Farmers Meeting Chandigarh: (संजीव चौहान) चंडीगढ़ का पंजाब किसान भवन एक बार फिर देश में करवट ले रहे एक बड़े किसान आंदोलन का गवाह बनने जा रहा है। केंद्र सरकार द्वारा अमेरिका के साथ किए जाने वाले ‘फ्री ट्रेड डील’ (मुक्त व्यापार समझौते) की सुगबुगाहट ने किसान गलियारों में हलचल तेज कर दी है। इस डील के विरोध में बुधवार को चंडीगढ़ में देश भर के किसान और मजदूर संगठनों की एक बेहद महत्वपूर्ण और आपात बैठक बुलाई गई। बैठक की कमान भाकियू के फायरब्रांड नेता सरदार गुरनाम सिंह चढूनी ने संभाली। करीब 114 संगठनों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में हुए इस महामंथन में सभी ने एकमत से प्रस्ताव पारित कर साफ कर दिया कि वे इस समझौते को किसी भी कीमत पर देश की धरती पर लागू नहीं होने देंगे।
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बैठक को संबोधित करते हुए किसान नेताओं ने आशंका जताई कि अगर अमेरिका के साथ यह फ्री ट्रेड डील होती है, तो विदेशी कृषि उत्पादों की भारतीय बाजारों में बेरोकटोक एंट्री हो जाएगी। इससे देश के छोटे और सीमांत किसानों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो जाएगा। चेयरमैन गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ किसी एक राज्य की नहीं, बल्कि पूरे देश के अन्नदाता के अस्तित्व की है। अच्छी बात यह रही कि इस बैठक में आपसी मतभेदों को दरकिनार कर सभी धड़े और संगठन एक मंच पर आकर संयुक्त मोर्चा बनाने को तैयार दिखे।
कश्मीर से केरल तक के नेताओं का जमावड़ा; यमुनानगर से संजू गुंदियाना भी पहुंचे
इस बैठक की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें उत्तर से लेकर दक्षिण और पूर्व से लेकर पश्चिम तक के राज्यों की नुमाइंदगी देखी गई। मुख्य रूप से पंजाब के कद्दावर नेता सरवन सिंह पन्धेर, बलबीर सिंह राजेवाल, उत्तर प्रदेश से वी.एम. सिंह, केरल से बीजू और हरियाणा से युवा किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ शामिल हुए। वहीं जिला यमुनानगर से प्रमुख किसान चेहरा संजू गुंदियाना भी अपने समर्थकों के साथ पहुंचे। इनके अलावा उड़ीसा, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और राजस्थान के किसान संगठनों के मुखियाओं ने भी अपनी हाजिरी लगाई और जमीनी स्तर पर विरोध प्रदर्शन शुरू करने की वकालत की।
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किसान नेताओं ने प्रेस को संबोधित करते हुए बताया कि आज की बैठक एक शुरुआती लामबंदी थी। कई ऐसे संगठन हैं जो दूरी, समय की कमी या अन्य अपरिहार्य कारणों से आज की इस आपात बैठक में हिस्सा नहीं ले सके। उन सभी को इस मुहिम से जोड़ने के लिए आगामी 1 जुलाई को चंडीगढ़ के इसी किसान भवन में दोबारा एक बड़ी बैठक मुकर्रर की गई है। किसान नेताओं का दावा है कि 1 जुलाई की बैठक में देश के सभी छोटे-बड़े संगठनों को एक छत्र के नीचे लाकर केंद्र सरकार के खिलाफ एक निर्णायक और देशव्यापी आंदोलन का बाकायदा शंखनाद कर दिया जाएगा।

