Opposition March Against CEC: दिल्ली में चुनाव प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का विरोध सोमवार को फिर तेज हो गया। कांग्रेस समेत INDIA ब्लॉक में शामिल विपक्षी पार्टियां अपनी मांगों को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालेंगी। कांग्रेस ने इस प्रदर्शन को ‘चलो दिल्ली मार्च फॉर डेमोक्रेसी’ नाम दिया है। विपक्षी नेता दोपहर 1:30 बजे कनॉट प्लेस-बाराखंभा रोड जंक्शन पर जुटेंगे। प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है और 6 मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए गए हैं। विपक्ष इस मार्च के जरिए चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहा है। उसकी प्रमुख मांगों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR पर रोक और बैलेट पेपर से चुनाव कराना शामिल है। इसके साथ ही विपक्ष 10 अक्टूबर को दिल्ली में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने और उनके साथ कथित मारपीट के विरोध में भी आवाज उठा रहा है। जंतर-मंतर जा रहे केजरीवाल-ममता को पुलिस ने पकड़ा; 1,000 से ज्यादा लोग हिरासत में
CJI सूर्यकांत ने राहुल गांधी और खड़गे से मिलने से किया इनकार
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने रविवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत से मुलाकात का समय मांगा था। राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का उद्देश्य उन्हें ज्ञापन सौंपना था। हालांकि, CJI ने विपक्षी नेताओं से मिलने से इनकार कर दिया। सूत्रों के मुताबिक, CJI ने कहा कि इस तरह के मामले पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। मुलाकात की मांग स्वीकार नहीं होने के बाद कांग्रेस ने कहा कि वह CJI के फैसले का सम्मान करती है, लेकिन अपना मार्च जारी रखेगी। इस घटनाक्रम के बाद विपक्ष की चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठाई जा रही मांगों पर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। विपक्षी दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए अपनी शिकायतें सामने रखना चाहते हैं। वहीं, सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों के बीच CJI से मुलाकात नहीं होने के कारण विपक्ष अब मार्च के जरिए अपना विरोध दर्ज कराएगा।
विपक्ष के मार्च को देखते हुए दिल्ली मेट्रो के 6 स्टेशन बंद किए गए हैं। इनमें जनपथ और मंडी हाउस भी शामिल हैं। इससे इन इलाकों में मेट्रो से आने-जाने वाले यात्रियों को परेशानी हो सकती है। यात्रियों को अपनी यात्रा की योजना बनाते समय संबंधित मेट्रो स्टेशनों की स्थिति का ध्यान रखना होगा। विपक्षी नेता कनॉट प्लेस-बाराखंभा रोड जंक्शन से जुटकर सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने की तैयारी में हैं। ऐसे में प्रदर्शन वाले इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था और आवाजाही पर असर पड़ सकता है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में बंद किए गए सभी 6 स्टेशनों के नाम नहीं दिए गए हैं।
MNS नेता बोले- देश में अघोषित इमरजेंसी
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के नेता संदीप देशपांडे ने विपक्ष के प्रदर्शन का समर्थन करते हुए इसे लोकतंत्र बचाने की लड़ाई बताया। उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि पूरा देश ऐसा ही कर रहा है। हर कोई लोकतंत्र बचाना चाहता है। भारत का इतिहास उठाकर देख लीजिए, हमने हमेशा लोकतंत्र की रक्षा की है। तब भी जब 1975 में इमरजेंसी की आधिकारिक घोषणा हुई थी। अब देश में अघोषित इमरजेंसी है, जिससे हर नागरिक लड़ रहा है।’ देशपांडे ने 1975 की इमरजेंसी का जिक्र करते हुए मौजूदा हालात को अघोषित इमरजेंसी बताया। उनका यह बयान विपक्ष की ओर से चुनाव आयोग की निष्पक्षता और लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर उठाए जा रहे सवालों के बीच आया है।
CJI सूर्यकांत के विपक्षी नेताओं से नहीं मिलने के फैसले पर DMK प्रवक्ता टीकेएस इलांगोवन ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, ‘मुझे नहीं पता कि वे किस दबाव में हैं। विपक्ष लोकतंत्र के समर्थन में बात कर रहा है। हमारी शिकायत है कि मुख्य चुनाव आयुक्त प्रो-भाजपा हैं। वे निष्पक्ष रहकर काम नहीं कर रहे। वे निष्पक्षता से काम करेंगे, तभी लोकतंत्र बचेगा।’ इलांगोवन ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर पक्षपात का आरोप लगाया। यह विपक्ष का राजनीतिक आरोप है। विपक्ष का कहना है कि चुनाव आयोग को निष्पक्ष तरीके से काम करना चाहिए, जबकि उसकी मौजूदा मांगों में ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा भी शामिल है।
राष्ट्रपति मुर्मू को भी ज्ञापन सौंप चुका है INDIA ब्लॉक
विपक्षी दलों ने इससे पहले 9 अक्टूबर को भी चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर प्रदर्शन किया था। उस दिन INDIA ब्लॉक के नेताओं ने संसद से विजय चौक तक मार्च निकाला और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को ज्ञापन सौंपकर अपनी चिंताएं रखीं। इसके बाद भी विपक्ष का विरोध जारी रहा। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR के विरोध में विपक्षी सांसदों ने 6, 7, 8 और 9 अक्टूबर को प्रदर्शन किए। इस दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को तीन बार पुलिस ने हिरासत में लिया। अब विपक्षी दल सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालकर अपनी मांगों को फिर सामने रख रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम का केंद्र चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता, मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनाव कराने के तरीके को लेकर विपक्ष की आपत्तियां हैं।

