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Faridabad SBI Locker Scam: फरीदाबाद SBI लॉकर कांड: भरोसे की तिजोरी से गायब हुए गहने, पूर्व बैंक मैनेजर समेत चार पुलिस की गिरफ्त में

AAmandeep Singh
फरीदाबाद SBI लॉकर कांड: भरोसे की तिजोरी से गायब हुए गहने, पूर्व बैंक मैनेजर समेत चार पुलिस की गिरफ्त में
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फरीदाबाद। बैंकों के लॉकर को सबसे सुरक्षित ठिकाना मानकर अपनी जीवन भर की जमा-पूंजी वहां रखने वालों के लिए फरीदाबाद से एक डराने वाली खबर आई है। सेक्टर-15 स्थित भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की शाखा में एक ग्राहक का लॉकर तोड़कर उसमें रखे करीब एक किलो सोने और तीन किलो चांदी के जेवरात गायब करने के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। इस हाई-प्रोफाइल ‘लॉकर स्कैम’ में पुलिस ने बैंक की तत्कालीन मैनेजर प्रीति कटारिया समेत चार लोगों को हिरासत में लिया है।

क्या है पूरा मामला? जब बैंक ने कहा- ‘आपका तो यहाँ कोई लॉकर ही नहीं’

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यह पूरा मामला तब खुला जब एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) डी.सी. गर्ग की पत्नी नीलम गर्ग बैंक में अपना लॉकर ऑपरेट करने पहुंचीं। गर्ग परिवार का यह लॉकर साल 2014 से इसी शाखा में था।

घटनाक्रम की अहम बातें:

हैरान करने वाला जवाब: नीलम गर्ग जब बैंक पहुंचीं और अपना लॉकर नंबर बताया, तो बैंक कर्मचारियों ने यह कहकर उन्हें चौंका दिया कि उनका लॉकर वहां मौजूद ही नहीं है।

दूसरे के नाम दर्ज: काफी खोजबीन के बाद पता चला कि जिस नंबर का लॉकर गर्ग परिवार इस्तेमाल कर रहा था, वह अब किसी और व्यक्ति के नाम पर दर्ज है।

गायब थे गहने: लॉकर में करीब 1 किलो सोना और 3 किलो चांदी के पुश्तैनी जेवरात रखे थे। जब पीड़ित परिवार ने इस बारे में बैंक अधिकारियों से जवाब मांगा, तो कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला।

पुलिसिया कार्रवाई: शिकंजे में आई तत्कालीन मैनेजर और टीम

डी.सी. गर्ग की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए फरीदाबाद पुलिस ने इस मामले की परतों को उधेड़ना शुरू किया। जांच के दौरान बैंक के आंतरिक रिकॉर्ड और प्रक्रियाओं में बड़ी धांधली पाई गई।

हिरासत में लिए गए आरोपी:

प्रीति कटारिया: तत्कालीन बैंक मैनेजर (मुख्य आरोपी बताई जा रही हैं)। ए.के. सिंह: बैंक अधिकारी। भावना नरवाल: बैंक कर्मचारी। नीरज शर्मा: विक्रेता (बिक्री एजेंट)।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपी नीरज शर्मा ने इस मामले में गिरफ्तारी से बचने के लिए अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी, जिसे कोर्ट ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए खारिज कर दिया। इसके तुरंत बाद पुलिस ने उसे और बैंक अधिकारियों को हिरासत में लेकर लंबी पूछताछ की है।

सुरक्षा पर उठे बड़े सवाल: आखिर कैसे टूटा लॉकर?

बैंक लॉकर की प्रक्रिया के अनुसार, लॉकर केवल दो चाबियों के एक साथ इस्तेमाल से खुलता है—एक मास्टर चाबी बैंक के पास होती है और दूसरी ग्राहक के पास। बिना ग्राहक की चाबी के लॉकर तोड़ना एक गंभीर अपराध है और इसके लिए कड़े प्रोटोकॉल का पालन करना होता है।

पीड़ित डी.सी. गर्ग का कहना है कि उनके खाते से नियमित रूप से लॉकर का किराया (Rent) कट रहा था और असली चाबियां भी उन्हीं के पास थीं। ऐसे में बैंक प्रबंधन द्वारा लॉकर को किसी और को आवंटित कर देना सीधे तौर पर धोखाधड़ी और मिलीभगत की ओर इशारा करता है।

आगे क्या? बैंक ग्राहकों में दहशत

इस घटना के बाद से सेक्टर-15 स्थित एसबीआई शाखा के अन्य ग्राहकों में भी डर का माहौल है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस गिरोह ने अन्य लॉकरों के साथ भी छेड़छाड़ की है। फिलहाल, पुलिस हिरासत में लिए गए चारों आरोपियों से रिकवरी और इस साजिश के मास्टरमाइंड तक पहुंचने के लिए कड़ाई से पूछताछ कर रही है।

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