Breaking News
Magha Shraddha 2026: 7 अक्टूबर को है मघा श्राद्ध, जानें द्वादशी तिथि पर तर्पण का शुभ समय और नियमKaithal Nursing Staff Strike: ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के खिलाफ कैथल में नर्सिंग स्टाफ का हल्लाबोल, 5 से 7 अक्टूबर तक हड़तालMahendragarh : हकेवि की डॉ. सुमन रानी को मिला ‘श्रेष्ठ शिक्षक अवार्ड’, शिक्षा मंत्री ने किया सम्मानितNarnaul: हरियाणा के सभी जिलों में 8 अक्ट्रबर को होगा ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ विशाल रोष मार्चCEC ज्ञानेश कुमार मामले में SC ने EC से मांगा जवाब, CJI बोले Form-6 पर- हमने कोई बदलाव मंजूर नहीं कियाMagha Shraddha 2026: 7 अक्टूबर को है मघा श्राद्ध, जानें द्वादशी तिथि पर तर्पण का शुभ समय और नियमKaithal Nursing Staff Strike: ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के खिलाफ कैथल में नर्सिंग स्टाफ का हल्लाबोल, 5 से 7 अक्टूबर तक हड़तालMahendragarh : हकेवि की डॉ. सुमन रानी को मिला ‘श्रेष्ठ शिक्षक अवार्ड’, शिक्षा मंत्री ने किया सम्मानितNarnaul: हरियाणा के सभी जिलों में 8 अक्ट्रबर को होगा ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ विशाल रोष मार्चCEC ज्ञानेश कुमार मामले में SC ने EC से मांगा जवाब, CJI बोले Form-6 पर- हमने कोई बदलाव मंजूर नहीं किया

Panipat Canal Accident: पानीपत की नरायणा नहर में फरिश्ता बनकर कूदा सचिन, डूबते हुए परिवार के 5 सदस्यों को बचाया

AAmandeep Singh
पानीपत की नरायणा नहर में फरिश्ता बनकर कूदा सचिन, डूबते हुए परिवार के 5 सदस्यों को बचाया
शेयर करें
AI Quick Summary

Want to save time? Let our AI read the article and give you 3 quick bullet points.

Listen to this article
AUDIO VERSION

पानीपत। कहते हैं कि फरिश्ते आसमान से नहीं आते, वे हमारे बीच से ही निकलकर सामने आते हैं। पानीपत के नरायणा पुल पर बीती रात कुछ ऐसा ही मंजर देखने को मिला। जब एक कार अनियंत्रित होकर अंधेरे में नहर में समा गई, तो वहां मौजूद 24 साल के सचिन छौक्कर ने एक पल की भी देरी नहीं की। अपने ट्रैक्टर को पुल पर ही खड़ा कर सचिन सीधे उफनती नहर में कूद गया। यह उसकी बहादुरी ही थी कि आज सौदापुर का एक पूरा परिवार सुरक्षित अपने घर लौट सका है।

रात का सन्नाटा और चीख-पुकार: कैसे हुआ हादसा?

विज्ञापन

सौदापुर निवासी दीपक अपने ससुराल शेखपुरा (गनौर) से पत्नी मंजू और तीन बच्चों के साथ कार में सवार होकर गांव वापस लौट रहे थे। रात करीब 8 बजे जब वे नरायणा पुल के पास पहुंचे, तो अचानक कार पर से नियंत्रण खो गया और गाड़ी सीधे नहर में जा गिरी। खुशनसीबी यह रही कि गिरते समय कार का पिछला हिस्सा पुल के पिलर से टकरा गया, जिससे पीछे का शीशा टूट गया। इसी टूटे शीशे ने परिवार के लिए उम्मीद की एक खिड़की खोल दी, लेकिन तेज बहाव और अंधेरे के बीच बाहर निकलना नामुमकिन लग रहा था।

पैर में लगी चोट, पर नहीं थमे कदम

नहर के पास से गुजर रहे सचिन ने जैसे ही कार को गिरते देखा, उसने अपनी जान जोखिम में डाल दी। नहर में छलांग लगाते समय सचिन के पैर में गंभीर चोट भी आई, लेकिन उसके सामने एक परिवार डूब रहा था। सचिन ने पहले एक-एक कर तीनों बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला। इसके बाद वह दोबारा पानी के बीच गया और मंजू को बाहर लाया। अंत में उसने गाड़ी चला रहे दीपक को भी सुरक्षित किनारे पर खींच लिया।

समालखा पुलिस और ग्रामीणों ने थपथपाई पीठ

सूचना मिलते ही समालखा थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिसकर्मियों और वहां जमा राहगीरों ने जब सचिन की बहादुरी की कहानी सुनी, तो हर कोई दंग रह गया। ग्रामीणों का कहना है कि जिस बहाव में अच्छे-अच्छे गोताखोर उतरने से कतराते हैं, वहां सचिन ने अकेले पांच लोगों को बचाकर चमत्कार कर दिया। मौके पर मौजूद लोगों ने एक सुर में मांग की है कि ऐसे जांबाज युवाओं को जिला प्रशासन और हरियाणा सरकार की ओर से सम्मानित किया जाना चाहिए, ताकि समाज में नेकदिली का संदेश जा सके।

विज्ञापन

पानीपत की और ख़बरें

ताज़ा ख़बरें सीधे अपने ईमेल पर

जगमार्ग न्यूज़ की बड़ी ख़बरें रोज़ अपने इनबॉक्स में पाएं। मुफ़्त, कभी भी अनसब्सक्राइब करें।