Milk Strike Ends: हरियाणा में ‘दूध बंद’ आंदोलन स्थगित, किसानों ने सरकार को दिया 17 अक्टूबर तक का अल्टीमेटम
हरियाणा में 'दूध बंद' आंदोलन स्थगित, किसानों ने सरकार को दिया 17 अक्टूबर तक का अल्टीमेटम
Milk Strike Ends: दूध के खरीद भाव फैट के आधार पर बढ़ाने की मांग को लेकर हरियाणा में बीते तीन दिनों से उग्र रूप ले रहा ‘दूध बंद’ आंदोलन शनिवार को समाप्त हो गया है। सिरसा स्थित वीटा मिल्क प्लांट परिसर में सुबह 11 बजे बुलाई गई किसानों और पशुपालकों की अहम बैठक में यह निर्णय लिया गया। किसान नेताओं ने जनता और स्थानीय लोगों से मिले सहयोग का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनका यह प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा, लेकिन सरकार और प्रशासन के ढुलमुल रवैये के चलते इसे फिलहाल स्थगित किया जा रहा है।
वीटा प्लांट का घेराव कर रहे किसान नेताओं जसवीर भाटी, हंसराज, हरप्रीत और सुरजीत सिंह ने संयुक्त रूप से बयान जारी करते हुए कहा कि सरकार को अपनी मांगें मानने के लिए 17 अक्टूबर तक का समय दिया जा रहा है। यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर दूध के दाम में बढ़ोतरी नहीं की गई, तो 17 अक्टूबर को सिरसा स्थित जाट धर्मशाला में एक बड़ी महापंचायत बुलाकर कड़ा और ठोस फैसला लिया जाएगा।
वीटा प्लांट की घेराबंदी और सड़कों पर हंगामे के बाद झुका प्रशासन
स्थगित होने से ठीक पहले शनिवार सुबह आंदोलनकारियों ने सिरसा के वीटा मिल्क प्लांट के मुख्य गेट पर पक्का मोर्चा लगा दिया था। प्रदर्शनकारियों ने प्लांट में दूध लेकर आने और जाने वाले सभी वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप कर दी थी, जिससे पूरे जिले में दूध आपूर्ति को लेकर गंभीर संकट पैदा हो गया था।
गौरतलब है कि शुक्रवार को इस आंदोलन ने उस समय बेहद उग्र रूप ले लिया था, जब किसानों ने कंगनपुर रोड समेत कई इलाकों में दूधियों और निजी डेयरी संचालकों से 1000 लीटर से अधिक दूध से भरे कैन छीन लिए थे। इस एकत्र दूध को स्थानीय गुरुद्वारों, मंदिरों और जरूरतमंदों में भिजवा दिया गया था। कई स्थानों पर दूधियों और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी बहस और धक्का-मुक्की भी देखने को मिली थी, जिसके बाद स्थिति पर काबू पाने के लिए भारी पुलिस बल को मोर्चा संभालना पड़ा था।
17 अक्टूबर को जाट धर्मशाला में होगी महापंचायत
किसान प्रतिनिधियों का कहना है कि वे आम जनता को ज्यादा दिनों तक परेशानी में नहीं डालना चाहते, इसलिए उन्होंने सरकार को सोचने-समझने का एक आखिरी मौका दिया है। पशुपालकों का तर्क है कि महंगाई के इस दौर में पशु चारे और रखरखाव की लागत काफी बढ़ चुकी है, जबकि वीटा और निजी डेयरियां उन्हें दूध का उचित दाम नहीं दे रही हैं।
किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि 17 अक्टूबर तक फैट के आधार पर दूध के रेट बढ़ाने का कोई आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ, तो इसके बाद होने वाले किसी भी बड़े जन-आंदोलन और आपूर्ति ठप होने की पूरी जिम्मेदारी प्रदेश सरकार और प्रशासन की होगी।
