October 2, 2026

ETT Teachers Protest: चंडीगढ़ में ETT शिक्षकों का बड़ा प्रदर्शन, मनीष सिसोदिया के आवास का घेराव करने जा रहे शिक्षकों को पुलिस ने रोका

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ETT Teachers Protest: चंडीगढ़ में ETT शिक्षकों का बड़ा प्रदर्शन, मनीष सिसोदिया के आवास का घेराव करने जा रहे शिक्षकों को पुलिस ने रोका

चंडीगढ़ में ETT शिक्षकों का बड़ा प्रदर्शन, मनीष सिसोदिया के आवास का घेराव करने जा रहे शिक्षकों को पुलिस ने रोका

ETT Teachers Protest: अपनी मांगों को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे पंजाब के सरकारी स्कूलों के ETT (एलिमेंट्री टीचर ट्रेनिंग) शिक्षकों का धैर्य शुक्रवार को आखिरकार जवाब दे गया। करीब 180 ETT शिक्षक अपने परिजनों और छोटे-छोटे बच्चों के साथ पंजाब सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने चंडीगढ़ पहुंच गए। सेक्टर-30 में इकट्ठा होने के बाद ये शिक्षक आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक व वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया के सेक्टर-39 स्थित सरकारी आवास की ओर बढ़ने लगे, लेकिन पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रास्ते में ही रोक दिया।

जब पुलिस ने शिक्षकों को आगे बढ़ने से रोका और कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने की कोशिश की, तो माहौल गरमा गया। गुस्से में आए शिक्षक सड़क पर ही लेट गए और पुलिस प्रशासन व पंजाब सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।

“आधे वेतन में कैसे चलाएं घर?”— वेतन विसंगति को लेकर गहराया रोष

प्रदर्शनकारी शिक्षकों का कहना था कि वे किसी टकराव या हंगामे के मकसद से नहीं आए थे। वे सिर्फ आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को अपनी बेहाली और सालों से लंबित समस्याओं से अवगत कराना चाहते थे।

शिक्षकों की सबसे प्रमुख मांग पे-स्केल को लेकर है। उनका आरोप है कि उन्हें केंद्रीय 7वें वेतन आयोग (7th Pay Commission) के आधार पर बेहद कम वेतन दिया जा रहा है, जबकि उसी दौर में भर्ती हुए अन्य शिक्षकों को पंजाब सरकार के पे-स्केल का पूरा लाभ मिल रहा है। शिक्षकों का साफ तौर पर कहना है कि महंगाई के इस दौर में आधी सैलरी से परिवार और बच्चों का खर्च चलाना नामुमकिन हो चुका है।

क्या है 2016 की भर्ती से जुड़ा यह पूरा विवाद?

शिक्षकों के इस आंदोलन की जड़ें साल 2016 में हुई ETT भर्ती से जुड़ी हैं। यह भर्ती तत्कालीन अकाली-भाजपा (SAD-BJP) सरकार के कार्यकाल के दौरान हुई थी। बाद में भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का हवाला देकर इन शिक्षकों को सेवा से हटा दिया गया था। लंबा कानूनी संघर्ष जीतने के बाद अदालत के आदेश पर इन शिक्षकों की नौकरी तो बहाल हो गई, लेकिन सेवा शर्तों और पे-स्केल का विवाद आज तक जस का तस बना हुआ है।

शिक्षकों का यह भी दावा है कि एक आईएएस अधिकारी की जांच रिपोर्ट में भर्ती की गड़बड़ियों के लिए शिक्षा विभाग के ही एक क्लर्क को जिम्मेदार ठहराया गया था। शिक्षक मांग कर रहे हैं कि संबंधित अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाए और निर्दोष शिक्षकों को उनका पूरा हक और पंजाब पे-स्केल दिया जाए।

“जनता की सरकार है तो हमारी बात सुनने में परहेज क्यों?”

यह पहला मौका नहीं है जब ETT शिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर चंडीगढ़ में दस्तक दी हो। इससे पहले 22 अगस्त को भी इन शिक्षकों ने पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के सरकारी आवास का घेराव किया था, जहां पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया था।

सड़क पर लेटे प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाया कि अगर पंजाब सरकार खुद को आम जनता और कर्मचारियों की सरकार मानती है, तो फिर सरकारी स्कूलों में देश का भविष्य गढ़ने वाले अध्यापकों को अपनी बात रखने से क्यों रोका जा रहा है? शिक्षकों ने दो टूक चेतावनी दी है कि जब तक सरकार उनके वेतन में समानता लाने और लंबित मांगों को हल करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाती, उनका यह संघर्ष जारी रहेगा।

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