Punjab education revolution : पंजाब के सरकारी स्कूलों में इन दिनों एक शांत लेकिन गहरी क्रांति आकार ले रही है। राज्य के सभी 23 जिलों के करीब 19,200 सरकारी स्कूलों को विश्वस्तरीय बनाने की इस मुहिम में अब सीधे 21 लाख अभिभावक भी सरकार के साथ कदमताल मिला रहे हैं। हाल ही में आयोजित हुए मेगा अभिभावक-शिक्षक मिलन समारोह यानी पीटीएम ने यह साबित कर दिया है कि जब आम लोग और शासन व्यवस्था किसी नेक काम के लिए हाथ मिलाते हैं, तो बदलाव जमीन पर साफ दिखने लगता है।
राज्यभर के स्कूलों में आयोजित इन बैठकों में सिर्फ औपचारिकताएं पूरी नहीं हुईं, बल्कि बच्चों के भविष्य को लेकर एक गंभीर और सार्थक संवाद देखने को मिला। खुद शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस और तमाम कैबिनेट मंत्रियों तथा विधायकों ने अलग-अलग जिलों में जाकर इस प्रक्रिया की निगरानी की, वहीं विभागीय अधिकारियों ने करीब 2,000 स्कूलों का दौरा कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस पूरी पहल का मुख्य उद्देश्य यही है कि शिक्षा सिर्फ स्कूलों और किताबों तक सीमित न रहे, बल्कि घर और परिवार का माहौल भी बच्चे की पढ़ाई में सकारात्मक भूमिका निभाए।
‘हर दिन, एक कदम आगे’ की सोच के साथ जुड़ रहे परिवार
‘हर दिन, एक कदम आगे’ की थीम पर आधारित इस मेगा पीटीएम में जब मां-बाप अपने बच्चों के रिपोर्ट कार्ड देखने और शिक्षकों से मिलने पहुंचे, तो उन्हें बच्चों की कमजोरियों और खूबियों दोनों को करीब से जानने का मौका मिला। शिक्षकों ने अभिभावकों को ऐसे छोटे-छोटे व्यावहारिक नुस्खे और सुझाव दिए, जिन्हें अपनाकर माता-पिता घर पर बच्चों की पढ़ाई में मदद कर सकते हैं। कक्षाओं में बच्चों की उपस्थिति, उनका अकादमिक प्रदर्शन और जिन विषयों में सुधार की गुंजाइश है, उन पर खुलकर चर्चा हुई।
इस दौरान कई अभिभावकों ने खुलकर अपने अनुभव साझा किए। उनका कहना था कि पहले वे सिर्फ साल में एक-दो बार ही स्कूल की तरफ रुख करते थे, लेकिन अब नियमित संवाद होने से बच्चों की पढ़ाई में आने वाली छोटी-बड़ी कठिनाइयों को समय रहते दूर करना आसान हो गया है। बच्चों की शिक्षा के प्रति यह सामूहिक जिम्मेदारी ही पंजाब की शिक्षा प्रणाली को देश में एक अलग मुकाम पर ले जा रही है।
कल्याणकारी योजनाओं से मजबूत हो रहा परिवारों का हौसला
शिक्षा के इस बड़े अभियान के साथ-साथ सरकार की अन्य जनहितैषी योजनाएं भी परिवारों के लिए संबल बन रही हैं। मेगा पीटीएम के दौरान कई महिलाओं और अभिभावकों ने ‘मावां-धीयां सत्कार योजना’ और ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ की खुलकर सराहना की। महिलाओं का मानना है कि इस तरह की वित्तीय मदद मिलने से घर के छोटे-मोटे खर्च और बच्चों की स्कूल से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने में काफी आसानी होती है।
इसी तरह, स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाओं के कारण परिवारों के मन से बड़ी बीमारियों के इलाज पर होने वाले खर्च का डर कम हुआ है। जब घर की आर्थिक और चिकित्सीय चिंताएं कम होती हैं, तो माता-पिता का पूरा ध्यान अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने और उनके उज्जवल भविष्य को गढ़ने पर केंद्रित हो जाता है।
एक नए और प्रगतिशील ‘रंगले पंजाब’ की ओर कदम
पंजाब सरकार का यह प्रयास सिर्फ भवनों को सुधारने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीखने के तौर-तरीकों और परिणामों को बेहतर बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है। शिक्षा के क्षेत्र में आज पंजाब जिन ऊंचाइयों पर है, उसे बनाए रखने और स्कूलों को पूरी तरह वैश्विक मानकों के अनुकूल ढालने के लिए यह जन-भागीदारी बेहद अहम साबित हो रही है।
हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले और उसे अपनी प्रतिभा दिखाने के समान अवसर मिल सकें, इसी सपने को साकार करने के लिए सरकार और समाज मिलकर आगे बढ़ रहे हैं। यह साझा प्रयास एक ऐसे ‘रंगले पंजाब’ के निर्माण की नींव रख रहा है, जहां आने वाली पीढ़ियां आत्मनिर्भर और शिक्षित होकर राज्य का नाम रोशन करेंगी।
Punjab Asian Hockey Champions Trophy : सीएम मान ने परखी एशियाई हॉकी चैंपियंस ट्रॉफी की तैयारियां

