Rajasthan factory accident: राजस्थान के पाली शहर के औद्योगिक थाना क्षेत्र के फोर्थ फेज में स्थित सारड़ा बायो पॉलिमर्स की ग्वार-गम फैक्ट्री में रविवार रात भीषण आग लग गई। रात करीब 11:30 बजे लगी आग ने कुछ ही समय में विकराल रूप ले लिया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, जिस हिस्से में मजदूर काम कर रहे थे, वहां लिफ्ट में शॉर्ट सर्किट होने से आग लगने की बात सामने आई है। आग लगने के कारणों की अंतिम पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
हादसे के समय फैक्ट्री में नाइट शिफ्ट में 17 मजदूर काम कर रहे थे। आग फैलते ही 12 मजदूर बाहर की ओर भागे और अपनी जान बचाई। वहीं, दो मजदूर अंदर फंस गए। इस दौरान तीन मजदूर आग की चपेट में आकर बुरी तरह झुलस गए। वे जलते हुए कपड़ों के साथ ‘बचाओ-बचाओ’ चिल्लाते हुए फैक्ट्री से बाहर निकले और सड़क पर गिरकर बेहोश हो गए। झुलसे मजदूरों की पहचान विक्की (19), अवधेश कुमार (40) और राजू (28) के रूप में हुई है। तीनों करीब 70 प्रतिशत तक झुलस गए थे। उन्हें पहले पाली के बांगड़ अस्पताल पहुंचाया गया, जहां से गंभीर हालत को देखते हुए जोधपुर रेफर कर दिया गया।
मलबे से मिला एक मजदूर का शव, दूसरे की तलाश जारी
आग के बाद फैक्ट्री के अंदर फंसे दो मजदूरों की तलाश शुरू की गई। इनमें बिहार के गया जिले के रैसीर निवासी नीतीश कुमार (20) और बाना बिगहा निवासी उपेंद्र राजवंशी (32) शामिल बताए गए हैं। तलाश के दौरान मलबे से एक मजदूर का शव मिला है, लेकिन बुरी तरह झुलसने के कारण उसकी पहचान नहीं हो सकी। दूसरे मजदूर का अभी पता नहीं चल पाया है। मलबा हटाकर उसकी तलाश की जा रही है।
आग बुझाने के लिए पाली के दमकलकर्मी रात करीब 12 बजे मौके पर पहुंचे। आग की तीव्रता को देखते हुए सोजत, रानी, फालना और सुमेरपुर से भी दमकल की गाड़ियां बुलाई गईं। दमकल की करीब आठ गाड़ियों ने आग बुझाने के लिए 55 राउंड लगाए। करीब साढ़े चार घंटे की मशक्कत के बाद सुबह लगभग चार बजे आग पर काबू पाया जा सका। फैक्ट्री में गैस के बड़े सिलेंडर भी रखे हुए थे। राहत की बात यह रही कि वे आग की चपेट से दूर रहे। यदि आग सिलेंडरों तक पहुंच जाती, तो हादसा और गंभीर हो सकता था। आग में एक ट्रैक्टर-ट्रॉली भी जल गई।
स्थानीय लोगों ने निजी कार से अस्पताल पहुंचाए झुलसे मजदूर
हादसे की सूचना मिलने पर पाली के एसडीएम विमलेंद्र सिंह राणावत, सीओ सिटी मंगलेश चुण्डावत और औद्योगिक थाने की पुलिस मौके पर पहुंची। प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में राहत एवं बचाव कार्य चलाया गया। फैक्ट्री में मशीन ऑपरेशन समेत दूसरे काम करने वाले मजदूर भी नाइट शिफ्ट में मौजूद थे। पाली शहर के गुरु नगर निवासी रवि और महेंद्र ने बताया कि वे डेकोरेशन का काम करते हैं। उन्होंने फैक्ट्री से आग की ऊंची लपटें उठती देखीं तो मौके पर पहुंचे। वहां उन्हें कुछ युवक झुलसी हुई हालत में मिले। उन्होंने एम्बुलेंस को फोन किया, लेकिन घायलों की हालत देखते हुए उन्हें अपनी कार से बांगड़ अस्पताल लेकर गए। हादसे के बाद फैक्ट्री में सुरक्षा व्यवस्था और आग लगने के कारणों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल एक मजदूर की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि दूसरे लापता मजदूर की तलाश जारी है। घायलों का इलाज जोधपुर में किया जा रहा है।

