Kurukshetra Urea Crisis: कुरुक्षेत्र में यूरिया और डीएपी की कमी पर फूटा किसानों का गुस्साKurukshetra Urea Crisis: कुरुक्षेत्र में यूरिया और डीएपी की कमी पर फूटा किसानों का गुस्सा

Kurukshetra Urea Crisis: हरियाणा में मानसून की दस्तक के साथ ही किसान पूरी ताकत से धान की रोपाई के काम में जुट गए हैं। लेकिन, कुरुक्षेत्र के किसानों के सामने इस बार कुदरत से ज्यादा प्रशासनिक लचरता की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। खेतों में पानी भरकर रोपाई करने के इस बेहद महत्वपूर्ण समय पर जिले में डीएपी और यूरिया खाद की भारी किल्लत हो गई है।

किसानों का कहना है कि जब उन्हें खेतों में होना चाहिए, तब वे अल सुबह से ही सोसाइटियों और निजी खाद दुकानों के चक्कर काट रहे हैं। घंटों धक्के खाने के बाद भी उन्हें जरूरत के मुताबिक खाद नहीं मिल पा रही है, जिससे धान की बुवाई और रोपाई का काम बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

कागजों पर सब दुरुस्त, पर जमीन पर खाद की कालाबाजारी का खेल

इस संकट को लेकर विपक्ष और किसान संगठनों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस ओबीसी सेल के जिला प्रधान एवं प्रगतिशील किसान सुरेंद्र सैनी (भिवानी खेड़ा) ने सीधे तौर पर प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि खाद की यह किल्लत प्राकृतिक नहीं बल्कि प्रशासनिक नाकामी का नतीजा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि बाजार में खाद की कृत्रिम कमी दिखाकर कुछ मुनाफाखोर डीलर इसकी कालाबाजारी कर रहे हैं। सुरेंद्र सैनी के मुताबिक, “एक तरफ तो लागत बढ़ने के कारण खेती पहले से ही घाटे का सौदा बनती जा रही है, वहीं दूसरी तरफ सरकार की ढीली नीतियों की मार सीधा अन्नदाता पर पड़ रही है। सरकार को तुरंत कड़े कदम उठाने चाहिए ताकि किसानों का समय बर्बाद न हो।”

पूर्व जनप्रतिनिधियों ने खोला मोर्चा, शोषण का लगाया आरोप

खाद की इस किल्लत की गूंज अब गांवों की चौपालों से लेकर बयानों तक सुनाई देने लगी है। बहादुरपुर गांव के पूर्व सरपंच सोहन नागपाल ने सरकार पर तीखा निशाना साधते हुए कहा कि वर्तमान शासन व्यवस्था पूरी तरह किसान विरोधी रुख अपनाए हुए है। अगर समय रहते खाद की आपूर्ति बहाल नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में धान की फसल पिछड़ जाएगी, जिसका सीधा असर पैदावार और किसानों की आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा।

वहीं, पूर्व सरपंच प्रतिनिधि बलवंत सैनी ने मांग की है कि प्रशासन को तुरंत उड़नदस्ते बनाकर खाद के गोदामों पर छापेमारी करनी चाहिए ताकि जमाखोरी और कालाबाजारी को रोका जा सके। उन्होंने कहा कि किसानों को अपनी ही फसल के लिए खाद मांगने पर दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं, जो सीधे तौर पर उनका शोषण है।

तुरंत दखल की मांग

किसान नेता पाला राम सिंह पुरा ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर गहरा रोष जताते हुए कहा कि धान का सीजन बेहद सीमित समय का होता है और इसमें किसी भी तरह की देरी फसल चक्र को बिगाड़ देती है। कुरुक्षेत्र के किसान वर्ग ने जिला प्रशासन और कृषि विभाग से मांग की है कि वे महज बयानों तक सीमित न रहकर धरातल पर यूरिया और डीएपी के रैक लगवाएं, ताकि बिना किसी पक्षपात और कालाबाजारी के हर छोटे-बड़े किसान तक खाद की बोरी आसानी से पहुंच सके।

By Jagmarg