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Rajbir Ghuman High Court Case : हाईकोर्ट ने जनवरी 2027 तक स्थगित किया ओएसडी घुम्मन का केस

hharpreet singh
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Rajbir Ghuman High Court Case : हाईकोर्ट ने जनवरी 2027 तक स्थगित किया ओएसडी घुम्मन का केस

हाईकोर्ट ने जनवरी 2027 तक स्थगित किया ओएसडी घुम्मन का केस

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Rajbir Ghuman High Court Case :  चंडीगढ़ के न्यायिक गलियारों से मुख्यमंत्री भगवंत मान के ओएसडी राजबीर घुम्मन से जुड़े मामले में एक बड़ी अपडेट सामने आई है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने इस बहुचर्चित मामले की अगली सुनवाई अब सीधे जनवरी 2027 के लिए तय कर दी है।

अदालत का यह स्थगन (एडजर्मेंट) इसलिए आया है क्योंकि सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट में इसी प्रकृति और कानूनी बिंदुओं से जुड़ा एक अन्य मामला विचाराधीन है। हाईकोर्ट ने यह उचित समझा कि सर्वोच्च अदालत का फैसला आने के बाद ही इस याचिका पर आगे की सुनवाई को आगे बढ़ाया जाए। इससे पहले इस अहम मामले को एकल बेंच द्वारा मुख्य न्यायाधीश की बेंच को ट्रांसफर कर दिया गया था।

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सेक्शन 17-ए और सीबीआई जांच की वैधता पर सवाल

राजबीर घुम्मन के कानूनी सलाहकारों और वकीलों ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की पूरी कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। याचिका में मुख्य रूप से प्रिवेंशन ऑफ़ करप्शन एक्ट की धारा 17-ए का हवाला दिया गया है। वकीलों का तर्क है कि किसी भी सेवारत या जिम्मेदार सरकारी अधिकारी के खिलाफ आपराधिक जांच शुरू करने से पहले सक्षम प्राधिकारी से पूर्व अनुमति या मंजूरी लेना कानूनी रूप से अनिवार्य है, जो इस प्रकरण में नहीं ली गई।

इसी आधार पर याचिकाकर्ताओं ने सीबीआई द्वारा दर्ज की गई एफआईआर को पूरी तरह से रद्द करने और कानूनी मंजूरी मिलने तक जांच पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। इसके अलावा, गत 6 अक्टूबर को संगरूर जिले के घराचोन गांव स्थित उनके निजी आवास पर सीबीआई द्वारा की गई छापेमारी और सर्च ऑपरेशन की कानूनी वैधता को भी अदालत में चुनौती दी गई है।

क्या है पूरा मामला और कैसे शुरू हुई जांच?

इस हाई-प्रोफाइल कानूनी विवाद की पृष्ठभूमि पिछले महीने जुड़ी है, जब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा पंजाब के डीजीपी को भेजी गई एक रिपोर्ट का संज्ञान लिया था। ईडी ने अपनी रिपोर्ट में सरकारी महकमों में ट्रांसफर और पोस्टिंग, विभिन्न टेंडर आवंटन और अहम नीतिगत फैसलों में भारी वित्तीय अनियमित्ताओं के गंभीर आरोप लगाए थे।

उसी इनपुट और सिफारिश के आधार पर हाईकोर्ट ने सीबीआई को मामला दर्ज कर जांच के निर्देश दिए थे। अब देखना यह होगा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जनवरी 2027 में होने वाली अगली सुनवाई में इस कानूनी उलझन पर क्या नया मोड़ आता है।

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