Panipat Factory Accident: पानीपत के औद्योगिक क्षेत्र से एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। यहां भैंसवाल रोड के पास स्थित श्री लक्ष्मी धागा गोदाम में गुरुवार की सुबह उस वक्त चीख-पुकार मच गई, जब रोज कमाकर खाने वाले प्रवासी मजदूरों की तीन मासूम बच्चियां एक खौफनाक हादसे का शिकार हो गईं।
रोजाना की तरह मजदूर अपनी शिफ्ट में काम कर रहे थे और उनकी नजरों के सामने ही परिसर में तीन बच्चियां खेल रही थीं। इसी दौरान गोदाम में लापरवाही से सटाकर रखी गई धागे की दो भारी-भरकम गांठें अचानक असंतुलित होकर खेल रही बच्चियों के ऊपर आ गिरीं। तीनों बच्चियां पलक झपकते ही मलबे के नीचे दफन हो गईं।
इसी साल शुरू की थी पढ़ाई, खेलकूद के बीच पल भर में उजड़ गई दुनिया
इस दर्दनाक हादसे ने दो हंसते-खेलते परिवारों की खुशियां हमेशा के लिए छीन ली हैं। मृतकों की पहचान साढ़े चार साल की प्रयगा और महज ढाई साल की सोनम के रूप में हुई है। प्रयगा के पिता नरेंद्र और मां मूर्ति ने इसी साल बड़े चाव से अपनी लाडली का दाखिला नर्सरी कक्षा में कराया था, ताकि वह पढ़-लिखकर कुछ बन सके।
लेकिन किसे पता था कि जिस गोदाम में वे पेट पालने के लिए पसीना बहा रहे हैं, वही उनकी बच्ची की कब्रगाह बन जाएगा। हादसे में घायल तीसरी बच्ची की पहचान 5 वर्षीय रोशनी के रूप में हुई है, जो फिलहाल अस्पताल के बेड पर दर्द से कराह रही है।
दम घुटने से थमी सांसें; अस्पताल ले जाते ही डॉक्टरों ने हाथ खड़े किए
जैसे ही भारी बंडल बच्चियों पर गिरे, फैक्ट्री में काम कर रहे परिजनों और साथी मजदूरों के होश उड़ गए। सब काम धंधा छोड़कर बच्चियों को बचाने दौड़े। भारी मशक्कत के बाद धागे की विशालकाय गांठों को हटाया गया और अचेत हो चुकीं बच्चियों को गोद में उठाकर लोग पानीपत के सिविल अस्पताल की तरफ भागे। हालांकि, तब तक काफी देर हो चुकी थी।
अस्पताल के डॉक्टरों ने जांच के बाद प्रयगा और सोनम को मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों का कहना है कि सैकड़ों किलो वजन के नीचे अचानक दब जाने के कारण मासूमों की छाती और फेफड़ों पर भारी दबाव पड़ा, जिससे उनका दम घुट गया। तीसरी घायल बच्ची रोशनी की नाजुक हालत को देखते हुए डॉक्टरों की टीम लगातार उसकी निगरानी कर रही है। हादसे के बाद से पीड़ित माता-पिता बेसुध हैं और पूरी कॉलोनी में सन्नाटा पसरा हुआ है।

