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Child Murder Case: तांत्रिक की हैवानियत का अंत: झाड़ियों में मासूम की हत्या करने वाले शिवकुमार को उम्रकैद

GGaganpreet Kaur
तांत्रिक की हैवानियत का अंत: झाड़ियों में मासूम की हत्या करने वाले शिवकुमार को उम्रकैद
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पानीपत। साढ़े तीन साल पहले एक सात साल की मासूम के साथ हुई रूह कंपा देने वाली दरिंदगी और हत्या के मामले में आखिरकार न्याय की जीत हुई है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश पीयूष शर्मा की अदालत ने मंगलवार को इस मामले के मुख्य आरोपी, स्वयंभू तांत्रिक शिवकुमार (35) को दोषी करार देते हुए ऐसी सजा सुनाई है कि वह अब जेल की सलाखों के पीछे ही अपनी आखिरी सांस लेगा। अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि इस नरपिशाच के लिए समाज में कोई जगह नहीं है।

मजदूरी करने वाले परिवार का विश्वास और वह काली रात

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यह कहानी विश्वासघात और एक ऐसी हैवानियत की है जिसने उस वक्त पूरे पानीपत को झकझोर कर रख दिया था। कुलदीप नगर में रहने वाला शिवकुमार एक आरा मशीन पर काम करता था। वह पास ही रहने वाले एक गरीब मजदूर परिवार के इतना करीब हो गया था कि घर के लोग उसे अपना शुभचिंतक मानते थे। लेकिन 24 अक्टूबर 2022 की शाम जब बच्ची के माता-पिता घर पर नहीं थे, तब इस ‘तांत्रिक’ के भीतर छिपा भेड़िया बाहर आ गया। वह मासूम को बहला-फुसलाकर पास की झाड़ियों में ले गया, जहां उसने न केवल बच्ची की अस्मत तार-तार की, बल्कि पकड़े जाने के डर से बच्ची की अपनी ही पायजामी से गला घोंटकर उसे मौत के घाट उतार दिया।

तलाश का नाटक और हावड़ा तक भागने की जद्दोजहद

वारदात को अंजाम देने के बाद शिवकुमार ने जो किया, वह और भी चौंकाने वाला था। जब बच्ची घर नहीं मिली और पिता ने 25 अक्टूबर को गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई, तो आरोपी खुद भी परिजनों के साथ बच्ची को ढूंढने का स्वांग रचता रहा। वह पुलिस और परिवार के साथ हर कदम पर मौजूद था ताकि किसी को शक न हो। लेकिन जैसे ही पुलिस उन झाड़ियों के करीब पहुंची जहां मासूम का शव पड़ा था, शिवकुमार की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई और वह मौके से भाग निकला। पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस की मदद से उसे पश्चिम बंगाल के हावड़ा से दबोचा था।

पुराना अपराधी: यमुनानगर में भी मासूम को बनाया था शिकार

जांच के दौरान पुलिस के सामने यह कड़वा सच भी आया कि शिवकुमार कोई पहली बार अपराध नहीं कर रहा था। इससे पहले जब वह यमुनानगर में रहता था, तब भी उसने एक बच्चे के साथ कुकर्म की घिनौनी वारदात को अंजाम दिया था। उस मामले में भी वह दोषी सिद्ध हुआ था और अदालत ने उसे पांच साल की कैद सुनाई थी। सजा काटकर बाहर आने के बाद भी उसकी फितरत नहीं बदली और उसने पानीपत में इस मासूम की जान ले ली।

अदालत का कड़ा रुख: अर्थदंड और अंतिम सांस तक कैद

अदालत ने मामले की गंभीरता और आरोपी के आपराधिक इतिहास को देखते हुए उसे मरते दम तक जेल में रहने की सजा सुनाई। इसके साथ ही आरोपी पर 1.35 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। कानून के जानकारों का कहना है कि ऐसी सजा समाज में एक कड़ा संदेश देती है कि मासूमों के साथ दरिंदगी करने वालों के लिए कानून के हाथ बेहद लंबे और सख्त हैं। साढ़े तीन साल के लंबे इंतजार के बाद अब उस मासूम की आत्मा को शांति मिलेगी और परिवार को यह भरोसा कि न्याय अभी जिंदा है।

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