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Child Rehabilitation Center: पानीपत: बाल पुनर्वास केंद्र से 4 बच्चे फरार, स्टोर का कुंडा तोड़कर खाली प्लॉट के रास्ते भागे

GGaganpreet Kaur
पानीपत: बाल पुनर्वास केंद्र से 4 बच्चे फरार, स्टोर का कुंडा तोड़कर खाली प्लॉट के रास्ते भागे
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पानीपत। शहर के शिवनगर स्थित बाल श्रमिक पुनर्वास केंद्र की सुरक्षा व्यवस्था पर उस वक्त सवालिया निशान लग गए, जब वहां से चार बच्चे फिल्मी अंदाज में फरार हो गए। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से दो किशोरों को महज दो दिन पहले ही रेस्क्यू कर यहां लाया गया था। चारों बच्चों ने सोमवार दोपहर सोने का बहाना बनाया और स्टाफ की नजरों से बचकर स्टोर रूम के पीछे के दरवाजे का कुंडा तोड़कर रफूचक्कर हो गए।

रेस्क्यू के 48 घंटे भी नहीं टिके बच्चे

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मामला तब और गंभीर हो जाता है जब पता चलता है कि भागने वाले दो किशोर ‘फरार’ होने के आदि हैं। जानकारी के मुताबिक, ये दोनों किशोर पिछले शुक्रवार को सोनीपत के खानपुर स्थित ‘सपना बाल कुंज’ से भागे थे। शनिवार को ही इसराना थाना पुलिस ने इन्हें चमराड़ा गांव से रेस्क्यू किया और सुधार की उम्मीद में शिवनगर पुनर्वास केंद्र छोड़ा था। वहीं, इनके साथ भागे अन्य दो बच्चे (उम्र 12 और 7 साल) सोनीपत के जटवाड़ा के रहने वाले हैं, जिन्हें शुक्रवार को जीआरपी ने रेलवे स्टेशन से सुरक्षित रेस्क्यू किया था।

स्टाफ को चकमा देकर चुराई चाबी

केंद्र के वार्डन सोमदत्त ने पुलिस को बताया कि संस्थान में कुल 27 बच्चे मौजूद थे। सोमवार दोपहर करीब 2 बजे खाना खाने के बाद इन चारों ने योजना के तहत सोने का नाटक किया और स्टोर के पास वाले कमरे में चले गए। इसी दौरान उन्होंने बड़ी चालाकी से स्टाफ की नजर बचाकर स्टोर की चाबी गायब कर दी। जब कर्मचारी अपने रोजमर्रा के कामों में व्यस्त हुए, तो बच्चों ने स्टोर का ताला खोलकर अंदर प्रवेश किया। पीछे के दरवाजे की चाबी न मिलने पर उन्होंने कुंडा तोड़ दिया और पास के खाली प्लॉट के रास्ते भाग निकले।

सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही पुलिस

वारदात का पता तब चला जब काफी देर तक बच्चों की कोई हलचल न होने पर कर्मचारी कमरे में गए। वहां चारों को गायब देख केंद्र में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में पुलिस को सूचना दी गई, जिसके बाद सेक्टर-29 थाना पुलिस ने शिवनगर कॉलोनी और आसपास के रास्तों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी है। पुलिस ने फिलहाल अपहरण की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है, जो इस तरह के मामलों में एक मानक कानूनी प्रक्रिया है।

बच्चों का इस तरह बार-बार रेस्क्यू केंद्रों से भाग जाना प्रशासन और सुरक्षा इंतजामों पर बड़े सवाल खड़े करता है। आखिर क्यों इन केंद्रों में बच्चों की काउंसलिंग इतनी प्रभावी नहीं हो पा रही कि वे वहां रुकने के बजाय भागने को प्राथमिकता दे रहे हैं? फिलहाल पुलिस की टीमें सोनीपत और आसपास के इलाकों में दबिश दे रही हैं।

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