Punjab DA Arrears : पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब के सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (Punjab DA Arrears) के बकाए के भुगतान में हो रही देरी पर राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया है। अदालत ने शुक्रवार को मामले की सुनवाई करते हुए सरकार के टालमटोल भरे रवैये पर कड़ा असंतोष जताया। हाईकोर्ट के कड़े निर्देशों के बाद पंजाब के मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा को खुद अदालत में हाजिर होना पड़ा।
सुप्रीम कोर्ट की याचिका और गलत जानकारी देने पर बढ़ा विवाद
सुनवाई के दौरान कर्मचारियों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील संजय कौशल ने अदालत के सामने कई गंभीर तथ्य रखे। उन्होंने बताया कि डीए बकाए पर हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) तो दायर की, लेकिन उसकी तकनीकी खामियां जानबूझकर दूर नहीं की गईं। इसके कारण याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई सूचीबद्ध ही नहीं हो पा रही है।
दोहरे रवैये और विज्ञापन खर्च पर उठे गंभीर सवाल
कर्मचारियों के वकील ने पंजाब सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक तरफ लाखों कर्मचारी अपने जायज हक के लिए भटक रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जुड़े अन्य अधिकारियों के मामलों में सरकार ने तुरंत अपील दाखिल कर सुनवाई पक्की करा ली। अदालत के ध्यान में यह भी लाया गया कि हाईकोर्ट की रोक के बावजूद राज्य सरकार दूसरे प्रदेशों में प्रचार-प्रसार के लिए विज्ञापनों पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही है।
मुख्य सचिव ने मांगी माफी, सोमवार को संबंधित बेंच करेगी सुनवाई
हाईकोर्ट ने साफ कहा कि सरकार को सुप्रीम कोर्ट जाने का पूरा अधिकार है, लेकिन अदालत को यह गलत सूचना देना कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा कि याचिका की खामियां दूर कर ली गई हैं। मुख्य सचिव की ओर से वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने अदालत के समक्ष बिना शर्त माफी मांगी। इसके बावजूद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि आपराधिक अवमानना का मामला तय रोस्टर के मुताबिक ही सुना जाएगा और फाइल संबंधित बेंच को भेज दी गई, जहां सोमवार को आगे की कार्यवाही होगी।
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