Panipat Consumer Court: हरियाणा के पानीपत जिले में जीवन बीमा क्लेम की आधी-अधूरी रकम देकर इतिश्री करने वाली एक निजी बीमा कंपनी को जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने करारा झटका दिया है।
आयोग ने बजाज आलियांज लाइफ इंश्योरेंस कंपनी को मृतक की विधवा के क्लेम केस को दोबारा खोलकर उसका निपटारा करने का सख्त निर्देश दिया है। (District Consumer Disputes Redressal Commission Panipat) संजय कॉलोनी की रहने वाली पीड़िता मुकेश रानी ने आरोप लगाया था कि उनके पति की मृत्यु के बाद बीमा कंपनी ने 2.50 लाख रुपये का पूरा क्लेम देने के बजाय महज 25 हजार रुपये उनके खाते में भेजकर पॉलिसी बंद कर दी थी। आयोग के इस फैसले से पीड़ित परिवार में न्याय की उम्मीद जगी है।
नीति लेने के एक महीने बाद ही हो गई थी पति की मृत्यु
पूरे मामले की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो संजय कॉलोनी निवासी वीरेंद्र सिंह ने 27 जनवरी 2023 को बजाज आलियांज से 2.50 लाख रुपये की बीमित राशि वाली एक लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी ली थी।
इसके एवज में उन्होंने 26,125 रुपये का प्रीमियम भी जमा कराया था। यह पॉलिसी 15 साल की अवधि के लिए थी और इसमें 10 साल तक प्रीमियम देना तय हुआ था। हालांकि, कुदरत को कुछ और ही मंजूर था; पॉलिसी लेने के महज एक महीने बाद 28 फरवरी 2023 को सीने में उठे तेज दर्द की वजह से घर पर ही वीरेंद्र सिंह का देहांत हो गया।
कंपनी ने लौटाया केवल प्रीमियम, पीड़िता पहुंची आयोग
पति के अचानक गुजर जाने के बाद आर्थिक तंगी से जूझ रही मुकेश रानी ने 8 जून 2023 को बीमा कंपनी में जरूरी कागजात जमा कराकर क्लेम दाखिल किया। (Bajaj Allianz Life Insurance Claim) आरोप है कि कंपनी ने पूरी बीमित राशि 2.50 लाख रुपये देने के बजाय 14 जून को केवल 25 हजार रुपये की मामूली रकम वापस भेजी और पॉलिसी को बंद घोषित कर दिया।
कंपनी का कहना था कि चूंकि केवल एक ही प्रीमियम भरा गया था, इसलिए पॉलिसी शर्तों के अनुसार प्रीमियम राशि वापस कर मामला खत्म कर दिया गया। बार-बार गुहार लगाने और कानूनी नोटिस भेजने के बाद भी जब बात नहीं बनी, तो मुकेश रानी ने उपभोक्ता आयोग की शरण ली।
आयोग ने तय की 45 दिन की डेडलाइन, दोबारा शिकायत का भी विकल्प
आयोग के अध्यक्ष डॉ. आरके डोगरा, सदस्य डॉ. रेखा चौधरी और विनीत कौशिक की पीठ ने दोनों पक्षों के तर्कों और दस्तावेजों की गहन समीक्षा की। आयोग ने माना कि चूंकि कंपनी ने क्लेम को औपचारिक रूप से खारिज करने के बजाय सीधे बंद कर दिया था, इसलिए इस पर नए सिरे से पारदर्शी सुनवाई जरूरी है।
आयोग ने मुकेश रानी को 15 दिन के भीतर आवश्यक दस्तावेज और क्लेम फॉर्म जमा करने का समय दिया है। वहीं, बीमा कंपनी को निर्देश दिया गया है कि दस्तावेज मिलते ही 45 दिनों के भीतर क्लेम पर अंतिम फैसला करे। आयोग ने यह भी साफ किया कि यदि कंपनी के फैसले से पीड़िता संतुष्ट नहीं होती है, तो वह इसी आधार पर दोबारा आयोग का दरवाजा खटखटा सकती है।
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