Kurukshetra Crime: लाडवा के वार्ड नंबर-8 से एक बेहद चौंकाने वाली और दुखद खबर सामने आई है, जिसने हंसते-खेलते परिवार को पल भर में उजाड़ दिया। बिजली निगम में फोरमैन जैसे जिम्मेदार पद पर तैनात अशोक कुमार ने शनिवार सुबह अपने ही घर के भीतर फंदे से लटककर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली।
इस घटना ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है, क्योंकि खुदकुशी करने से चंद मिनट पहले तक अशोक के व्यवहार में किसी भी तरह का मानसिक तनाव या अजीब बदलाव नहीं देखा गया था।
सुबह चक्की चलाई, फिर कमरे में जाकर लगा ली फांसी
पारिवारिक सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों से मिली जानकारी के मुताबिक, शनिवार की सुबह हर दिन की तरह बेहद सामान्य थी। घर में ही अशोक की एक छोटी सी आटा चक्की है, जहां उन्होंने सुबह उठकर कुछ देर तक काम भी किया और ग्राहकों को निपटाया। घर के रोजमर्रा के कामकाज को हाथ बंटाने के बाद वे सहज भाव से अपने कमरे के भीतर चले गए।
उस वक्त उनकी पत्नी, जो घर पर ही सिलाई-कढ़ाई का काम करती हैं, और उनका बेटा कमरे के ठीक बाहर ही बैठे हुए थे। किसी को इस बात का दूर-दूर तक अंदेशा नहीं था कि अशोक कमरे के अंदर मौत को गले लगाने जा रहे हैं।
पत्नी ने जैसे ही खोला दरवाजा, पैरों तले खिसकी जमीन
जब काफी देर बीत जाने के बाद भी अशोक कमरे से बाहर नहीं निकले, तो किसी काम के सिलसिले में उनकी पत्नी कमरे के भीतर गईं। दरवाजा खोलते ही जो मंजर सामने था, उसने मां-बेटे की दुनिया हिलाकर रख दी। अशोक का शव सीलिंग फैन (पंखे) से बंधी रस्सी के फंदे पर झूल रहा था। पत्नी की चीख सुनकर बेटा और आस-पड़ोस के लोग तुरंत कमरे की तरफ दौड़े। आनन-फानन में इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दी गई।
पुलिस हर पहलू को खंगालने में जुटी
सूचना मिलते ही लाडवा थाना प्रभारी (SHO) गुरनाम सिंह अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का बारीकी से मुआयना करने के बाद शव को फंदे से नीचे उतरवाया। पुलिस ने शव को पंचनामा भरकर पोस्टमॉर्टम के लिए कुरुक्षेत्र के नागरिक अस्पताल भेज दिया है।
SHO गुरनाम सिंह ने बताया कि प्राथमिक तौर पर यह मामला आत्महत्या का ही लग रहा है, लेकिन पुलिस हर संभावित कोण से इसकी तफ्तीश कर रही है। अशोक पिछले कुछ दिनों से दफ्तर क्यों नहीं जा रहे थे, उन्होंने विभाग से अचानक जो छुट्टी ली थी उसके पीछे की क्या वजह थी और क्या वे किसी गंभीर बीमारी या डिप्रेशन से जूझ रहे थे, इन तमाम कड़ियों को जोड़ने की कोशिश की जा रही है। परिवार के सदस्यों के विस्तृत बयान दर्ज होने के बाद ही स्थिति पूरी तरह साफ हो पाएगी।

