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Smartphone Privacy: फोन की स्क्रीन पर दिखने वाले इस 'हरे बिंदु' को न करें इग्नोर, तुरंत बदलें ये सेटिंग्स

AAmit Gupta
Smartphone Privacy: फोन की स्क्रीन पर दिखने वाले इस 'हरे बिंदु' को न करें इग्नोर, तुरंत बदलें ये सेटिंग्स
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Android Privacy Settings : स्मार्टफोन आज जेब में रखा सिर्फ एक गैजेट नहीं, बल्कि इंसान की पूरी जिंदगी का लेखा-जोखा बन चुका है। सुबह की अलार्म से लेकर देर रात के ऑनलाइन ट्रांजैक्शन तक, हर एक गतिविधि इसी स्क्रीन के इर्द-गिर्द घूमती है। इसी वजह से यह फोन अब साइबर ठगों और हैकर्स के निशाने पर सबसे ऊपर रहता है। आम यूजर्स की एक छोटी सी लापरवाही, जैसे कि सेटिंग्स को बिना जांचे छोड़ देना, सीधे तौर पर डेटा लीक की सबसे बड़ी वजह बनती जा रही है।

मार्केट में जब भी कोई नया ऐप आता है, तो लोग बिना सोचे-समझे उसे इंस्टॉल कर लेते हैं। इस दौरान स्क्रीन पर आने वाले लंबे-चौड़े नियम और शर्तों को पढ़ने की जहमत कोई नहीं उठाता। लोग बस फटाफट ‘Allow’ बटन दबाते चले जाते हैं। यहीं से असली खेल शुरू होता है। किसी साधारण से दिखने वाले ऐप को भी जब आपके कैमरे, कॉन्टैक्ट लिस्ट और गैलरी का एक्सेस मिल जाता है, तो आपका पूरा फोन एक खुली किताब बन जाता है।

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फोन में छिपा है तगड़ा सुरक्षा कवच

अच्छी बात यह है कि इस खतरे से निपटने के इंतजाम आपके एंड्रॉयड फोन के भीतर ही मौजूद हैं। गूगल अपने ऑपरेटिंग सिस्टम में ‘प्राइवेसी डैशबोर्ड’ और ‘परमिशन मैनेजर’ जैसे इन-बिल्ट टूल्स देता है। इनकी मदद से कोई भी यूजर यह साफ देख सकता है कि कौन सा ऐप उसकी पीठ पीछे क्या-क्या देख और सुन रहा है। यह टूल उन ऐप्स की पोल खोल देता है जो बिना काम के भी आपके फोन का डेटा खंगालते रहते हैं।

हालिया एंड्रॉयड अपडेट्स में एक बेहद काम का फीचर जोड़ा गया है, जिसे ‘ग्रीन इंडिकेटर’ कहते हैं। जब भी आपके फोन का कैमरा या माइक बैकग्राउंड में एक्टिव होगा, स्क्रीन के कोने पर एक छोटा सा हरा बिंदु चमकने लगेगा। अगर आप फोन पर कोई ऐसा काम नहीं कर रहे हैं जिसमें कैमरे या माइक की जरूरत हो, और फिर भी वह हरा निशान दिख रहा है, तो समझ लीजिए कि कोई आपकी जासूसी कर रहा है। ऐसे समय में तुरंत अलर्ट होना और ऐप को बंद करना ही एकमात्र रास्ता है।

चौबीसों घंटे की ट्रैकिंग से बचें

लोकेशन परमिशन को लेकर सबसे ज्यादा लापरवाही बरती जाती है। कई ऐसे ऐप्स भी लोकेशन का एक्सेस मांगते हैं जिनका डिलीवरी या नेविगेशन से कोई लेना-देना नहीं होता। साइबर एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ऐप्स को ‘Allow All The Time’ यानी हर समय की परमिशन देना खुद को खतरे में डालने जैसा है। इसकी जगह हमेशा ‘Only while using the app’ का विकल्प चुनें, ताकि जब आप ऐप बंद करें, तो ट्रैकिंग भी खुद-ब-खुद लॉक हो जाए।

इसके अलावा, फोन में बरसों से पड़े बेकार ऐप्स भी किसी टाइम बम से कम नहीं हैं। लोग काम पड़ने पर ऐप डाउनलोड करते हैं और फिर भूल जाते हैं। ये पुराने ऐप्स लंबे समय तक अपडेट न होने के कारण सुरक्षा के लिहाज से बेहद कमजोर हो जाते हैं। हैकर्स इन्हीं कमजोर कड़ियों को ढूंढकर फोन के अंदर मालवेयर प्लांट कर देते हैं। इस समस्या से बचने के लिए एंड्रॉयड का ‘Auto Reset Permissions’ फीचर तुरंत ऑन कर लेना चाहिए, जो बंद पड़े ऐप्स की परमिशन को अपने आप खत्म कर देता है।

ऐसे कसें प्राइवेसी का शिकंजा

अपने फोन को पूरी तरह महफूज रखने के लिए आपको सेटिंग्स में मामूली बदलाव करने होंगे। सबसे पहले मोबाइल की मुख्य ‘Settings’ में जाएं और वहां दिए गए ‘Privacy’ या ‘Security & Privacy’ वाले विकल्प को खोलें।

इसके बाद सामने दिख रहे ‘Permission Manager’ पर टैप करें, जहां आपको कैमरे, माइक और लोकेशन की अलग-अलग कैटेगोरी मिलेगी। यहां जाकर सूची को ध्यान से देखें और जिन ऐप्स को इन परमिशन की जरूरत नहीं है, उनके आगे से एक्सेस को हटाकर ‘Don’t Allow’ पर सेट कर दें। यह छोटा सा कदम आपके फोन को हैकर्स के लिए अभेद्य किला बना देगा।

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