Praveen Kumar Arm Wrestling Gold Medal Punjab : पंजाब के हुनरमंद युवाओं ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अगर मन में दृढ़ इच्छाशक्ति हो, तो कोई भी शारीरिक बाधा सफलता के रास्ते में नहीं आ सकती। लुधियाना के 37 वर्षीय दिव्यांग खिलाड़ी प्रवीण कुमार ने राष्ट्रीय स्तर की आर्म रेसलिंग प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर पूरे राज्य का मान बढ़ाया है। जम्मू-कश्मीर में आयोजित इस प्रतियोगिता में देश के 10 राज्यों से आए लगभग 400 खिलाड़ियों ने अपना दम दिखाया था।
100 फीसदी दिव्यांगता के बावजूद वरिष्ठ श्रेणी में जीता गोल्ड
प्रवीण कुमार 100 प्रतिशत दिव्यांगता से जूझ रहे हैं, लेकिन उनका हौसला किसी भी सामान्य व्यक्ति से कम नहीं है। उन्होंने राष्ट्रीय प्रतियोगिता की वरिष्ठ (सिटिंग) श्रेणी में अपने सभी प्रतिद्वंद्वियों को पछाड़ते हुए पहला स्थान हासिल किया। पंजाब दिव्यांग एक्शन कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष लखवीर सिंह सैनी ने पट्टी में इस उपलब्धि की जानकारी देते हुए कहा कि प्रवीण का यह प्रदर्शन राज्य के सभी दिव्यांगजनों और युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणादायक है।
बिना किसी सरकारी मदद और रोजगार के जारी है संघर्ष
प्रवीण कुमार के पास फिलहाल कोई स्थायी रोजगार नहीं है और उनके परिवार की आर्थिक स्थिति भी बेहद सामान्य है। इसके बावजूद वे अपनी लगन के दम पर बिना किसी सरकारी वित्तीय सहायता के देश के अलग-अलग राज्यों में जाकर प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले रहे हैं। लखवीर सिंह सैनी ने कहा कि यदि सरकार ऐसे प्रतिभावान खिलाड़ियों को बुनियादी ढांचा, बेहतर प्रशिक्षण और आर्थिक संबल प्रदान करे, तो वे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी तिरंगा लहरा सकते हैं।
दिव्यांग खिलाड़ियों को सम्मान और सरकारी नौकरी देने की उठी मांग
पंजाब दिव्यांग एक्शन कमेटी ने पंजाब और केंद्र सरकार से मांग की है कि दिव्यांग एथलीटों के लिए एक विशेष खेल नीति बनाई जाए। कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को केवल प्रशंसा तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें उचित मान-सम्मान, वित्तीय अनुदान और सरकारी नौकरियां प्रदान की जाएं। इससे राज्य की अन्य प्रतिभाओं को भी आगे आने का प्रोत्साहन मिलेगा।

