Punjab News : पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड को हाईकोर्ट से झटका, निजी स्कूलों से जीएसटी वसूली पर रोक
पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड को हाईकोर्ट से झटका, निजी स्कूलों से जीएसटी वसूली पर रोक
Punjab News : पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की उस कार्रवाई पर सख्त रुख अपनाया है, जिसके तहत राज्य के गैर-सहायता प्राप्त निजी स्कूलों से 18 प्रतिशत जीएसटी वसूलने की तैयारी की जा रही थी। उच्च न्यायालय ने शिक्षा बोर्ड द्वारा जारी नोटिस पर अंतरिम रोक लगाते हुए बोर्ड प्रशासन को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। अदालत के इस हस्तक्षेप से पंजाब भर के हजारों निजी स्कूल प्रबंधकों और उनसे जुड़े अभिभावकों को बड़ी राहत मिली है।
यह कानूनी याचिका ‘फेडरेशन ऑफ प्राइवेट स्कूल्स एंड एसोसिएशंस ऑफ पंजाब’ की ओर से उसके अध्यक्ष जगजीत सिंह द्वारा दायर की गई थी। याचिका में बोर्ड द्वारा 5 अगस्त 2026 को जारी किए गए उस नोटिस को चुनौती दी गई थी, जिसमें पहले से संबद्धता प्राप्त स्कूलों से निरंतरता शुल्क, अतिरिक्त सेक्शन की मंजूरी और वार्षिक प्रगति रिपोर्ट जमा करने जैसी प्रशासनिक व शैक्षणिक सेवाओं पर 18 प्रतिशत जीएसटी की मांग की गई थी।
शैक्षणिक सेवाएं जीएसटी से मुक्त: याचिकाकर्ताओं ने दी केंद्रीय अधिसूचना की दलील
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पक्ष के वकीलों ने अदालत के समक्ष मजबूत दलीलें पेश कीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्रीय कर अधिसूचना संख्या 12/2017-सेंट्रल टैक्स (रेट) के साथ-साथ स्वयं शिक्षा बोर्ड द्वारा समय-समय पर जारी परिपत्रों के अनुसार शैक्षणिक संस्थानों द्वारा प्रदान की जाने वाली शैक्षणिक एवं संबद्ध सेवाएं जीएसटी के दायरे से पूरी तरह मुक्त हैं। ऐसे में बोर्ड द्वारा इन सेवाओं पर जबरन कर थोप जाना पूरी तरह गैर-कानूनी है।
वकीलों ने तर्क दिया कि यदि बोर्ड का यह तुगलकी फरमान लागू रहता है, तो निजी शिक्षण संस्थानों पर अनचाहा वित्तीय बोझ पड़ेगा, जिससे अंततः शिक्षा महंगी होगी और इसका सीधा असर आम अभिभावकों की जेब पर पड़ेगा।
स्वयं राहत लेकर दूसरों पर बोझ: शिक्षा बोर्ड के दोहरे रवैये पर उठे सवाल
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पक्ष ने शिक्षा बोर्ड के दोहरे मापदंड को उजागर करते हुए एक अहम तथ्य अदालत के सामने रखा। उन्होंने बताया कि पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड ने खुद एक अन्य मामले में राजस्व विभाग के खिलाफ याचिका दायर करके जीएसटी देनदारी पर उच्च न्यायालय से पहले ही स्थगन आदेश ले रखा है।
याचिका में सवाल उठाया गया कि जो बोर्ड स्वयं को जीएसटी देनदारी से मुक्त रखने के लिए अदालत से राहत प्राप्त कर चुका है, वही बोर्ड निजी स्कूलों पर 18 प्रतिशत जीएसटी का अतिरिक्त वित्तीय बोझ कैसे डाल सकता है। बोर्ड का यह रुख न केवल तर्कहीन है, बल्कि न्याय के सामान्य सिद्धांतों का भी उल्लंघन है।
दंडात्मक कार्रवाई पर पाबंदी: राज्य भर के निजी स्कूलों ने राहत की सांस ली
उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता पक्ष के तर्कों से सहमति व्यक्त करते हुए मामले की अगली सुनवाई तक बोर्ड द्वारा किसी भी तरह की दंडात्मक या जबरन टैक्स वसूली की कार्रवाई करने पर रोक लगा दी है। कोर्ट के आदेश के बाद अब बोर्ड अगली सुनवाई तक स्कूलों पर जीएसटी देने का दबाव नहीं बना सकेगा।
अदालत के इस अंतरिम आदेश का स्वागत करते हुए राज्य के निजी स्कूल प्रबंधकों ने कहा कि यह निर्णय शिक्षा व्यवस्था और न्याय हित में है। बोर्ड की इस मनमानी वसूली से राज्य में निजी शिक्षा ढांचा प्रभावित हो रहा था, जिस पर अब हाईकोर्ट ने सही समय पर अंकुश लगाया है।
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