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Punjab Government Employees Strike : पुरानी पेंशन और डीए की मांग पर भड़के पंजाब के कर्मचारी, पूरे प्रदेश में प्रशासनिक काम ठप

Punjab Government Employees Strike : पुरानी पेंशन और डीए की मांग पर भड़के पंजाब के कर्मचारी, पूरे प्रदेश में प्रशासनिक काम ठप

पुरानी पेंशन और डीए की मांग पर भड़के पंजाब के कर्मचारी, पूरे प्रदेश में प्रशासनिक काम ठप

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hharpreet singh

Punjab Government Employees Strike : पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार और राज्य के सरकारी कर्मचारियों के बीच लंबे समय से सुलग रही मांगों की चिंगारी अब सीधे टकराव में बदल गई है। अपनी 14 सूत्रीय मांगों के हक में ‘पंजाब साझा मुलाजिम मंच’ के बैनर तले क्लेरिकल स्टाफ ने मंगलवार से आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है।

पंजाब और चंडीगढ़ के तमाम सरकारी दफ्तरों में तैनात हजारों कर्मचारी एक साथ सामूहिक छुट्टी (मास कैजुअल लीव) पर चले गए हैं, जिससे सचिवालय से लेकर जिला मुख्यालयों तक का प्रशासनिक काम पूरी तरह ठप पड़ गया है।

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काले कपड़े पहन भूख हड़ताल करेंगे कर्मचारी

कर्मचारियों का मुख्य विरोध पुरानी पेंशन योजना (OPS) को नए सिरे से लागू करने, महंगाई भत्ते (DA) की लंबित किश्तें जारी करने और वर्षों से सेवाएं दे रहे कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने को लेकर है। इसके अलावा, चंडीगढ़-मोहाली में पिछले दिनों कर्मचारी नेता मोहनजीत पर हुए कथित हमले के विरोध में भी कर्मचारियों में भारी रोष है। मुलाजिम मंच के नेताओं का कहना है कि विरोध प्रदर्शन के तहत राज्यभर के कर्मचारी काले कपड़े पहनकर सांकेतिक भूख हड़ताल करेंगे और सरकार के अड़ियल रवैये को बेनकाब करेंगे।

मंत्री अमन अरोड़ा की दोटूक: ‘हड़ताल छोड़े वरना होगी कार्रवाई’

दूसरी ओर, कर्मचारियों के इस कड़े रुख पर पंजाब सरकार ने भी सख्त रवैया अख्तियार कर लिया है। कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने हड़ताल शुरू होने से ठीक पहले कर्मचारियों को साफ चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अगर हड़ताल के कारण आम जनता को किसी तरह की असुविधा होती है, तो सरकार कानून के मुताबिक सख्त कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने कर्मचारियों से सड़कों पर उतरने के बजाय मेज पर बैठकर बातचीत से मुद्दे सुलझाने की अपील की।

अमन अरोड़ा ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि जुलाई 2020 के बाद भर्ती हुए 85 हजार कर्मचारियों का डीए 42 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दिया गया है और बाकी कर्मचारियों को भी केंद्र के समान वेतनमान देने का प्रस्ताव है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार ने बकाये के भुगतान से कभी इनकार नहीं किया है और इसके लिए चरणबद्ध योजना तैयार की जा रही है।

साझा मुलाजिम मंच का हमला: दागे 12 सीधे सवाल

मंत्री के इस बयान के बाद साझा मुलाजिम मंच ने सरकार पर पलटवार करते हुए 12 तीखे सवालों की झड़ी लगा दी है:

  • विधायकों की पेंशन : जब विधायकों की पेंशन में 15 से 60 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की जा सकती है, तो कर्मचारियों के हक पर कैंची क्यों चलाई जा रही है?
  • बदला रवैया : जो नेता सत्ता में आने से पहले खुद कर्मचारियों के धरनों में बैठते थे, सत्ता मिलते ही वही कर्मचारी उनके लिए बुरे कैसे हो गए?
  • विज्ञापनों का खर्च : साढ़े चार साल के कार्यकाल में जनता के टैक्स के पैसे से झूठी वाहवाही और विज्ञापनों पर कितना खर्च किया गया?
  • हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती : यदि कर्मचारी सरकार के ‘परिवार का हिस्सा’ हैं, तो हाईकोर्ट में कर्मचारियों के पक्ष में फैसला आने के बाद सरकार सुप्रीम कोर्ट क्यों गई?
  • वेतनमान का अधिकार : पे-स्केल देना कर्मचारियों का हक है, कोई अहसान नहीं। पिछली सरकारें इस मुद्दे पर कोर्ट नहीं गईं, लेकिन यह सरकार कर्मचारियों को ही कटघरे में खड़ा कर रही है।
  • खून-पसीने की कमाई : क्या कर्मचारी सरकार से कोई भीख मांग रहे हैं या अपनी कड़ी मेहनत का हक मांग रहे हैं?
  • पुरानी पेंशन का वादा : जिस पुरानी पेंशन योजना और डीए का वादा करके सरकार सत्ता में आई थी, क्या अब उस वादे से मुकर चुकी है?
  • सड़कों पर समर्थक : जिन कर्मचारियों ने सरकार बनाने के लिए फूलों की वर्षा की थी, आज वे ही सड़कों पर धक्के खाने को मजबूर क्यों हैं?
  • वेतन में दोहरा मापदंड : अगर क्लास-3 और 4 कर्मचारियों का वेतन ज्यादा लगता है, तो फिर क्लास-1 अधिकारियों को 60 प्रतिशत डीए किस आधार पर दिया जा रहा है?
  • नौकरियों का सच : 72 हजार नौकरियां देने के विज्ञापनों का सच क्या है? पहले तीन साल बेहद कम वेतन देकर युवाओं को सड़कों पर भटकने के लिए छोड़ दिया जाता है।
  • हर वर्ग में नाराजगी : अगर सरकार का काम इतना ही बेहतरीन है, तो किसान, मजदूर और कर्मचारी एक साथ काम धंधा छोड़कर सड़कों पर क्यों हैं?
  • आर्थिक स्थिति का हिसाब: सरकार पंजाब की जनता को बताए कि अपने साढ़े चार साल के कार्यकाल में राज्य के कौन-कौन से संसाधनों और संपत्तियों को गिरवी रखा गया है?

कर्मचारियों की इस सामूहिक हड़ताल से आम जनता को प्रमाणपत्र बनवाने, रजिस्ट्री और अन्य प्रशासनिक कार्यों के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल दोनों पक्षों के कड़े रुख को देखते हुए गतिरोध सुलझता नजर नहीं आ रहा है।

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