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Panchkula News: पंचकूला में HERC दफ्तर पर बिजली कर्मचारियों का धावा, पैरेलल लाइसेंस के विरोध में जोरदार प्रदर्शन

Panchkula News: पंचकूला में HERC दफ्तर पर बिजली कर्मचारियों का धावा, पैरेलल लाइसेंस के विरोध में जोरदार प्रदर्शन

पंचकूला में HERC दफ्तर पर बिजली कर्मचारियों का धावा, पैरेलल लाइसेंस के विरोध में जोरदार प्रदर्शन

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AAmandeep Singh

Panchkula News: हरियाणा में बिजली विभाग को निजी हाथों में सौंपने की आशंकाओं के बीच बुधवार को बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों का गुस्सा सरेराह देखने को मिला। ‘हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा’ के बैनर तले प्रदेशभर से आए हजारों कर्मचारियों, अधिकारियों और उपभोक्ताओं ने पंचकूला के सेक्टर-4 स्थित हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) मुख्यालय के बाहर जमकर विरोध-प्रदर्शन किया।

आयोग द्वारा पैरेलल लाइसेंस के मुद्दे पर 3 सितंबर को बुलाई गई जनसुनवाई के दौरान पहुंचे इन प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए साफ किया कि राज्य की सार्वजनिक बिजली व्यवस्था को किसी भी कीमत पर निजी कंपनियों के हवाले नहीं होने दिया जाएगा।

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निजीकरण की तरफ खतरनाक कदम, आम जनता पर पड़ेगा सीधा असर

प्रदर्शन को संबोधित करते हुए संयुक्त संघर्ष मोर्चा के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने पैरेलल लाइसेंस प्रणाली को बेहद नुकसानदेह करार दिया। उन्होंने कहा कि पैरेलल लाइसेंस असल में बिजली क्षेत्र के निजीकरण का एक पिछला दरवाजा है। निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाई जा रही ऐसी नीतियां न सिर्फ सरकारी बिजली तंत्र को खोखला करेंगी, बल्कि इसका सीधा खामियाजा आम घरेलू उपभोक्ताओं, छोटे व्यापारियों और किसानों को भुगतना पड़ेगा।

कर्मचारियों का कहना था कि मुनाफा कमाने वाली निजी कंपनियां केवल फायदे वाले इलाकों में सेवा देंगी, जिससे सरकारी निगमों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा और आखिरकार बिजली की दरें बढ़ा दी जाएंगी।

जनसुनवाई में दर्ज कराया कड़ा विरोध, आयोग दफ्तर में हुई वार्ता

चूंकि 3 सितंबर की यह जनसुनवाई प्रदेश की भावी बिजली व्यवस्था के लिहाज से बेहद निर्णायक मानी जा रही थी, इसलिए सुबह से ही रोहतक, हिसार, अंबाला और करनाल समेत राज्य के तमाम जिलों से कर्मचारी पंचकूला पहुंचने लगे थे। आयोग दफ्तर के बाहर भारी नारेबाजी के बाद कर्मचारियों का एक प्रतिनिधिमंडल एचईआरसी के उच्च अधिकारियों से बातचीत करने अंदर गया।

वार्ता के दौरान मोर्चा के प्रतिनिधियों ने आयोग के सामने कर्मचारियों और जनता की चिंताओं को प्रमुखता से रखा और पैरेलल लाइसेंस की प्रक्रिया को तुरंत रद्द करने की मांग उठाई।

आयोग के आश्वासन के बाद खत्म हुआ धरना, संघर्ष जारी रखने का ऐलान

काफी देर चली बातचीत के बाद आयोग के अधिकारियों ने प्रदर्शनकारी कर्मचारियों को आश्वस्त किया कि विनियामक आयोग खुद पैरेलल लाइसेंस के पक्ष में नहीं है। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि आयोग ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहता जिससे राज्य में बिजली विभाग के निजीकरण को बढ़ावा मिले या उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़े।

आयोग की ओर से मिले इस सकारात्मक आश्वासन के बाद बिजली कर्मचारियों ने अपने विरोध-प्रदर्शन को स्थगित करने पर सहमति जताई और शांतिपूर्वक वापस लौटे। हालांकि, संयुक्त मोर्चा के संयोजकों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में चोरी-छिपे निजीकरण की कोई भी कोशिश की गई, तो कर्मचारी और उपभोक्ता मिलकर राज्यव्यापी बड़ा आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेंगे।

“आयोग के अधिकारियों ने हमारे सामने स्पष्ट किया है कि वे पैरेलल लाइसेंस के पक्ष में नहीं हैं। इस आश्वासन के बाद हमने आज का प्रदर्शन वापस ले लिया है, लेकिन सार्वजनिक बिजली सेवा की रक्षा के लिए हमारी सतर्कता और संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।”
— पदाधिकारी, हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा

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