October 2, 2026

Haryana Weather Update: हरियाणा में मानसून की विदाई, जानें 6 और 7 अक्टूबर को कहां होगी बारिश

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Haryana Weather Update: हरियाणा में मानसून की विदाई, जानें 6 और 7 अक्टूबर को कहां होगी बारिश

हरियाणा में मानसून की विदाई, जानें 6 और 7 अक्टूबर को कहां होगी बारिश

Haryana Weather Update: अंबाला और करनाल से लेकर हिसार-सिरसा तक पूरे हरियाणा में अब मानसूनी हवाओं का असर थम चुका है। मौसम विज्ञान केंद्र चंडीगढ़ के मुताबिक, अगले पांच दिनों तक सूबे में मौसम पूरी तरह शुष्क और साफ रहेगा। आसमान से बादल छंटने के कारण दिन के तापमान में हल्की बढ़ोतरी देखी जा रही है। (IMD Chandigarh Haryana) हालांकि 6 और 7 अक्टूबर को कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश के आसार बन रहे हैं, जिससे खेती-किसानी और तापमान पर थोड़ा असर पड़ सकता है। फिलहाल अगले सात दिनों के लिए विभाग ने किसी तरह की चेतावनी या अलर्ट जारी नहीं किया है।

हिसार में पारा 37 डिग्री के करीब, बाकी जिलों में भी बढ़ा तापमान

बादल छंटते ही दिन की धूप तीखी होने लगी है। बीते गुरुवार को प्रदेश के औसत अधिकतम तापमान में करीब 1.3 डिग्री सेल्सियस का उछाल आया। हालांकि यह अब भी अक्टूबर की शुरुआत के लिहाज से सामान्य के इर्द-गिर्द ही बना हुआ है। (Hisar Maximum Temperature) मैदानों में हिसार सबसे ज्यादा तपाहट वाला जिला रहा, जहां दिन का पारा 36.9 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया।

इसके अलावा फरीदाबाद, मेवात और चरखी दादरी में भी तापमान 36.0 डिग्री दर्ज किया गया। उत्तरी हरियाणा के जिलों जैसे पंचकूला (31.9°C), सोनीपत (31.7°C) और कैथल (31.9°C) में लोगों को दिन में थोड़ी राहत जरूर महसूस हुई, लेकिन बाकी सूबे में तापमान 33 से 36 डिग्री के बीच ही घूमता रहा।

मानसून सीजन में 25 फीसदी कम बरसे बादल, जींद में सबसे ज्यादा सूखा

इस बार हरियाणा में मानसून की चाल शुरुआत से ही डांवाडोल रही। 1 जुलाई को दक्षिणी हिस्सों में दाखिल होने के बाद 9 जुलाई तक मानसून पूरे राज्य पर छाया था, लेकिन जिस तरह की झमाझम बारिश की दरकार थी, वैसी देखने को नहीं मिली। ( Haryana Monsoon Report) आंकड़ों पर नजर डालें तो 1 जून से 30 सितंबर के बीच राज्य में कुल 322.5 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई, जबकि सामान्य का आंकड़ा 430.7 मिमी का रहता है।

इस तरह पूरे सीजन में प्रदेश को 25 फीसदी कम पानी से ही संतोष करना पड़ा। जिलेवार आंकड़ों में बड़ा अंतर दिखा। प्रदेश के 23 जिलों में से सिर्फ पलवल ही इकलौता ऐसा जिला रहा जहां सामान्य से 20 प्रतिशत ज्यादा बारिश दर्ज हुई। दूसरी ओर, जींद जिले की स्थिति सबसे खराब रही, जहां सामान्य से 57 फीसदी कम बादल बरसे। 10 जिले ऐसे रहे जो पूरी तरह बारिश के अभाव से जूझे, जबकि 11 जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य के आसपास ही सिमट कर रह गया।

सिर्फ अगस्त ने निभाई जिम्मेदारी, जून और सितंबर में तरसते रहे लोग

महीने-दर-महीने के हिसाब से इस बार मानसून का मिजाज काफी अजीब रहा। जून के महीने में तो स्थिति काफी चिंताजनक रही, जब महज 30.5 मिमी बारिश हुई—जो सामान्य से 45% कम थी। (Palwal Monsoon) जुलाई में भी कोई खास सुधार नहीं हुआ और 109.7 मिमी (27% कम) बारिश ही दर्ज हो सकी।

राहत का दौर सिर्फ अगस्त के महीने में आया। अगस्त में 138.8 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य से महज 6 प्रतिशत कम थी और इसे सामान्य मानसून की श्रेणी में रखा गया। लेकिन जैसे ही सितंबर आया, मानसून फिर से कमजोर पड़ गया। सितंबर के पूरे महीने में केवल 43.5 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से 44 फीसदी कम है। अब किसान 6 और 7 अक्टूबर की संभावित बारिश का इंतजार कर रहे हैं, ताकि रबी सीजन की अगेती तैयारियों को बल मिल सके।

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