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Sirsa LPG Shortage: सिलेंडर संकट: 20 दिन की वेटिंग और खाली हाथ लौटते लोग, क्या है असली वजह?

AAmandeep Singh
सिलेंडर संकट: 20 दिन की वेटिंग और खाली हाथ लौटते लोग, क्या है असली वजह?
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सिरसा।  सिरसा की सड़कों पर इन दिनों एक अजीब सा मंजर है। हाथ में खाली सिलेंडर और आंखों में बेबसी लिए लोग कतारों में खड़े अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। एक महिला उपभोक्ता ने रुंधे गले से बताया, “घर में छोटे बच्चे हैं, सुबह से चूल्हा नहीं जला। 15 दिन पहले पैसे जमा किए थे, लेकिन आज भी खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। अब क्या बच्चों को लकड़ी के धुएं में खाना खिलाएं?” यह दर्द केवल एक परिवार का नहीं, बल्कि सिरसा के हजारों घरों का है, जहां एलपीजी संकट ने ‘उज्ज्वला’ के दावों की हवा निकाल दी है।

दिव्यांग और बुजुर्गों की परीक्षा, व्यवस्था पर उठते सवाल

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भीड़ का आलम यह है कि एजेंसियों को अपने मुख्य गेट बंद करने पड़े हैं। सबसे बुरा हाल दिव्यांगों और बुजुर्गों का है। व्हीलचेयर पर बैठे एक बुजुर्ग पिछले तीन दिनों से लगातार चक्कर काट रहे हैं, लेकिन हर बार ‘स्टॉक खत्म’ का बोर्ड उन्हें चिढ़ाता हुआ वापस भेज देता है। उपभोक्ताओं का सीधा आरोप है कि गैस एजेंसियां वितरण में पारदर्शिता नहीं बरत रही हैं। आरोप लग रहे हैं कि चहेतों को गुपचुप तरीके से सिलेंडर दिए जा रहे हैं, जबकि आम आदमी कतार में खड़ा-खड़ा बेदम हो रहा है।

खाकी के साये में ‘रसोई गैस’: तनावपूर्ण हुए हालात

जैसे-जैसे लोगों का सब्र जवाब दे रहा है, एजेंसियों पर हंगामे की स्थिति बन रही है। बिगड़ते हालात को देखते हुए प्रशासन ने विभिन्न एजेंसियों के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया है। पुलिसकर्मी लाउडस्पीकर के जरिए शांति बनाए रखने की अपील कर रहे हैं, लेकिन खाली पेट और खाली सिलेंडर का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा। पुलिस के साये में हो रहा वितरण खुद ही व्यवस्था की नाकामी की तस्दीक कर रहा है।

लकड़ी और उपलों का सहारा: फिर पुराने दौर की ओर लौटते कदम

गैस न मिलने के कारण सिरसा के कई इलाकों में लोग एक बार फिर पारंपरिक चूल्हों की ओर लौटने को मजबूर हैं। धुएं से आंखों में जलन और फेफड़ों की बीमारी का डर तो है, लेकिन पेट की आग बुझाने के लिए लकड़ी और उपलों के अलावा कोई चारा नहीं बचा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि डिजिटल इंडिया और ऑनलाइन बुकिंग के इस दौर में अगर 20 दिन बाद भी सिलेंडर नहीं मिल रहा, तो यह प्रशासन की घोर लापरवाही है।

प्रशासन की चुप्पी और गहराता संकट

जिले में सप्लाई चेन क्यों टूटी, इसका कोई स्पष्ट जवाब फिलहाल अधिकारियों के पास नहीं है। जानकारों का मानना है कि अगर आपूर्ति और वितरण प्रणाली में तुरंत सुधार नहीं किया गया, तो यह आक्रोश सड़कों पर बड़े प्रदर्शन का रूप ले सकता है। सिरसा की जनता अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि अपने हक का नीला सिलेंडर मांग रही है।

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