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Rewari Jaipur New Rail Line: हरियाणा-राजस्थान के बीच नई रेल की सौगात: नीमराणा के उद्योगों को मिलेगा सीधा फायदा, 5.73 करोड़ का बजट मंजूर

AAmandeep Singh
हरियाणा-राजस्थान के बीच नई रेल की सौगात: नीमराणा के उद्योगों को मिलेगा सीधा फायदा, 5.73 करोड़ का बजट मंजूर
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हरियाणा।  दक्षिण हरियाणा और उत्तरी राजस्थान के बीच सफर करने वाले यात्रियों और उद्यमियों के लिए एक बड़ी और सुखद खबर है। रेल मंत्रालय ने रेवाड़ी से जयपुर वाया नीमराणा रेल लाइन परियोजना की फाइलों पर जमी धूल झाड़ते हुए इसे धरातल पर उतारने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस 191 किलोमीटर लंबे ट्रैक के लिए ‘फाइनल लोकेशन सर्वे’ को मंजूरी मिलना इस बात का संकेत है कि अब जल्द ही इस रूट की सटीक दिशा और स्टेशनों का खाका तैयार हो जाएगा। सरकार ने इस सर्वे के लिए करीब पौने छह करोड़ रुपये की राशि भी आवंटित कर दी है।

नीमराणा के ‘जापानी जोन’ को मिलेगा बूस्ट: सस्ता होगा माल ढोना

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इस परियोजना का सबसे बड़ा रणनीतिक लाभ औद्योगिक क्षेत्र को होने वाला है। नीमराणा में स्थित जापानी इंडस्ट्रियल जोन और आसपास के बड़े कारखानों को अभी तक कच्चे माल और तैयार उत्पादों की ढुलाई के लिए काफी हद तक सड़क मार्ग पर निर्भर रहना पड़ता था। नई रेल लाइन बिछने से माल ढुलाई न केवल आसान होगी, बल्कि इसकी लागत में भी भारी कमी आएगी। इससे उत्पादन खर्च घटेगा और क्षेत्र में नए विदेशी निवेश की संभावनाएं और प्रबल होंगी। जानकारों का मानना है कि यह ट्रैक ‘इंडस्ट्रियल कॉरिडोर’ के लिए लाइफलाइन साबित होगा।

सफर होगा सुहाना: समय की बचत और सीधी कनेक्टिविटी

वर्तमान में रेवाड़ी से जयपुर जाने के लिए यात्रियों को या तो बस का लंबा सफर तय करना पड़ता है या फिर पुराने रेल मार्ग पर निर्भर रहना पड़ता है। नई प्रस्तावित लाइन बनने के बाद दोनों शहरों के बीच की दूरी और समय, दोनों में काफी कटौती होगी। इससे न केवल दैनिक यात्रियों और व्यापारियों को फायदा होगा, बल्कि पर्यटन को भी नई गति मिलेगी। सबसे खास बात यह है कि इस मार्ग के बीच पड़ने वाले कई गांव और कस्बे ऐसे हैं, जिन्होंने आज तक रेल की सीटी नहीं सुनी है; यह प्रोजेक्ट उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने का काम करेगा।

क्या होगा अगला कदम? DPR पर टिकी नजरें

रेलवे के तकनीकी जानकारों के अनुसार, फाइनल लोकेशन सर्वे (FLS) पूरा होने के बाद ‘विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन’ यानी DPR तैयार की जाएगी। इस रिपोर्ट में जमीन अधिग्रहण (Land Acquisition), पुलों और अंडरपास का निर्माण, स्टेशनों की संख्या, पर्यावरणीय प्रभाव और कुल निर्माण लागत का पूरा ब्यौरा होगा। हालांकि, रेलवे की ये परियोजनाएं कई चरणों से गुजरती हैं, लेकिन सर्वे की मंजूरी मिलना इस बात की तस्दीक करता है कि केंद्र सरकार इस रूट को लेकर गंभीर है। यदि जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया समय पर पूरी होती है, तो आने वाले कुछ वर्षों में रेवाड़ी और जयपुर के बीच का यह रेल कॉरिडोर उत्तर भारत की अर्थव्यवस्था की धुरी बन सकता है।

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