Baba Rodu ji Mela : काउंके कलां में दरगाह पर चढ़ी शराब, ड्रमों में मिलाकर बांटा प्रसाद

काउंके कलां में दरगाह पर चढ़ी शराब, ड्रमों में मिलाकर बांटा प्रसाद
Baba Rodu Ji Mela : पंजाब के लुधियाना जिले में जगराओं के पास स्थित काउंके कलां गांव इन दिनों एक अनूठी परंपरा को लेकर चर्चा में है। यहां स्थित बाबा रोडे शाह की दरगाह पर आयोजित तीन दिवसीय Baba Rodu ji Mela में आस्था का एक ऐसा रंग देखने को मिला, जो पूरे देश में विरला ही नजर आता है। 5 से 7 सितंबर तक चले इस मेले में देश-विदेश और दूर-दराज के इलाकों से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने दरगाह पर अपनी मन्नतें पूरी होने की खुशी में शराब की बोतलें और पेटियां भेंट कीं।
ड्रमों में जमा होती है हजारों लीटर शराब, नहीं देखा जाता ब्रांड
स्थानीय निवासी हरजिंदर सिंह ने बताया कि दरगाह (Baba Rodu ji Mela) पर मन्नत मांगने के बाद जब श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी होती है, तो वे अपनी हैसियत के हिसाब से महंगी से महंगी शराब लाकर चढ़ाते हैं। मेले के दौरान श्रद्धालुओं द्वारा लाई गई शराब की बोतलों को दरगाह परिसर में रखे बड़े ड्रमों में पलट दिया जाता है।
एक ड्रम भरने के बाद दूसरा ड्रम लगा दिया जाता है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि यहां किसी ब्रांड या कीमत का अंतर नहीं रखा जाता; सभी प्रकार की शराब को एक ही ड्रम में मिला दिया जाता है, जिसे बाद में कतारों में खड़े श्रद्धालुओं (Baba Rodu ji Mela) में प्रसाद के तौर पर वितरित किया जाता है। जो लोग शराब का सेवन नहीं करते, वे भी भक्तिभाव से एक बूंद प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं।
एक निसंतान दंपत्ति और शराब बांटने से शुरू हुई 100 साल पुरानी कहानी
दरगाह से जुड़ी जनश्रुति के अनुसार, यह परंपरा करीब एक सदी पुरानी है। कहा जाता है कि बाबा रोडे शाह खुद कभी मदिरापान नहीं करते थे। एक बार एक निसंतान दंपत्ति ने उनसे औलाद की मन्नत मांगी। संतान प्राप्ति के बाद खुश होकर वह व्यक्ति बाबा के पास शराब की एक बोतल (Baba Rodu ji Mela) भेंट स्वरूप ले आया। बाबा ने खुद शराब पीने के बजाय वह बोतल खोलकर वहां मौजूद लोगों में बांट दी। इसके बाद से ही यह परिपाटी शुरू हो गई और आज यह मेले के रूप में एक विशाल परंपरा का रूप ले चुकी है।
महिलाओं की सुरक्षा और व्यवस्था के लिए बनाया गया विशेष नियम
मेले Baba Rodu ji Mela के दौरान भीड़ और नशे की स्थिति में व्यवस्था न बिगड़े, इसके लिए प्रबंधकों ने एक खास नियम बनाया है। मेले के तीन दिनों में से पहला दिन पूरी तरह महिलाओं और बच्चों के लिए आरक्षित रखा जाता है, ताकि वे आसानी से माथा टेक सकें।
बाकी के दो दिन पुरुषों के लिए तय रहते हैं। हालांकि, कई परिवार मेले के तीनों दिन साथ आकर भी माथा टेकते हैं। इस बार भी अप्रवासी भारतीयों (NRIs) समेत बड़ी संख्या में संगत ने दरगाह पर हाजिरी लगाई और बाबा रोडे शाह का आशीर्वाद लिया।
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