Shardiya Navratri Day 3: पावन शारदीय नवरात्रि का उत्सव इस समय पूरे देश में पूरी श्रद्धा, उल्लास और भव्यता के साथ मनाया जा रहा है। उत्सव के इस पवित्र क्रम में आज नवरात्रि का तीसरा दिन है, जो पूरी तरह से शक्तिस्वरूपा माँ चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना को समर्पित है। सुबह तड़के से ही शहर के प्रमुख मंदिरों में गूंजते घंटे-घड़ियालों की आवाज और धूप-दीप की महक के साथ श्रद्धालुओं का तांता लगना शुरू हो गया। भक्तगण खासे उत्साह के साथ माँ के दरबार में हाजिरी लगाने पहुंच रहे हैं।
धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, देवी पार्वती के इस उग्र और कल्याणकारी स्वरूप के मस्तक पर घंटे के आकार का आधा चंद्रमा सुशोभित है, जिसके कारण इन्हें ‘माँ चंद्रघंटा’ के रूप में पूजा जाता है। उनके दस हाथों में विभिन्न प्रकार के अस्त्र-शस्त्र सुशोभित हैं और उनका वाहन बाघ है। माँ का यह रूप भक्तों को एक ओर जहाँ ममता और सौम्यता का अहसास कराता है, वहीं अधर्म और अन्यायी ताकतों के विनाश का कड़ा संदेश भी देता है।
जीवन से भय और मानसिक तनाव दूर करती हैं माँ चंद्रघंटा
नवरात्रि के तीसरे दिन माँ चंद्रघंटा की साधना का विशेष स्थान माना गया है। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, इनकी सच्चे मन से आराधना करने वाले साधक के जीवन में व्याप्त सभी तरह के भय, बाधाएं और मानसिक तनाव धीरे-धीरे दूर होने लगते हैं। ज्योतिषविदों का कहना है कि माँ चंद्रघंटा की पूजा करने से व्यक्ति के भीतर आंतरिक आत्मबल और वीरता का संचार होता है। जो लोग किसी भी प्रकार के अज्ञात भय या जीवन के कड़े संघर्षों से जूझ रहे हैं, उन्हें आज के दिन विशेष रूप से माँ के चरणों में शीश नवाकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए।
आज सुबह से ही राजधानी और आसपास के स्थानीय मंदिरों में विशेष अनुष्ठान और महाआरती का आयोजन किया गया। हाथ में लाल पुष्प, फल और पूजन सामग्री लेकर श्रद्धालु कतारों में खड़े होकर अपनी बारी की प्रतीक्षा करते नजर आए। पूरा वातावरण “जय माता दी” के गगनभेदी जयकारों से गुंजायमान हो उठा है।
सुरक्षा और उल्लास के बीच जारी है पर्व
त्योहार के इस तीसरे दिन मंदिरों के आसपास सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम देखे गए हैं ताकि दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। बाजार में भी पूजन सामग्री और फल-फूल की दुकानों पर अच्छी खासी चहल-पहल बनी हुई है। इस पावन अवसर पर हर वर्ग के लोगों में माता के प्रति अटूट आस्था और उत्साह साफ झलक रहा है।
साहस और निर्भयता के इस महापर्व पर अपने मन से सभी प्रकार के विकारों को त्यागकर माँ चंद्रघंटा का ध्यान लगाना चाहिए। यह दिन आत्ममंथन और सकारात्मक ऊर्जा को अपने जीवन में उतारने का उत्तम अवसर प्रदान करता है।
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