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राज्यसभा चुनाव विवाद: सुप्रीम कोर्ट से मीनाक्षी नटराजन को झटका, नामांकन रद्द करने के खिलाफ याचिका खारिज

VVinita Kohli
राज्यसभा चुनाव विवाद: सुप्रीम कोर्ट से मीनाक्षी नटराजन को झटका, नामांकन रद्द करने के खिलाफ याचिका खारिज
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भोपाल: मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार रहीं मीनाक्षी नटराजन  को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शुक्रवार को सर्वोच्च अदालत ने उनका नामांकन रद्द किए जाने के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान न्यायिक हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता और संविधान का अनुच्छेद 329(b) चुनावी प्रक्रिया को विशेष संरक्षण प्रदान करता है।

फैसले के बाद मीनाक्षी नटराजन ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि लोकतंत्र में पहले वोट चोरी होने की बातें सुनने को मिलती थीं, लेकिन इस बार एक पूरी सीट ही छीन ली गई। उनके बयान के बाद राज्य की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है।

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सुप्रीम कोर्ट ने क्यों खारिज की याचिका?

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव संबंधी मामलों में अदालतें आमतौर पर चुनाव प्रक्रिया पूरी होने से पहले हस्तक्षेप नहीं करतीं। संविधान के अनुच्छेद 329(b) का उद्देश्य यही सुनिश्चित करना है कि चुनावी प्रक्रिया बिना बाधा के पूरी हो सके। 

अदालत ने यह तर्क भी स्वीकार नहीं किया कि यदि नामांकन रद्द करने का निर्णय गलत या मनमाना हो, तब भी चुनाव के बीच न्यायिक दखल दिया जाए। कोर्ट का मानना था कि ऐसा करने से हर चुनावी विवाद में अलग-अलग हस्तक्षेप की मांग उठेगी, जो संवैधानिक व्यवस्था के विपरीत होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि ऐसे मामलों में उम्मीदवार सीधे सर्वोच्च अदालत का दरवाजा नहीं खटखटा सकते। यदि किसी उम्मीदवार को चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी या अन्याय का आरोप है तो उसके लिए चुनाव याचिका का रास्ता उपलब्ध है। अदालत ने स्पष्ट किया कि चुनाव संपन्न होने के बाद संबंधित उम्मीदवार हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर कर अपने सभी मुद्दे उठा सकता है और न्यायिक समीक्षा की मांग कर सकता है।

अनुच्छेद 329(b) भारतीय चुनावी व्यवस्था का महत्वपूर्ण प्रावधान है। इसके तहत चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद अदालतें सामान्य रूप से चुनाव में हस्तक्षेप नहीं कर सकतीं। इसका मतलब है कि नामांकन, मतदान, मतगणना और परिणाम घोषित होने जैसी प्रक्रियाओं के दौरान न्यायालय चुनाव रोकने या उसमें बदलाव करने का आदेश नहीं देता। यदि किसी पक्ष को शिकायत होती है तो उसे चुनाव समाप्त होने के बाद चुनाव याचिका दाखिल करनी होती है।

कांग्रेस उम्मीदवार का नामांकन क्यों हुआ था रद्द?

मध्य प्रदेश की तीसरी राज्यसभा सीट के लिए कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया था। कांग्रेस के पास उन्हें जिताने के लिए आवश्यक संख्या बल होने का दावा किया जा रहा था।

हालांकि 9 जून को भाजपा ने आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि मीनाक्षी नटराजन ने अपने खिलाफ दर्ज एक मामले की जानकारी नामांकन पत्र में नहीं दी है। आपत्ति पर विचार करने के बाद रिटर्निंग अधिकारी अरविंद शर्मा ने उनका नामांकन निरस्त कर दिया था।

सुनवाई में सिंघवी ने रखी थी यह दलील

सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस नेता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने पक्ष रखा। उन्होंने अदालत से कहा कि रिटर्निंग अधिकारी ने उम्मीदवार को चुनावी दौड़ से शुरुआती चरण में ही बाहर कर दिया।

सिंघवी ने तर्क दिया कि मीनाक्षी नटराजन को चुनाव लड़ने की अनुमति दी जानी चाहिए थी। यदि उन्हें पर्याप्त वोट नहीं मिलते तो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत उनकी हार हो जाती, लेकिन चुनाव लड़ने का अवसर मिलना चाहिए था।

भाजपा उम्मीदवारों को मिल चुका है प्रमाण पत्र

इस विवाद के बीच मध्य प्रदेश की तीनों राज्यसभा सीटों पर भाजपा उम्मीदवारों को निर्वाचित घोषित किया जा चुका है। गुरुवार को रजनीश अग्रवाल, तरूण चुघ और महेश केवट को निर्वाचन प्रमाण पत्र सौंप दिए गए। अब मीनाक्षी नटराजन के पास चुनाव याचिका के माध्यम से कानूनी लड़ाई आगे बढ़ाने का विकल्प बचा है। इस मामले पर आने वाले दिनों में राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा जारी रहने की संभावना है।

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