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Truckers Strike Green Tax: पानीपत में ट्रकों का चक्का जाम: ग्रीन टैक्स के विरोध में खड़े हुए 200 ट्रक, दिल्ली जाने वाला माल अटका

AAmandeep Singh
पानीपत में ट्रकों का चक्का जाम: ग्रीन टैक्स के विरोध में खड़े हुए 200 ट्रक, दिल्ली जाने वाला माल अटका
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पानीपत। दिल्ली-एनसीआर में लागू हुए नए ग्रीन टैक्स के खिलाफ ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल अब पूरी तरह आक्रामक हो चुकी है। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस की इस तीन दिवसीय देशव्यापी हड़ताल का सबसे बड़ा झटका हरियाणा के औद्योगिक शहर पानीपत को लगा है।

शुक्रवार को हड़ताल के दूसरे दिन पानीपत के ट्रांसपोर्ट नगर और दिल्ली हाईवे के किनारे करीब 150 से 200 ट्रक कतारों में खड़े दिखाई दिए। चूंकि पानीपत से दिल्ली और वाया दिल्ली होकर जाने वाले ट्रकों की संख्या सबसे ज्यादा रहती है, इसलिए यह पूरा रूट पूरी तरह सूना नजर आया। इस चक्का जाम से पानीपत के प्रमुख हैंडलूम और टेक्सटाइल उद्योगों से निकलने वाला माल ट्रकों और गोदामों में ही फंसा रह गया है, जिससे व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है।

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“₹10 लाख महंगी गाड़ी दिलवाई, अब टैक्स की मार”: नीतियों पर भड़के मलिक

पानीपत ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के प्रधान धर्मवीर मलिक ने सरकार की मंशा और नीतियों पर तीखे सवाल दागे हैं। मलिक का कहना है कि ट्रांसपोर्टरों को पहले तो पर्यावरण का हवाला देकर यूरो-4 गाड़ियां बंद करने पर मजबूर किया गया और करीब 10 लाख रुपये महंगी यूरो-6 गाड़ियां खरीदने का दबाव बनाया गया। अब जब भारी कर्ज लेकर गाड़ियां लीं, तो सरकार ने प्रति ट्रक ग्रीन टैक्स को 3 हजार रुपये से बढ़ाकर सीधे 5 हजार रुपये कर दिया।

धर्मवीर मलिक ने सीधे तौर पर चुनौती देते हुए कहा कि सरकार आज तक वसूले गए करोड़ों रुपये के ग्रीन टैक्स का हिसाब सार्वजनिक करे कि आखिर प्रदूषण कम करने में यह पैसा कहां लगा? उन्होंने मांग की कि 21 से 23 मई तक जब दिल्ली में ट्रकों का प्रवेश शून्य है, तब सरकार इन तीन दिनों के प्रदूषण स्तर की तुलना आम दिनों से करके देश को दिखाए, ताकि पता चले कि प्रदूषण के लिए सिर्फ ट्रक जिम्मेदार नहीं हैं।

₹50 लाख का रोजाना नुकसान, ड्राइवरों और क्लीनरों के चूल्हे ठंडे

एसोसिएशन के आंकड़ों के मुताबिक, पानीपत से हर दिन लगभग 50 लाख रुपये का ट्रांसपोर्ट बिजनेस होता है। ट्रकों के खड़े होने से केवल मालिकों को ही नहीं, बल्कि दिहाड़ी पर चलने वाले चालकों और क्लीनरों को भी तगड़ा झटका लगा है। राजस्थान और पंजाब जैसे राज्यों से माल लेकर आए ट्रक चालक मुकेश ने बताया कि गाड़ियां खड़ी होने से उनका काम पूरी तरह ठप है और रास्ते में खाने-पीने के लाले पड़ रहे हैं।

वहीं दूसरे चालक सुरेश ने दर्द बयां करते हुए कहा कि डीजल, टायर और मेंटेनेंस के दाम आसमान छू रहे हैं, लेकिन गाड़ियों का भाड़ा नहीं बढ़ रहा। ऊपर से इन मनमाने टैक्सों ने आमदनी पूरी तरह खत्म कर दी है। ट्रांसपोर्टरों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने ग्रीन टैक्स का फैसला वापस नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में यह सप्लाई चेन पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगी, जिसका सीधा असर आम जनता की जेब पर महंगाई के रूप में पड़ेगा।

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