Pulse Polio Campaign: लाड़वा (विजय कौशिक) देश को पोलियो मुक्त बनाए रखने की कशमकश के बीच लाडवा में स्वास्थ्य विभाग ने आगामी पल्स पोलियो अभियान को लेकर अपनी कमर कस ली है। स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में वरिष्ठ चिकित्साधिकारी डॉ. कृष्णकांत की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल बैठक बुलाई गई। इस बैठक में क्षेत्र की आशा वर्करों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य विभाग के मैदानी स्टाफ ने हिस्सा लिया। बैठक का मुख्य एजेंडा उपमंडल के हर एक बच्चे तक समय रहते पोलियो वैक्सीन की पहुंच सुनिश्चित करना और इसके जमीनी खाके को अंतिम रूप देना था।
11 हजार से ज्यादा बच्चों को सुरक्षित करने का इरादा
बैठक को संबोधित करते हुए वरिष्ठ चिकित्साधिकारी डॉ. कृष्णकांत ने आंकड़ों की तफ्सील साझा की। उन्होंने बताया कि इस बार लाडवा सीएचसी के कार्यक्षेत्र के तहत आने वाली लगभग 1,15,044 की आबादी को कवर किया जा रहा है। इसके भीतर आने वाले 0 से 5 वर्ष की आयु वर्ग के 11,011 बच्चों को दवा पिलाने का बड़ा लक्ष्य सामने है। अभियान के पहले दिन के लिए कुल 86 पोलियो बूथ स्थापित किए जा रहे हैं, जहां तैनात होने वाले 242 कर्मचारियों को मुस्तैदी से अपनी ड्यूटी निभाने की हिदायत दी गई है।
ईंट-भट्टों और प्रवासियों के बच्चों के लिए विशेष चक्रव्यूह
इस बार के अभियान में सबसे ज्यादा जोर उन बच्चों पर है जो अक्सर अपनी लोकेशन बदलने के कारण छूट जाते हैं। डॉ. कृष्णकांत ने साफ किया कि प्रशासन ने लाडवा और आसपास के इलाकों में कुल 103 ‘हाई रिस्क’ (अत्यधिक संवेदनशील) साइट्स की पहचान की है। इनमें मुख्य रूप से ईंट-भट्टे, निर्माणाधीन इमारतें, घुमंतू डेरे, प्रवासी मजदूरों की बस्तियां और स्लम एरिया शामिल हैं। इन इलाकों में रहने वाले बच्चों के लिए विशेष योजना बनाई गई है ताकि कोई भी नौनिहाल दवा से वंचित न रह सके।
दूसरे चरण में 114 टीमें खटखटाएंगी घर का दरवाजा
बूथ दिवस के बाद भी जो बच्चे किन्हीं कारणों से केंद्र तक नहीं पहुंच पाएंगे, उनके लिए विभाग का ‘होम-टू-होम’ दस्ता काम करेगा। दूसरे चरण के तहत कुल 114 फील्ड टीमें गठित की गई हैं, जो सीधे तौर पर लोगों के घरों का दरवाजा खटखटाएंगी। इन फील्ड टीमों की कार्यप्रणाली और जवाबदेही तय करने के लिए 10 अनुभवी सुपरवाइजरों की भी नियुक्ति की गई है, जो सीधे मुख्यालय को रिपोर्ट करेंगे।
सीएचसी प्रभारी ने सभी आशा व आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे इस राष्ट्रीय अभियान को केवल अपनी ड्यूटी न मानकर एक सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में लें। बैठक के दौरान चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े कई वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी भी मौजूद रहे, जिनमें मुख्य रूप से डॉ. पूजा, डॉ. रचना, स्वास्थ्य निरीक्षक जसमेर, स्वास्थ्य कार्यकर्ता अमरीक, भारती व मीना सहित ब्लॉक आशा कोऑर्डिनेटर गीता ने भी अपनी राय और सुझाव साझा किए।

