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Scorpion Survival Facts: कुदरत का अजूबा यह जीव, 6 दिन बिना सांस और 1 साल बिना खाए रहता है जिंदा

AAmandeep Singh
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Scorpion Survival Facts: कुदरत का अजूबा यह जीव, 6 दिन बिना सांस और 1 साल बिना खाए रहता है जिंदा

कुदरत का अजूबा यह जीव, 6 दिन बिना सांस और 1 साल बिना खाए रहता है जिंदा

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Scorpion Survival Facts: धरती पर जब इंसानों का नामोनिशान नहीं था और विशालकाय डायनासोर भी अस्तित्व में नहीं आए थे, तब से एक जीव इस ग्रह पर सीना ताने घूम रहा है—बिच्छू। पहली नज़र में एक सामान्य सा दिखने वाला यह जीव असल में कुदरत की ऐसी ‘सर्वाइवल मशीन’ है, जिसके सामने आधुनिक विज्ञान के कई नियम भी बौने साबित होते हैं। सांस लेने से लेकर भोजन पचाने तक, बिच्छू की शारीरिक बनावट और क्षमताएं किसी साइंस फिक्शन फिल्म के किरदार से कम नहीं हैं।

पानी के भीतर 6 दिन तक बिना सांस लिए रहने का हुनर

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आमतौर पर इंसान या कोई भी अन्य जीव पानी के भीतर कुछ मिनट से ज्यादा सांस रोके तो उसका दम घुटने लगता है। लेकिन बिच्छू को अगर गहरे पानी में डुबो दिया जाए, तो वह तुरंत नहीं मरता। बिच्छू के शरीर पर बेहद सूक्ष्म सांस छिद्र (Book Lungs) होते हैं। जब भी जीवन पर संकट आता है, तो बिच्छू इन छिद्रों को पूरी तरह से सील कर लेता है। इस अनूठी क्षमता के दम पर वह लगातार छह दिनों तक बिना ऑक्सीजन के पानी के नीचे जिंदा रह सकता है।

एक बार का शिकार और पूरे 12 महीने की छुट्टी

बिच्छू की भूख और उसके पचने की प्रक्रिया भी कम हैरान करने वाली नहीं है। जहां अन्य जानवरों को ऊर्जा बनाए रखने के लिए रोजाना शिकार की जरूरत होती है, वहीं बिच्छू विषम परिस्थितियों में अपने मेटाबॉलिज्म (उपापचय) को न्यूनतम स्तर पर ले आता है। इसे आप उसका कुदरती ‘पावर सेविंग मोड’ कह सकते हैं। इस दौरान शरीर में ऊर्जा की खपत लगभग शून्य हो जाती है, जिससे बिच्छू सिर्फ एक बार भरपेट खाकर पूरे एक साल तक बिना कुछ निगले जिंदा रह सकता है।

अंधेरे में यूवी टॉर्च की रोशनी में चमकती है त्वचा

बिच्छू की खासियत यहीं खत्म नहीं होती। अगर रात के अंधेरे में किसी बिच्छू पर अल्ट्रावायलेट (UV) लाइट यानी पराबैंगनी रोशनी डाली जाए, तो उसकी पूरी परत चमकदार नीले-हरे रंग में चमकने लगती है। वैज्ञानिक शोधों के अनुसार, बिच्छू के बाहरी कंकाल (Exoskeleton) में खास तरह के फ्लोरोसेंट प्रोटीन पाए जाते हैं जो यूवी किरणों को अवशोषित कर दृश्य प्रकाश में बदल देते हैं। हालांकि, वैज्ञानिक आज भी इस बात का पूरी तरह पता नहीं लगा पाए हैं कि बिच्छू को इस चमक से प्रकृति में क्या जैविक फायदा मिलता है।

करोड़ों सालों के महाविनाश को मात देने वाला सर्वाइवर

अगर इन सभी खूबियों को एक साथ देखा जाए, तो साफ होता है कि विकास (Evolution) की प्रक्रिया में बिच्छू ने खुद को हर मौसम और हर संकट के अनुकूल ढाल लिया है। उल्कापिंडों के गिरने से लेकर कई बड़े हिमयुग और महाविनाशों को झेलने के बाद भी बिच्छू आज धरती पर मौजूद है। बिना खाए-पिए और बिना सांस लिए मौत को मात देने का यह हुनर साबित करता है कि प्रकृति के पास जीवित रहने के ऐसे कई राज़ हैं, जिन्हें इंसानी समझ अभी पूरी तरह तलाश नहीं पाई है।

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