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पीएम मोदी की ‘सात अपीलों’ पर गरमाई राजनीति: राहुल गांधी बोले- देश चलाना अब बस की बात नहीं, ये नाकामी के सबूत

VVinita Kohli
पीएम मोदी की ‘सात अपीलों’ पर गरमाई राजनीति: राहुल गांधी बोले- देश चलाना अब बस की बात नहीं, ये नाकामी के सबूत
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पश्चिम एशिया में जारी संकट और बढ़ते वैश्विक दबाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से की गई सात अपीलों को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सोमवार को प्रधानमंत्री पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि जनता से त्याग मांगना सरकार की विफलता का प्रमाण है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि लोगों से सोना न खरीदने, विदेश यात्रा टालने, पेट्रोल कम इस्तेमाल करने और खाने के तेल की खपत घटाने जैसी बातें किसी नीति का हिस्सा नहीं बल्कि सरकार की नाकामी को दिखाती हैं। उन्होंने कहा कि 12 वर्षों में देश को ऐसी स्थिति में पहुंचा दिया गया है जहां सरकार लोगों को यह बताने लगी है कि क्या खरीदना है और क्या नहीं।

पीएम मोदी ने क्यों की थीं सात अपीलें

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को सिकंदराबाद में आयोजित एक जनसभा के दौरान वैश्विक हालात और आयात पर बढ़ती निर्भरता को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि भारत के पास तेल के बड़े भंडार नहीं हैं, इसलिए पेट्रोल, गैस और डीजल का इस्तेमाल कम करना जरूरी है। प्रधानमंत्री ने लोगों से अनावश्यक वाहन उपयोग कम करने, मेट्रो और कारपूलिंग अपनाने तथा जरूरत पड़ने पर वर्क फ्रॉम होम का विकल्प इस्तेमाल करने की अपील की थी। इसके साथ ही उन्होंने खाने के तेल की खपत घटाने, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और कुछ समय तक विदेश यात्राएं टालने की सलाह दी थी।

राहुल गांधी ने बताया ‘विफलता का सबूत’

राहुल गांधी ने इन अपीलों को लेकर कहा कि सरकार अब जनता पर बोझ डाल रही है। उन्होंने कहा कि अगर देश की आर्थिक और विदेश नीति मजबूत होती तो आम लोगों से इस तरह की अपीलें करने की जरूरत नहीं पड़ती। राहुल गांधी ने कहा कि सरकार की नीतियों की वजह से अब आम नागरिकों को अपनी जरूरतों और खर्चों पर रोक लगाने की सलाह दी जा रही है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि लगातार बढ़ती महंगाई और आयात निर्भरता ने सरकार की आर्थिक रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

विपक्षी दलों ने भी साधा निशाना

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार अर्थव्यवस्था और विदेश नीति दोनों मोर्चों पर विफल रही है। उन्होंने कहा कि चुनाव खत्म होने के बाद सरकार को अचानक संकट नजर आने लगा है। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने भी सवाल उठाते हुए कहा कि चुनावों के दौरान सरकार ने जनता को राहत दी, लेकिन अब लोगों से त्याग की बात की जा रही है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि देश की आर्थिक स्थिति सरकार के दावों से कहीं ज्यादा गंभीर है। वहीं तृणमूल कांग्रेस सांसद साकेत गोखले ने सवाल उठाया कि अगर आम नागरिकों से बचत की अपील की जा रही है तो मंत्री और वीआईपी अब भी बड़े काफिलों और सरकारी विमानों का इस्तेमाल क्यों कर रहे हैं।

आयात खर्च ने बढ़ाई चिंता

सरकारी आंकड़ों और आर्थिक रिपोर्टों के अनुसार भारत में सोने, कच्चे तेल, फर्टिलाइजर और विदेश यात्राओं पर भारी विदेशी मुद्रा खर्च हो रही है। 2025-26 में सोने के आयात पर करीब 6.40 लाख करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। वहीं विदेश यात्राओं पर भारतीयों का खर्च 3.65 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। फर्टिलाइजर आयात पर इस साल 1.50 लाख करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है, जबकि कच्चे तेल के आयात पर 10 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का बोझ पड़ सकता है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिससे भारत की आर्थिक चुनौतियां और बढ़ सकती हैं।

वैश्विक संकट के बीच बढ़ी राजनीतिक बहस

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार आयात पर निर्भरता घटाने की रणनीति पर जोर दे रही है। हालांकि विपक्ष इसे आर्थिक प्रबंधन की कमजोरी बता रहा है। आने वाले महीनों में महंगाई, ईंधन कीमतों और विदेशी मुद्रा भंडार को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है। सरकार का दावा है कि नागरिकों की भागीदारी से आयात खर्च कम किया जा सकता है, जबकि विपक्ष इसे जनता पर जिम्मेदारी डालने की कोशिश बता रहा है।

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