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Rajkumar Saini Controversial Statement: फरीदाबाद में पूर्व सांसद राजकुमार सैनी के बिगड़े बोल: धर्म पर दी विवादित टिप्पणी

AAmandeep Singh
फरीदाबाद में पूर्व सांसद राजकुमार सैनी के बिगड़े बोल: धर्म पर दी विवादित टिप्पणी
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हरियाणा। हरियाणा की राजनीति में अपने बेबाक और अक्सर विवादित बयानों के लिए मशहूर पूर्व सांसद राजकुमार सैनी ने एक बार फिर मर्यादा की लकीर खींचने की कोशिश की है। फरीदाबाद में आयोजित एक कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे सैनी ने मंच से जो कुछ कहा, उसने हिंदू संगठनों और धार्मिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है। सैनी ने सीधा हमला बोलते हुए कहा कि देश के लोगों को सदियों से “काल्पनिक कहानियों” के मायाजाल में उलझाकर रखा गया है। उनके मुताबिक, मौजूदा धार्मिक व्यवस्था और कथाएं समाज को जागरूक करने के बजाय उसे “मानसिक रूप से गुलाम” बनाने का एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा हैं।

‘रामायण’ पर टिप्पणी से गरमाई सियासत

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सैनी के भाषण का सबसे विवादित हिस्सा रामायण को लेकर रहा। उन्होंने प्रचलित रामायण की प्रमाणिकता को चुनौती देते हुए उसे काल्पनिक बताया। सैनी ने दक्षिण भारत के क्रांतिकारी विचारक पेरियार ई.वी. रामासामी और ललई सिंह यादव द्वारा प्रचारित ‘सच्ची रामायण’ का पक्ष लिया। उन्होंने दावा किया कि असली इतिहास को दबाकर समाज पर एक खास विचारधारा थोपी गई है। सैनी ने अपने दावों को पुख्ता करने के लिए 1976 के एक कथित अदालती फैसले का भी जिक्र किया, हालांकि कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ऐतिहासिक और धार्मिक तथ्यों को इस तरह सार्वजनिक मंच से चुनौती देना सामाजिक सौहार्द बिगाड़ सकता है।

अधिकारों की जंग या धार्मिक ध्रुवीकरण?

पूर्व सांसद यहीं नहीं रुके; उन्होंने आधुनिक संतों और महात्माओं पर भी निशाना साधते हुए कहा कि ये लोग जनता की सोचने-समझने की शक्ति को कुंद कर रहे हैं। उन्होंने तर्क दिया कि जब तक बहुसंख्यक आबादी सम्राट अशोक, ज्योतिबा फुले और डॉ. भीमराव अंबेडकर जैसे नायकों को गहराई से नहीं पढ़ेगी, तब तक उन्हें अपने वास्तविक अधिकारों और सत्ता में हिस्सेदारी की समझ नहीं आएगी। सैनी ने देश की वर्तमान स्थिति की तुलना वैश्विक तनावों से करते हुए कहा कि जब छोटे देश बड़ी ताकतों को आंख दिखा सकते हैं, तो भारत का वंचित समाज एकजुट होकर अपने हक की लड़ाई क्यों नहीं लड़ सकता?

बयानों के बाद विरोध के स्वर तेज

राजकुमार सैनी के इस भाषण के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। जहां एक तरफ उनके समर्थक इसे ‘वैचारिक क्रांति’ बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई धार्मिक संस्थाओं ने इसे बहुसंख्यक समाज की भावनाओं का अपमान करार दिया है। फरीदाबाद के स्थानीय राजनैतिक हलकों में भी इस बयान को आगामी चुनावों से पहले ध्रुवीकरण की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। अब देखना यह होगा कि इस विवादित टिप्पणी पर प्रशासन या विपक्षी दल क्या रुख अपनाते हैं और सैनी अपने इन शब्दों पर कायम रहते हैं या नहीं।

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