PM Dhan Dhaanya Krishi Yojana: राजस्थान के नागौर जिले ने प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत देशभर में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। फसल विविधीकरण और टिकाऊ खेती के तरीकों को बढ़ावा देने में नागौर ने पहला स्थान हासिल किया है। वहीं, सभी निर्धारित उद्देश्यों और योजनाओं के संयुक्त प्रदर्शन में जिला 84.13 अंकों के साथ देशभर में दूसरे नंबर पर रहा। केंद्र सरकार की इस योजना का उद्देश्य कम कृषि उत्पादकता, कम फसल सघनता और खेती के लिए कम कर्ज मिलने जैसी चुनौतियों से जूझ रहे जिलों में कृषि व्यवस्था को मजबूत करना है।
योजना के तहत देशभर के 100 जिलों का चयन किया गया है, जिनमें राजस्थान के 8 जिले शामिल हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश में योजना के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। नागौर का प्रदर्शन इस बात को दिखाता है कि फसल उत्पादन बढ़ाने के साथ खेती के तरीकों में बदलाव, कृषि ऋण की उपलब्धता और फसल कटाई के बाद उपज के सुरक्षित भंडारण पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
फसल विविधीकरण में नागौर अव्वल, पाली ने भी बनाई जगह
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत कृषि विकास से जुड़े छह प्रमुख उद्देश्यों पर काम किया जा रहा है। इनमें फसल उत्पादन बढ़ाना, फसल विविधीकरण और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देना, फसल कटाई के बाद भंडारण क्षमता में सुधार करना, कृषि ऋण तक किसानों की पहुंच बढ़ाना, सिंचाई के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था के जरिए योजनाओं का लाभ पहुंचाना शामिल है। इनमें फसल विविधीकरण और टिकाऊ खेती के तरीकों को बढ़ावा देने के मामले में नागौर ने 18.44 अंक हासिल किए और देशभर में पहला स्थान प्राप्त किया। फसल कटाई के बाद भंडारण क्षमता बढ़ाने और किसानों को लंबी अवधि के कृषि ऋण उपलब्ध कराने में जिला चौथे स्थान पर रहा। खेतों की उत्पादकता बढ़ाने तथा बेहतर गवर्नेंस और सर्विस डिलीवरी के मामले में नागौर को पांचवां स्थान मिला।
राजस्थान के पाली जिले ने भी योजना की रैंकिंग में जगह बनाई है। सिंचाई के बुनियादी ढांचे में सुधार के मामले में पाली देशभर में आठवें स्थान पर रहा। सभी योजनाओं और निर्धारित उद्देश्यों को मिलाकर किए गए आकलन में पाली को 11वां स्थान मिला। इससे राज्य के दो जिलों का प्रदर्शन राष्ट्रीय स्तर पर सामने आया है। योजना के तहत चयनित जिलों में 11 विभागों की 36 योजनाओं के जरिए कृषि उत्पादकता बढ़ाने, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करने, फसलों में विविधता लाने, भंडारण व्यवस्था सुधारने और किसानों को कृषि ऋण उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। इन प्रयासों का उद्देश्य खेती से जुड़े अलग-अलग पहलुओं को एक साथ मजबूत करना है, ताकि किसानों को उत्पादन से लेकर उपज के भंडारण और आर्थिक जरूरतों तक बेहतर सहायता मिल सके।
जैसलमेर में जीरे की खेती और सौर सिंचाई को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना
योजना के तहत राजस्थान के जैसलमेर जिले में भी खेती से जुड़ी पहल को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। यहां 2 हजार एकड़ क्षेत्र में इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट यानी एकीकृत कीट प्रबंधन आधारित जीरे की खेती की जा रही है। इसके अलावा 500 एकड़ क्षेत्र में सौर ऊर्जा से चलने वाले स्प्रिंकलर सिंचाई सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन पहलों का उद्देश्य खेती में संसाधनों का बेहतर उपयोग करना, पानी की बचत करना और कृषि उत्पादकता में सुधार लाना है। सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई से खेतों तक पानी पहुंचाने में ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत का इस्तेमाल किया जा सकता है, जबकि एकीकृत कीट प्रबंधन फसल को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों से निपटने के व्यवस्थित तरीकों को बढ़ावा देता है।
योजना में फसल विविधीकरण पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। एक ही फसल पर निर्भरता कम होने से किसानों को बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव और फसल से जुड़े जोखिमों का सामना करने में मदद मिल सकती है। बाजरा और दलहन जैसी पोषक फसलों का उत्पादन बढ़ाने से किसानों के लिए आय के नए अवसर तैयार करने के साथ पोषण सुरक्षा को भी मजबूती मिल सकती है।
36 योजनाओं के जरिए कृषि विकास और किसानों को सहायता
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के साथ दूसरे मंत्रालयों, नीति आयोग, नाबार्ड और राज्य सरकारों के समन्वय से 36 योजनाओं पर काम किया जा रहा है। इनमें पीएम-किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, पीएम-किसान मानधन योजना, पीएम-कुसुम योजना, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, कृषोन्नति योजना और परंपरागत कृषि विकास योजना शामिल हैं। इसके अलावा बागवानी के समग्र विकास से जुड़ा मिशन, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन, राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, अटल भूजल योजना, राष्ट्रीय गोकुल मिशन, राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम और प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना जैसी योजनाएं भी इसमें शामिल हैं। कृषि प्रसंस्करण, ग्रामीण सड़क संपर्क, प्राथमिक कृषि साख समितियों के कंप्यूटरीकरण और किसान क्रेडिट कार्ड जैसी व्यवस्थाओं को भी इस समन्वित प्रयास का हिस्सा बनाया गया है।
योजना की निगरानी और प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिला स्तर पर कलेक्टर तथा राज्य स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समितियां गठित की गई हैं। राष्ट्रीय स्तर पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय कार्यकारी समिति और सचिव की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय निगरानी समिति योजना की देखरेख करती हैं। नीति आयोग की ओर से विकसित पोर्टल पर जिलों के प्रदर्शन की मासिक रैंकिंग भी की जाती है। मासिक रैंकिंग के जरिए जिलों में चल रही योजनाओं की प्रगति पर नजर रखी जाती है। इससे कृषि उत्पादकता, सिंचाई, भंडारण और किसानों को मिलने वाली सेवाओं से जुड़े कामकाज का आकलन किया जा सकता है। योजना का लक्ष्य कृषि क्षेत्र में पिछड़ रहे जिलों को बेहतर प्रदर्शन की ओर ले जाना और किसानों की आय बढ़ाने के लिए जरूरी सुविधाओं को मजबूत करना है। राजस्थान के किसानों के लिए खाद पर अपडेट: DAP के 14 रैक रास्ते में, 14 अक्टूबर तक पहुंचने की उम्मीद

