Patti Rain Crop Damage : अचानक करवट लेते मौसम ने तरनतारन के पट्टी इलाके के अन्नदाताओं की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ा दी हैं। अलसुबह से छाए बादलों के बीच दोपहर बाद करीब तीन बजे शुरू हुई मूसलाधार बारिश और तेज आंधी-तूफान ने भारी तबाही मचाई।
इस बेमौसमी मार का सबसे बुरा असर खेतों में पककर तैयार खड़ी धान की फसल और स्थानीय अनाज मंडियों में खुले आसमान के नीचे पड़ी उपज पर पड़ा है। तेज हवाओं के झोंकों ने कई जगहों पर सड़क किनारे लगे पुराने पेड़ों को जड़ों से उखाड़कर गिरा दिया, जिससे यातायात और स्थानीय जनजीवन भी कुछ समय के लिए प्रभावित हुआ।
मंडियों में भीगा धान, किसानों के सामने रोजी-रोटी का संकट
एक तरफ जहां खेतों में पानी भर जाने से फसल के गिरने का खतरा पैदा हो गया है, वहीं दूसरी तरफ मंडियों में पड़ी धान की बोरियां भीग जाने से किसानों की नींद उड़ गई है। स्थानीय किसानों भोला सिंह और गुरचेत सिंह ने बताया कि उन्होंने भारी लागत और महीनों की कड़ी मेहनत के बाद अपनी फसल को काटकर मंडी तक पहुंचाया था।
लेकिन अचानक बरसे पानी के आगे उनका सारा इंतजाम धरा रह गया। हालांकि किसानों ने आनन-फानन में तिरपाल और प्लास्टिक की शीटें डालकर अनाज को ढकने की कोशिश की, मगर तेज बारिश के पानी ने कई जगहों पर धान को पूरी तरह भिगो दिया। अब नमी बढ़ जाने के कारण फसल की गुणवत्ता प्रभावित होने और सरकारी खरीद के दौरान कटौती या देरी की आशंका से किसान बेहद परेशान हैं।
कृषि विभाग जुटा नुकसान के आंकलन में, किसानों ने लगाई मुआवजे की गुहार
खेती-किसानी के मोर्चे पर बढ़ती लागत के बीच मौसम की यह बेरहमी किसानों की कमर तोड़ने के लिए काफी है। प्रभावित किसानों ने सरकार और जिला प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि विशेष गिरदावरी करवाकर जल्द से जल्द नुकसान का मुआवजा दिया जाए, ताकि आर्थिक संकट से उबरा जा सके।
उधर, स्थिति की गंभीरता को देखते हुए खेतीबाड़ी विभाग के अधिकारी डॉ. भूपिंदर सिंह ने बताया कि विभागीय टीमें मैदानी स्तर पर पहुंच चुकी हैं और बारिश से हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है। सर्वेक्षण पूरा होने के बाद ही वास्तविक नुकसान की तस्वीर साफ हो सकेगी, तब तक पट्टी का अन्नदाता कुदरत के इस कहर के बाद आसमान की तरफ टकटकी लगाए राहत का इंतजार कर रहा है।

