 और 40 की साइट्स शामिल की जाएंगी। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि जरूरत पड़ने पर इस चरण में कमर्शियल और इंडस्ट्रियल संपत्तियों को भी शामिल किया जा सकता है।
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