Snake on Shivling Pehowa: पिहोवा के अरुणाय मंदिर में साक्षात चमत्कार! शिवलिंग पर फन फैलाए लिपटा मिला नाग, दर्शन को उमड़े हजारों भक्तSnake on Shivling Pehowa: पिहोवा के अरुणाय मंदिर में साक्षात चमत्कार! शिवलिंग पर फन फैलाए लिपटा मिला नाग, दर्शन को उमड़े हजारों भक्तSnake on Shivling Pehowa: पिहोवा के अरुणाय मंदिर में साक्षात चमत्कार! शिवलिंग पर फन फैलाए लिपटा मिला नाग, दर्शन को उमड़े हजारों भक्त

Snake on Shivling Pehowa: पिहोवा (अभिषेक पूर्णिमा) हरियाणा के पिहोवा क्षेत्र में स्थित पौराणिक और ऐतिहासिक संगमेश्वर महादेव मंदिर अरुणाय सोमवार की सुबह एक बेहद विस्मयकारी घटना का गवाह बना। सोमवार तड़के जब मंदिर के कपाट खोले गए, तो वहां स्थापित प्राचीन स्वयंभू शिवलिंग पर एक काला नाग फन फैलाकर लिपटा हुआ मिला। इस अलौकिक दृश्य को जिसने भी देखा, वह देखता ही रह गया। शुरुआत में गर्भगृह के भीतर से आ रही फुंकार की आवाज से सेवादार ठिठके, लेकिन जब असलियत सामने आई तो इसे भगवान शिव का साक्षात चमत्कार मानकर जयकारे गूंजने लगे। हालांकि, बाद में मंदिर में बढ़ती हलचल और भीड़ को देखकर नाग देवता धीरे-धीरे सीढ़ियों से रेंगते हुए पीछे की तरफ स्थित खेतों में चले गए।

तड़के कपाट खोलते ही हिली कंबल, सेवादार रह गए दंग

मंदिर सेवादल के प्रबंधक भूषण गौतम ने इस पूरी घटनाक्रम की सिलसिलेवार जानकारी देते हुए बताया कि सनातन परंपरा के अनुसार हर रात महादेव को वस्त्र और कंबल ओढ़ाकर विश्राम दिया जाता है। सोमवार सुबह करीब साढ़े तीन बजे जब मुख्य पुजारी और सेवादार भोर की आरती के लिए गर्भगृह का ताला खोलकर अंदर दाखिल हुए, तो वेदी पर रखे कंबल में कुछ हलचल महसूस हुई। जब सेवादार करीब पहुंचे तो उन्हें एक तेज फुंकार सुनाई दी। किसी अनहोनी की आशंका के चलते सेवादारों ने एक लंबे पाइप की मदद से बेहद सावधानी से कंबल को हटाया। कंबल हटते ही सामने का नजारा देखकर सबके रोंगटे खड़े हो गए; शिवलिंग पर एक नाग कुंडली मारकर बैठा था।

सुरक्षा के मद्देनजर बंद किया गया मुख्य द्वार

नाग देवता को बेहद आक्रामक मुद्रा में फुंकारते देख सेवादारों ने सुरक्षा के लिहाज से तुरंत सूझबूझ दिखाई। सुबह जल्दी आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मंदिर का मुख्य चैनल गेट तुरंत बाहर से लॉक कर दिया गया और इसकी सूचना मंदिर प्रबंधन को दी गई। कुछ ही देर में सेवादल के प्रबंधक भूषण गौतम भी मौके पर पहुंच गए। करीब आधे घंटे तक शिवलिंग पर विराजमान रहने के बाद नाग देवता बिना किसी को नुकसान पहुंचाए शांत भाव से सीढ़ियों के रास्ते बाहर निकले और खेतों की तरफ ओझल हो गए। इसके बाद ही आम भक्तों के लिए कपाट खोले गए।

स्वयंभू हैं संगमेश्वर महादेव, सदियों पुराना है इतिहास

अरुणाय मंदिर का इतिहास बेहद चमत्कारी और आस्था से भरा है। मंदिर की प्राचीन इतिहास पुस्तिका के मुताबिक, यहां स्थापित शिवलिंग को किसी इंसान ने नहीं बनाया, बल्कि भगवान शिव यहां स्वयं भू-लिंग के रूप में प्रकट हुए थे। पुराने समय में इस बीहड़ इलाके में महात्मा गणेश गिरि अपने शिष्यों के साथ कुटिया बनाकर रहते थे। एक दिन झाड़ियों की तरफ टहलते हुए उन्हें दीमक का एक विशाल ढेर दिखा। जब उन्होंने अपने चिमटे से उसे कुरेदा, तो नीचे किसी ठोस पत्थर के होने का अहसास हुआ। मिट्टी साफ करने पर वहां एक अलौकिक शिवलिंग नजर आया।

पुजारी ने जब उसे खोदकर किसी दूसरी जगह स्थापित करना चाहा, तो सुबह से शाम हो गई लेकिन शिवलिंग का अंतिम छोर नहीं मिला। उसी रात महात्मा गणेश गिरि के स्वप्न में आकर भगवान शिव ने इसी स्थान पर मंदिर निर्माण का आदेश दिया और अगली सुबह जब वे वहां पहुंचे तो एक विशाल कालसर्प शिवलिंग की रक्षा में लिपटा हुआ था।

यहीं रक्त प्रवाह के श्राप से मुक्त हुई थीं नदी सरस्वती

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह पावन तीर्थ अरुणा और सरस्वती नदी के पवित्र संगम पर स्थित है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक, एक बार महर्षि वशिष्ठ और विश्वामित्र के बीच तपोबल की श्रेष्ठता को लेकर विवाद बढ़ गया। विश्वामित्र ने सरस्वती नदी को छल से महर्षि वशिष्ठ को बहाकर लाने को कहा ताकि वे उनका अंत कर सकें। सरस्वती ने वशिष्ठ जी की जान तो बचा ली, लेकिन इससे क्रोधित होकर विश्वामित्र ने सरस्वती नदी को श्राप दे दिया कि उनका जल रक्त (खून) में बदल जाएगा। इस संकट से उबरने के लिए महर्षि वशिष्ठ ने सरस्वती को अरुणाय में प्रकट हुए शिवलिंग की आराधना करने की सलाह दी। सरस्वती नदी ने इसी स्थान पर घोर तपस्या की, जिससे प्रसन्न होकर महादेव ने उन्हें श्राप मुक्त किया और उनका जल फिर से पवित्र और निर्मल हो गया।

By Jagmarg