Rajbir Ghuman CBI interrogation : चंडीगढ़ के महकमे में शुक्रवार का दिन खासी हलचल भरा रहा। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के ओएसडी (Officer on Special Duty) राजबीर सिंह घुम्मन निर्धारित समयानुसार अपने वकीलों के साथ सीधे चंडीगढ़ स्थित सीबीआई दफ्तर पहुंचे। उनके साथ आए वकील जीपीएस घुम्मन ने मीडिया को जानकारी दी कि उनके मुक्किल को सीबीआई की तरफ से आधिकारिक नोटिस मिला था, जिसमें शुक्रवार को पेश होने के निर्देश दिए गए थे। अदालत और जांच एजेंसी के नियमों का पालन करते हुए वे तय वक्त पर जांच अधिकारियों के सामने हाजिर हुए हैं।
इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो मामला कुछ दिन पहले सुप्रीम कोर्ट तक जा पहुंचा था। गत 12 अक्टूबर को देश की सर्वोच्च अदालत ने राजबीर घुम्मन की गिरफ्तारी और उनके खिलाफ किसी भी तरह की सख्त कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी थी। साथ ही, अदालत ने यह भी साफ किया था कि उन्हें जांच प्रक्रिया में पूरा सहयोग करना होगा। वकीलों का कहना है कि घुम्मन सुप्रीम कोर्ट के इन्हीं निर्देशों का अक्षरशः पालन करते हुए जांच में शामिल हो रहे हैं।
ईडी की रिपोर्ट और मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोप
यह पूरा कानूनी शिकंजा अचानक नहीं कसा है, बल्कि इसके तार प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की लंबी छानबीन से जुड़े हैं। पिछले दिनों ईडी ने जालंधर में इस मामले को लेकर केस दर्ज किया था। इसके पहले, जुलाई और अगस्त 2026 के दौरान ईडी ने पंजाब के पुलिस महानिदेशक (DGP) गौरव यादव को तीन सिलसिलेवार चिट्ठियां भेजी थीं। इन पत्रों में मुख्यमंत्री कार्यालय (CM Office) से जुड़े कथित भ्रष्टाचार और प्रशासनिक गड़बड़ियों पर एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई थी।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, ट्रांसफर-पोस्टिंग, नीतिगत फैसलों (Policy Decisions), टेंडर प्रक्रिया, सीएलयू (CLU) और अन्य सरकारी मंजूरियों में कथित तौर पर पर्दे के पीछे से दखल दिया जा रहा था। ईडी की शुरुआती जांच में नितिन गोहल और राजबीर सिंह घुम्मन जैसे नामों की भूमिका सामने आई थी। एजेंसी का दावा है कि नितिन गोहल सरकारी काम करवाने के इच्छुक लोगों और सीएम के ओएसडी घुम्मन के बीच एक मुख्य बिचौलिए (Middleman) के रूप में काम कर रहा था।
वॉट्एप चैट, नकदी और जीमाडा (GMADA) जमीन का एंगल
जांच का दायरा जैसे-जैसे बढ़ा, वैसे-वैसे कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। ईडी ने अदालत में पेश किए गए दस्तावेजों में दावा किया है कि उनके हाथ कुछ अहम डिजिटल सबूत और वॉट्एप चैट लगी हैं। इन चैट्स में कथित तौर पर ट्रांसफर, सरकारी टेंडर और अहम फाइलों तक पहुंच को लेकर बातचीत का जिक्र है। इसके अलावा, छापेमारी के दौरान नितिन गोहल के ठिकानों से करीब 20.98 लाख रुपये नकद और कई संदिग्ध दस्तावेज बरामद होने की बात भी सामने आई है।
यह पूरा विवाद मूल रूप से जीमाडा (GMADA) की जमीन, प्रॉपर्टी के लेन-देन, सीएलयू और रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच से बाहर निकलकर सामने आया है।
हाईकोर्ट के आदेश से लेकर सुप्रीम कोर्ट की राहत तक का सफर
मामले की गंभीरता को देखते हुए 5 अक्टूबर को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया था। अदालत ने माना कि ईडी द्वारा पेश किए गए दस्तावेज प्रथम दृष्टया किसी बड़े अपराध की तरफ इशारा करते हैं। इसके बाद हाईकोर्ट ने सीबीआई को इस मामले में एफआईआर दर्ज कर गहन जांच करने और दो महीने के भीतर अपनी स्टेटस रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया था।
हाईकोर्ट के इस फैसले के तुरंत बाद, यानी 6 अक्टूबर को पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और विशेष अनुमति याचिका (SLP) दाखिल कर इस आदेश को चुनौती दी। इसके बाद 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए राजबीर घुम्मन को बड़ी राहत दी और उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। अब इसी कानूनी प्रक्रिया के तहत राजबीर घुम्मन शुक्रवार को सीबीआई के सामने पेश हुए हैं, जहां जांच अधिकारी उनसे आगे की पूछताछ कर रहे हैं।

