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Peace dog Aloka: कोलकाता की सड़कों से अमेरिका के बर्फीले रास्तों तक: मिलिए 3700 किमी पैदल चलने वाले 'पीस डॉग' आलोका से

AAmandeep Singh
Peace dog Aloka: कोलकाता की सड़कों से अमेरिका के बर्फीले रास्तों तक: मिलिए 3700 किमी पैदल चलने वाले 'पीस डॉग' आलोका से
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गुरुग्राम। साइबर सिटी के आलीशान होटल ‘द वेस्टिन’ का माहौल उस वक्त पूरी तरह अध्यात्म और कौतूहल से भर गया, जब वहां दुनिया का ध्यान खींचने वाले अनोखे ‘पीस डॉग’ आलोका का आगमन हुआ। ‘वॉक फॉर पीस’ संस्था की ओर से आयोजित इस खास ‘मीट एंड ग्रीट’ कार्यक्रम में आलोका को करीब से देखने और सहलाने के लिए दिल्ली-एनसीआर से सैकड़ों की संख्या में पशु प्रेमी, एक्टिविस्ट और आम लोग पहुंचे। करीब चार साल के इस भारतीय नस्ल (परिया ब्रीड) के डॉग की असीम शांति और सौम्यता को देखकर वहां मौजूद हर शख्स दंग रह गया।

माथे पर दिल का निशान और जादुई अतीत

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आलोका की पहचान और उसका शांत स्वभाव जितना अनूठा है, उसकी कहानी भी उतनी ही चमत्कारी है। उसके माथे पर कुदरती तौर पर सफेद रंग का ‘दिल’ (हार्ट शेप) का निशान बना हुआ है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर आलोका के 4.82 लाख से ज्यादा चाहने वाले हैं, जो लाइव मैप के जरिए उसकी हर शांति यात्रा को ट्रैक करते हैं। लेकिन चंद साल पहले तक हालात ऐसे नहीं थे। साल 2022 तक यह डॉग कोलकाता की तंग गलियों और सड़कों पर लावारिस घूमने वाला एक बेघर जीव था।

बोधगया की यात्रा से बदला जीवन का रास्ता

आलोका की जिंदगी में यू-टर्न तब आया जब भारत और बोधगया की शांति यात्रा पर आए बौद्ध भिक्षुओं के एक दल के पीछे यह कुत्ता खुद-ब-खुद चलने लगा। बिना किसी लालच या स्वार्थ के उसने लगातार 100 से अधिक दिनों तक भिक्षुओं के साथ जंगलों, गांवों और तपती सड़कों की खाक छानी। इस सफर के दौरान वह एक भीषण कार हादसे का शिकार होकर लहूलुहान भी हुआ, लेकिन जैसे ही घाव ठीक हुए, वह दोबारा भिक्षुओं के शांत काफिले के पीछे आकर खड़ा हो गया।

भिक्षु पन्नाकारा ने दिया ‘आलोका’ नाम

उसकी इसी अटूट निष्ठा को देखकर वियतनामी-अमेरिकी बौद्ध भिक्षु वेनरेबल भिक्खु पन्नाकारा का दिल पसीज गया। उन्होंने इसे गोद लिया और पालि भाषा का नाम ‘आलोका’ दिया, जिसका मतलब ‘प्रकाश’ या ‘रोशनी’ होता है। भिक्षु पन्नाकारा की करुणा ने आलोका के जीवन को पूरी तरह बदल दिया। इसके बाद भिक्षु उसे अपने साथ अमेरिका ले गए, जहां वह आधिकारिक तौर पर वैश्विक ‘वॉक फॉर पीस’ अभियान का मुख्य चेहरा बन गया।

अमेरिका में 3,700 किलोमीटर की पदयात्रा

अक्टूबर 2025 में टेक्सास से शुरू हुई इस कठिन यात्रा के दौरान आलोका ने बौद्ध भिक्षुओं के साथ अमेरिका के 10 अलग-अलग राज्यों से गुजरते हुए करीब 3,700 किलोमीटर (2,300 मील) की पैदल दूरी तय की। अमेरिका की हाड़ कंपाने वाली बर्फीली ठंड, पथरीले रास्तों और थका देने वाले सफर में भी इस देसी डॉग ने जो धैर्य दिखाया, उसकी चर्चा आज पूरी दुनिया में हो रही है। हाल ही में भारत लौटने पर नई दिल्ली में पूर्व केंद्रीय मंत्री और पशु अधिकार कार्यकर्ता मेनका गांधी ने भी इससे मुलाकात कर इसकी पीठ थपथपाई थी।

बेजुबानों के प्रति दयाभाव का संदेश

गुरुग्राम के इस आयोजन का मकसद सिर्फ आलोका की लोकप्रियता दिखाना नहीं, बल्कि समाज को एक बड़ा संदेश देना था। भिक्षु पन्नाकारा ने मंच से कहा कि शांति की शुरुआत हमारे अपने दिलों से और समाज के सबसे कमजोर व बेसहारा जीवों की रक्षा से होती है। बिना कुछ बोले भी आलोका दुनिया को सह-अस्तित्व का सबसे बड़ा पाठ पढ़ा रहा है कि अगर सही प्यार और गरिमा मिले, तो सड़कों पर रहने वाला एक मामूली जीव भी मानवता की मिसाल बन सकता है।

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