SGPC General Elections Demand | Amit Shah : सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी यानी एसजीपीसी के आम चुनाव कराने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। लंबे समय से टलती आ रही चुनाव प्रक्रिया को लेकर अब चार प्रमुख सिख संगठनों ने सीधे केंद्र सरकार का दरवाजा खटखटाया है। इन संगठनों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को औपचारिक पत्र भेजकर एसजीपीसी में जल्द से जल्द लोकतांत्रिक प्रक्रिया बहाल करने और नए नेतृत्व के चुनाव का रास्ता साफ करने की मांग की है।
सिख चिंतक मंच, पंचक बुद्धिजीवी काउंसिल, सिख फोरम और सिख यूथ फेडरेशन की तरफ से उठाए गए इस कदम ने धार्मिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। संगठनों के प्रमुख पदाधिकारियों—एडवोकेट आरएस बिंद्रा, अवतार सिंह, हरी सिंह और गुरबख्श सिंह थिंद—की ओर से सौंपे गए ज्ञापन में इस बात पर गहरी चिंता जताई गई है कि सिख गुरुद्वारा एक्ट, 1925 के नियमों के मुताबिक हर पांच साल पर चुनाव होने अनिवार्य हैं, लेकिन साल 2011 के बाद से अब तक आम चुनाव नहीं कराए गए हैं। लगातार हो रही इस देरी के कारण संस्था की कार्यप्रणाली और लोकतांत्रिक मूल्यों पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
सिकुड़ता हुआ हाउस और घटता प्रतिनिधित्व
एसजीपीसी के मौजूदा हाउस की स्थिति पर नजर डालें तो हालात काफी बदल चुके हैं। कुल 191 सदस्यों वाले इस हाउस में पिछले कई सालों के दौरान सदस्यों के निधन और विभिन्न कारणों से दिए गए इस्तीफे के चलते कई सीटें खाली पड़ी हैं। मौजूदा समय में स्थिति यह है कि हाउस में सिर्फ 144 के करीब सदस्य ही बचे हैं।
लंबे समय तक चुनाव न होने की वजह से सिख संगत का सही प्रतिनिधित्व और चुनी हुई संस्था की जवाबदेही कमजोर हुई है, जिसे लेकर समुदाय के भीतर चिंता लगातार बढ़ रही है।
मतदाता सूची में पारदर्शिता और नए सिरे से पंजीकरण की मांग
ज्ञापन में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि गुरुद्वारा चुनाव आयोग को नए सिरे से चुनाव कराने के लिए एक निश्चित समय-सीमा तय करनी चाहिए। साल 2011 के पिछले चुनावों के दौरान कुल 57 लाख मतदाता पंजीकृत थे, जिनमें पंजाब से लेकर हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ तक के वोटर शामिल थे। हालांकि, हालिया आंकड़ों के मुताबिक 2024 में सिर्फ पंजाब से लगभग 51.04 लाख आवेदन ही प्राप्त हुए हैं, जो कि 2011 के कुल पंजीकृत मतदाताओं से भी कम हैं।
यही वजह है कि सिख संगठनों ने मांग की है कि पूरी मतदाता सूची को पूरी तरह पारदर्शी तरीके से तैयार किया जाए ताकि हर पात्र सिख मतदाता का नाम सूची में शामिल हो सके। अब देखना यह होगा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय और चुनाव आयोग इन सिख संगठनों की इस मांग पर क्या रुख अपनाते हैं और एसजीपीसी के नए चुनावों का रास्ता कब तक साफ हो पाता है।

