Breaking News
Magha Shraddha 2026: 7 अक्टूबर को है मघा श्राद्ध, जानें द्वादशी तिथि पर तर्पण का शुभ समय और नियमKaithal Nursing Staff Strike: ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के खिलाफ कैथल में नर्सिंग स्टाफ का हल्लाबोल, 5 से 7 अक्टूबर तक हड़तालMahendragarh : हकेवि की डॉ. सुमन रानी को मिला ‘श्रेष्ठ शिक्षक अवार्ड’, शिक्षा मंत्री ने किया सम्मानितNarnaul: हरियाणा के सभी जिलों में 8 अक्ट्रबर को होगा ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ विशाल रोष मार्चCEC ज्ञानेश कुमार मामले में SC ने EC से मांगा जवाब, CJI बोले Form-6 पर- हमने कोई बदलाव मंजूर नहीं कियाMagha Shraddha 2026: 7 अक्टूबर को है मघा श्राद्ध, जानें द्वादशी तिथि पर तर्पण का शुभ समय और नियमKaithal Nursing Staff Strike: ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के खिलाफ कैथल में नर्सिंग स्टाफ का हल्लाबोल, 5 से 7 अक्टूबर तक हड़तालMahendragarh : हकेवि की डॉ. सुमन रानी को मिला ‘श्रेष्ठ शिक्षक अवार्ड’, शिक्षा मंत्री ने किया सम्मानितNarnaul: हरियाणा के सभी जिलों में 8 अक्ट्रबर को होगा ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ विशाल रोष मार्चCEC ज्ञानेश कुमार मामले में SC ने EC से मांगा जवाब, CJI बोले Form-6 पर- हमने कोई बदलाव मंजूर नहीं किया

Sirsa Farmers Protest: सिरसा में किसानों का चक्का जाम: बायोमेट्रिक सिस्टम के विरोध में भावदीन टोल पर 4 घंटे रहा हंगामा

AAmandeep Singh
सिरसा में किसानों का चक्का जाम: बायोमेट्रिक सिस्टम के विरोध में भावदीन टोल पर 4 घंटे रहा हंगामा
शेयर करें
AI Quick Summary

Want to save time? Let our AI read the article and give you 3 quick bullet points.

Listen to this article
AUDIO VERSION

सिरसा। सिरसा में जुटे किसानों की नाराजगी की सबसे बड़ी वजह सरकार के वो दो नए नियम हैं, जिन्हें प्रशासन ‘पारदर्शिता’ बता रहा है और किसान ‘आफत’। दरअसल, इस बार गेहूं और सरसों की खरीद के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य किया गया है। किसान नेता लक्खा सिंह ने दो टूक कहा, “खेतों में हाड़-तोड़ मेहनत करने वाले किसान के हाथ हमेशा मिट्टी और काम से घिसे होते हैं। कई बार मशीन अंगूठे के निशान नहीं पकड़ती। ऐसे में किसान क्या मंडियों में अपनी फसल बेचने के बजाय अंगूठा मैच होने का इंतजार करता रहेगा?”

वहीं, ट्रैक्टर-ट्रॉली के कमर्शियल रजिस्ट्रेशन जैसा बोझ डालने की कोशिशों पर भी किसान भड़के हुए हैं। किसान नेता हरजिंद्र सिंह ने कहा कि ट्रैक्टर कोई माल ढोने वाला व्यापारिक ट्रक नहीं है, बल्कि किसान का औजार है। उस पर नए नियमों का बोझ डालना खेती को और घाटे का सौदा बनाना है।

विज्ञापन

डीएसपी के साथ तीखी बहस, पुलिस की घेराबंदी में गूंजे नारे

प्रदर्शन के दौरान भावदीन टोल पर भारी पुलिस बल की तैनाती रही। डीएसपी ने कई बार किसानों को समझाने और रास्ता खोलने की कोशिश की, लेकिन किसान अपनी मांगों पर अडिग रहे। इस दौरान कई बार प्रशासन और किसान नेताओं के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली। जब पुलिस ने कानून-व्यवस्था का हवाला दिया, तो किसानों ने जवाब दिया कि उनकी आजीविका का सवाल कानून से बड़ा है।

विपक्षी दलों ने भी थामी किसानों की लाठी

इस आंदोलन को विपक्षी दलों का भी साथ मिलने लगा है। आम आदमी पार्टी के जिलाध्यक्ष हैप्पी सिंह ने अपने कार्यकर्ताओं के साथ धरना स्थल पर पहुंचकर किसानों को समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि सरकार एयरकंडीशन कमरों में बैठकर नियम बनाती है, जबकि उसे यह नहीं पता कि मंडी की धूल में बायोमेट्रिक मशीनें अक्सर जवाब दे जाती हैं।

‘भारत बंद’ की दी चेतावनी

सिरसा के इस प्रदर्शन ने साफ कर दिया है कि किसान फिलहाल झुकने के मूड में नहीं हैं। किसान नेताओं ने मंच से हुंकार भरते हुए कहा कि यह सिर्फ ट्रेलर है। यदि 15 अप्रैल तक इन ‘जटिल’ नियमों को वापस नहीं लिया गया या इनमें ढील नहीं दी गई, तो आंदोलन का अगला पड़ाव ‘पूरा भारत जाम’ करना होगा। फिलहाल, दोपहर 3 बजे जाम तो खुल गया, लेकिन किसानों की चेतावनी ने सरकार और प्रशासन की नींद उड़ा दी है।

विज्ञापन

सिरसा की और ख़बरें

ताज़ा ख़बरें सीधे अपने ईमेल पर

जगमार्ग न्यूज़ की बड़ी ख़बरें रोज़ अपने इनबॉक्स में पाएं। मुफ़्त, कभी भी अनसब्सक्राइब करें।