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उम्रकैद की सजा काट रहे राम रहीम की पैरोल पर पत्रकार छत्रपति के बेटे का आरोप, बोले-सरकार ने गवाहों की सुरक्षा हटाई

VVinita Kohli
उम्रकैद की सजा काट रहे राम रहीम की पैरोल पर पत्रकार छत्रपति के बेटे का आरोप, बोले-सरकार ने गवाहों की सुरक्षा हटाई
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सिरसा: हरियाणा में साध्वियों के यौन शोषण और पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को 40 दिन की पैरोल दिए जाने के फैसले पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इस फैसले को लेकर पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति ने हरियाणा सरकार की कड़े शब्दों में आलोचना की है। अंशुल ने सरकार के निर्णय पर गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि एक गंभीर अपराध में दोषी ठहराए गए व्यक्ति को बार-बार पैरोल देना न्याय व्यवस्था और पीड़ित परिवार के साथ अन्याय है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का यह कदम न तो मानवीय आधार पर लिया गया है और न ही कानून की निष्पक्ष भावना के अनुरूप है, बल्कि इसके पीछे राजनीतिक लाभ और आर्थिक स्वार्थ छिपे हुए हैं।

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उन्होंने यह भी कहा कि गुरमीत राम रहीम को बार-बार पैरोल और फरलो दिए जाने से यह संदेश जाता है कि प्रभावशाली और रसूखदार लोगों के लिए कानून अलग है, जबकि आम नागरिकों और पीड़ित परिवारों के लिए न्याय पाना बेहद कठिन हो जाता है। अंशुल छत्रपति के अनुसार, ऐसे फैसले न केवल न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं, बल्कि समाज में कानून के प्रति विश्वास को भी कमजोर करते हैं। 

अंशुल ने यह सवाल भी उठाया कि जब एक व्यक्ति को गंभीर अपराधों में दोषी करार देकर उम्रकैद की सजा दी जा चुकी है, तो उसे इतनी बार राहत क्यों दी जा रही है। उन्होंने सरकार से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने और भविष्य में ऐसे मामलों में पारदर्शिता व जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की। गौरतलब है कि पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या का मामला देशभर में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और पत्रकारों की सुरक्षा से जुड़ा अहम मुद्दा रहा है। ऐसे में इस तरह के फैसलों को लेकर उठ रही आपत्तियां सरकार के लिए नैतिक और राजनीतिक चुनौती बनकर सामने आ रही हैं।

पैरोल के बाद फिर किया लाइव सत्संग

पैरोल पर जेल से बाहर आने के बाद गुरमीत राम रहीम ने डेरा सच्चा सौदा की संगत के लिए लाइव सत्संग किया और संदेश दिया। बताया जा रहा है कि वह आज फिर से लाइव होकर संगत को संबोधित करेंगे।

डेरा सच्चा सौदा बना व्यापारिक केंद्र- अंशुल छत्रपति

अंशुल छत्रपति ने अपने बयान में कहा कि डेरा सच्चा सौदा के नाम पर गुरमीत राम रहीम ने धार्मिक आस्था के नाम पर एक विशाल व्यापारिक केंद्र खड़ा किया है, जहां करोड़ों-अरबों रुपये का कारोबार होता है। उन्होंने कहा कि आस्था के नाम पर लाखों लोगों को गुमराह किया गया और डेरा की राजनीतिक विंग बनाकर राजनीति को प्रभावित करने की कोशिश की गई।

हर चुनाव से पहले पैरोल, राजनीतिक लाभ की कोशिश

अंशुल ने आरोप लगाया कि हरियाणा सरकार हर बार चुनाव से पहले राम रहीम को पैरोल या फरलो देती है। उन्होंने कहा कि हरियाणा और पंजाब की राजनीतिक पार्टियां डेरा सच्चा सौदा को वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल करती हैं। उनके अनुसार, “अब यह सिर्फ वोट बैंक नहीं, बल्कि नोट बैंक का भी मामला बन गया है।”

पीड़ितों की सुरक्षा वापस लेना चिंताजनक

अंशुल ने बताया कि डेरा प्रमुख को पैरोल देने के बाद हरियाणा पुलिस ने पीड़ितों और गवाहों की सुरक्षा वापस ले ली है। उन्होंने कहा कि सिरसा की एक रेप पीड़िता की फैमिली और उनके घर पर तैनात सुरक्षा भी हटा दी गई है। उन्होंने इसे बेहद चिंताजनक बताया और कहा कि “एक अपराधी को सुरक्षा दी जा रही है, जबकि पीड़ितों की सुरक्षा वापस ली जा रही है।”

2022 में पैरोल एक्ट में संशोधन डेरा प्रमुख के लिए किया गया

अंशुल छत्रपति ने आरोप लगाया कि 2022 में हरियाणा सरकार ने पैरोल एक्ट में संशोधन कर कैदियों को बिना कारण बताए पैरोल पर जाने की अनुमति दी। उनका कहना है कि यह संशोधन विशेष रूप से डेरा प्रमुख को पैरोल देने का रास्ता खोलने के लिए किया गया था। उन्होंने कहा कि “अगर यह संशोधन सभी कैदियों के लिए है, तो फिर बाकी कैदियों को इसका लाभ क्यों नहीं मिल रहा?”


डेरा प्रबंधन की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं

इस पूरे मामले पर डेरा सच्चा सौदा प्रबंधन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। न ही किसी वीडियो या बयान के माध्यम से इस पर कोई टिप्पणी की गई है।

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