Rohtak Politics: रोहतक जिला परिषद की राजनीति में पिछले कई दिनों से मची उठापटक का आखिरकार पटाक्षेप हो गया है। वाइस चेयरमैन अनिल हुड्डा (Anil Hooda Vice Chairman Rohtak) को पद से हटाने की विरोधियों की कवायद उस वक्त धरी की धरी रह गई, जब उनके खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव खारिज हो गया।
सोमवार को उपायुक्त (DC Satbir Singh Rohtak Meeting) सतबीर सिंह की अध्यक्षता में बुलाई गई अहम बैठक में जमकर खींचतान देखने को मिली, लेकिन अंततः अनिल हुड्डा अपनी कुर्सी बचाने में कामयाब रहे। इस फैसले के बाद वाइस चेयरमैन खेमे में राहत की सांस देखी जा रही है, जबकि विपक्षी गुट को बड़ा झटका लगा है।
10 पार्षद पहुंचे बैठक में, एक वोट रद्द होने से बदला समीकरण
पूरा घटनाक्रम रोहतक जिला परिषद के 14 पार्षदों के इर्द-गिर्द घूम रहा था। नियम के मुताबिक वाइस चेयरमैन को हटाने के लिए विपक्षी खेमे को अपेक्षित संख्याबल साबित करना था।
आज हुई बैठक में कुल 14 में से 10 पार्षद ही मौजूद रहे। डीसी सतबीर सिंह की देखरेख में अविश्वास प्रस्ताव पर जब गुप्त मतदान (वोटिंग) कराया गया, तो एक पार्षद का वोट अमान्य (रद्द) करार दे दिया गया। महज एक वोट के इस बड़े उलटफेर की वजह से अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के लिए जरूरी संख्याबल से चूक गया और प्रस्ताव गिर गया।
चेयरपर्सन मंजू हुड्डा की अगुवाई में लामबंद हुए थे पार्षद
गौरतलब है कि जिला परिषद की चेयरपर्सन मंजू हुड्डा (Manju Hooda Chairperson Rohtak) की अगुवाई में 10 पार्षदों ने एकजुट होकर वाइस चेयरमैन अनिल हुड्डा के कामकाज और कार्यशैली पर सवाल उठाए थे।
इन पार्षदों ने डीसी को व्यक्तिगत रूप से शपथ पत्र (एफिडेविट) सौंपकर अविश्वास प्रस्ताव लाने और वोटिंग कराने की मांग की थी। प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत डीसी ने पहले इस शक्ति परीक्षण के लिए 14 अक्टूबर की तारीख तय की थी। हालांकि, उस समय डीसी की व्यस्तता व अनुपस्थिति के चलते बैठक को टालकर 19 अक्टूबर की तिथि मुकर्रर की गई थी।
फैसले के बाद गरमाई जिले की स्थानीय राजनीति
सोमवार को टिकी निगाहों के बीच जब वोटिंग के नतीजे सामने आए तो विरोधी खेमे के गणित पर पानी फिर गया। 1 वोट रद्द होने के बाद अनिल हुड्डा के खिलाफ लाया गया प्रस्ताव कानूनी तौर पर पस्त हो गया।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस घटनाक्रम से रोहतक जिला परिषद (Haryana Zila Parishad Politics) के भीतर गुटबाजी और तीखी होगी। फिलहाल, अनिल हुड्डा वाइस चेयरमैन के पद पर काबिज रहेंगे, लेकिन इस राजनीतिक शह-मात के खेल ने स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों और प्रशासनिक तालमेल को लेकर नए सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।

