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पद्मश्री राजेंद्र गुप्ता ने राज्यसभा में उठाया सरकारी शिक्षा का मुद्दा: नेशनल स्कूल फीस काउंसिल बनाने की मांग रखी

VVinita Kohli
पद्मश्री राजेंद्र गुप्ता ने राज्यसभा में उठाया सरकारी शिक्षा का मुद्दा: नेशनल स्कूल फीस काउंसिल बनाने की मांग रखी
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बरनाला: राज्यसभा के शून्य काल के दौरान राज्यसभा सांसद पद्मश्री राजेंद्र गुप्ता ने देश की सरकारी शिक्षा प्रणाली की गंभीर स्थिति की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए इसे ‘मिशन मोड’ में मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। चेयरमैन की अनुमति से बोलते हुए उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में दोबारा भरोसा, मर्यादा और गुणवत्ता कायम करना समय की मुख्य आवश्यकता है। पद्मश्री गुप्ता ने अपने संबोधन की शुरुआत डॉ. भीमराव अंबेडकर के शब्दों से की: “राजनीतिक लोकतंत्र तब तक कायम नहीं रह सकता, जब तक उसकी नींव में सामाजिक लोकतंत्र न हो और सामाजिक लोकतंत्र की शुरुआत साझा और समान शिक्षा से होती है।” 

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उन्होंने हाल ही में पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 का हवाला देते हुए कहा कि भारत दुनिया की सबसे बड़ी स्कूली शिक्षा प्रणालियों में से एक है, जहाँ करीब 15 लाख स्कूल, लगभग 25 करोड़ विद्यार्थी और 1 करोड़ से अधिक शिक्षक हैं। इसके बावजूद, प्राथमिक स्तर से आगे सीखने के ठोस परिणाम नहीं निकल रहे हैं। अंत में, उन्होंने GST काउंसिल की तर्ज पर एक ‘राष्ट्रीय स्कूल फीस काउंसिल’ बनाने का प्रस्ताव रखा, ताकि केंद्र और राज्य मिलकर स्कूलों की फीस के लिए पारदर्शी और न्यायसंगत मानक तय कर सकें और क्षेत्रीय विविधताओं का भी सम्मान किया जा सके। पद्मश्री गुप्ता ने कहा कि देश के लोकतंत्र का भविष्य आज क्लासरूम में रखी जा रही नींव पर निर्भर करता है और शिक्षा को सस्ता, सामान और विश्वसनीय बनाना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।

केवल 17 प्रतिशत स्कूलों में ही माध्यमिक शिक्षा की सुविधा

आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़ों की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि देश के 54 प्रतिशत स्कूल सिर्फ बुनियादी स्तर की शिक्षा तक सीमित हैं। जबकि ग्रामीण भारत में केवल 17 प्रतिशत स्कूलों में ही माध्यमिक शिक्षा की सुविधा है। यह स्थिति प्राथमिक स्तर के बाद आगे की शिक्षा तक पहुँच में बड़ी असमानता को दर्शाती है। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार नीति निर्माता और अधिकारी अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में नहीं पढ़ाते, जो हमारे सरकारी संस्थानों पर घटते भरोसे की तस्वीर पेश करता है।

कोचिंग उद्योग 58 हजार करोड़ रुपये के बाजार में बदला

निजी स्कूलों की बढ़ती फीस के बारे में बात करते हुए पद्मश्री राजेंद्र गुप्ता ने कहा कि फीस में हर साल 10 से 15 प्रतिशत तक की वृद्धि हो रही है, जिससे परिवार कर्ज के बोझ तले दब रहे हैं। इसके साथ ही कोचिंग उद्योग आज लगभग 58 हजार करोड़ रुपये के बाजार में बदल चुका है, जो शिक्षा में बढ़ती असमानता को और गंभीर बनाता है।

सरकारी खर्च जीडीपी के लक्ष्य से कम

उन्होंने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा शिक्षा बजट में 8.2 प्रतिशत की वृद्धि कर इसे 1.39 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक स्तर तक ले जाने की सराहना की। लेकिन साथ ही कहा कि इसके बावजूद शिक्षा पर कुल सरकारी खर्च अभी भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में सुझाए गए जीडीपी के 6 प्रतिशत के लक्ष्य से कम है।

समान शैक्षिक नींव के साथ जीवन की हो शुरुआत

राज्यसभा सदस्य ने मांग की कि सरकारी शिक्षा को मिशन मोड में मजबूत किया जाए। सरकारी स्कूलों में गुणवत्ता और श्रेष्ठता को पुन: स्थापित किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि हर बच्चा, चाहे उसका जन्म किसी भी पृष्ठभूमि में हुआ हो, एक समान शैक्षिक नींव के साथ जीवन की शुरुआत करे।  

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