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Panchkula Municipal Corporation Fraud: पंचकूला नगर निगम घोटाला: 30 करोड़ की आरोपी स्वाति तोमर का सरेंडर, अब खुलेंगे बड़े राज

AAmandeep Singh
पंचकूला नगर निगम घोटाला: 30 करोड़ की आरोपी स्वाति तोमर का सरेंडर, अब खुलेंगे बड़े राज
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पंचकूला। हरियाणा के पंचकूला से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। नगर निगम के खजाने में सेंध लगाकर 30 करोड़ रुपये डकारने के मामले में फरार चल रही महिला आरोपी स्वाति तोमर ने आखिरकार सोमवार को सरेंडर कर दिया है। स्वाति अपने वकील नीरज के साथ पंचकूला स्थित भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) के मुख्यालय पहुंचीं, जहां उन्हें हिरासत में ले लिया गया। यह मामला उस वक्त सुर्खियों में आया था जब जांच में खुलासा हुआ कि नगर निगम के करोड़ों रुपये सीधे एक पूर्व शिक्षिका के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिए गए। हालांकि, एसीबी ने अभी तक स्वाति की भूमिका को लेकर कोई आधिकारिक प्रेस नोट जारी नहीं किया है, लेकिन माना जा रहा है कि उससे पूछताछ में कई और ‘सफेदपोशों’ के चेहरे बेनकाब हो सकते हैं।

सब-कॉन्ट्रैक्टर का झांसा या सोची-समझी साजिश?

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सरेंडर के बाद स्वाति तोमर के बचाव पक्ष ने इस पूरे खेल को एक साजिश करार दिया है। उनके वकील का तर्क है कि स्वाति को किसी बड़े प्रोजेक्ट में ‘सब-कॉन्ट्रैक्टर’ बनाने का लालच दिया गया था। इसी बहाने जालसाजों ने उनसे कई सरकारी दस्तावेजों और खाली चेक बुक पर हस्ताक्षर करवा लिए। वकील का दावा है कि जब करोड़ों की रकम स्वाति के खाते में आई, तो उसे तुरंत अन्य खातों में ट्रांसफर कर दिया गया, जिसकी जानकारी स्वाति को नहीं थी। हालांकि, जांच एजेंसियां इस थ्योरी को शक की निगाह से देख रही हैं, क्योंकि 30 करोड़ जैसी बड़ी राशि के लेन-देन में बिना खाताधारक की मिलीभगत के ऐसा होना नामुमकिन सा लगता है।

खाकी और बैंक अधिकारियों की मिलीभगत का पर्दाफाश

पंचकूला नगर निगम का यह फ्रॉड केस सरकारी तंत्र में गहरी पैठ का सबूत है। स्वाति तोमर इस मामले में पांचवीं बड़ी गिरफ्तारी हैं। इससे पहले एसीबी की टीम नगर निगम के पूर्व अकाउंट अफसर विकास कौशिक को धर दबोच चुकी है, जो इस पूरी धांधली का मास्टरमाइंड माना जा रहा है। इसके अलावा, एक निजी व्यक्ति रजत और बैंक के रिलेशनशिप मैनेजर दिलीप राघव को भी गिरफ्तार किया गया है। बैंक मैनेजर की भूमिका इसलिए संदिग्ध है क्योंकि उसने इतनी बड़ी राशि के ट्रांसफर के दौरान नियमों की अनदेखी की।

क्या है पूरा मामला और अब आगे क्या?

दरअसल, नगर निगम के विकास कार्यों के लिए रखे गए फंड में हेराफेरी कर उसे निजी खातों में डायवर्ट किया गया था। जांच के दौरान जब कड़ियां जोड़ी गईं, तो स्वाति तोमर का नाम सामने आया। स्वाति, जो पहले एक स्कूल में टीचर रह चुकी हैं, अचानक इतनी बड़ी रकम की लेनदेन के केंद्र में कैसे आईं, यह जांच का मुख्य विषय है। एसीबी अब स्वाति को रिमांड पर लेकर यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि 30 करोड़ रुपये किन-किन लोगों के पास पहुंचे और इस भ्रष्टाचार की जड़ें नगर निगम में कितनी गहराई तक फैली हुई हैं।

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