उच्चतम न्यायालय आवारा पशु संबंधी एनएचएआई की याचिका पर सुनवाई के लिए विशेष पीठ गठित करेगा
आवारा पशु प्रबंधन पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
Stray Cattle Shelters: आवारा पशुओं को लेकर चल रहे मामलों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी NHAI की याचिका पर विशेष पीठ गठित करने पर सहमति जताई है। NHAI ने उस निर्देश को चुनौती दी है, जिसके तहत उसे देशभर में आवारा पशुओं के लिए आश्रय स्थल बनाने को कहा गया है। सोमवार को प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के सामने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने NHAI का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि इस मामले की सुनवाई के लिए पहले गठित विशेष पीठ का पुनर्गठन किया जाना चाहिए।
तुषार मेहता ने दलील दी कि आवारा पशुओं के लिए आश्रय स्थल बनाना स्थानीय निकायों और जिला प्रशासन की जिम्मेदारी है। उनका कहना था कि NHAI के स्तर पर पूरे देश में इस तरह की व्यवस्था बनाना व्यावहारिक नहीं है। सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि NHAI के अनुमान के अनुसार देशभर में आश्रय स्थल बनाने पर करीब 7,000 करोड़ रुपये का खर्च आ सकता है। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण का मुख्य काम राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़ा है और स्थानीय स्तर पर पशु प्रबंधन की जिम्मेदारी संबंधित प्रशासन को निभानी चाहिए।
पहले भी हाईवे से आवारा पशु हटाने के निर्देश
आवारा पशुओं से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले भी राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर पशुओं की मौजूदगी को लेकर निर्देश दे चुका है। नवंबर 2025 के एक आदेश में अदालत ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के संबंधित नगर निकायों, सड़क एवं परिवहन विभागों, लोक निर्माण विभागों तथा NHAI को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में राजमार्गों और एक्सप्रेसवे से मवेशियों तथा अन्य आवारा पशुओं को हटाने के लिए समन्वित अभियान चलाने का निर्देश दिया था। इस व्यवस्था का सीधा संबंध सड़क सुरक्षा से है। राष्ट्रीय राजमार्गों पर आवारा पशुओं की मौजूदगी से वाहनों की आवाजाही प्रभावित होती है और अचानक सड़क पर पशु आने से दुर्घटना का जोखिम भी बढ़ता है।
तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की विशेष पीठ के पुनर्गठन का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि प्रधान न्यायाधीश के विशेष निर्देश के बिना इस तरह की विशेष पीठ का गठन नहीं किया जा सकता। इस पर प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि अदालत विशेष पीठ का गठन करेगी। अब गठित होने वाली पीठ NHAI की आपत्ति और आश्रय स्थल बनाने के निर्देश से जुड़े कानूनी सवालों पर सुनवाई करेगी।
सड़क सुरक्षा और जिम्मेदारी दोनों पर नजर
इस विवाद का असर केवल NHAI और स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी तक सीमित नहीं है। राजमार्गों पर आवारा पशुओं की मौजूदगी वाहन चालकों, यात्रियों और पशुओं की सुरक्षा से भी जुड़ी है। अब अदालत के सामने यह सवाल रहेगा कि राजमार्गों से आवारा पशुओं को हटाने की जिम्मेदारी निभाने के लिए NHAI की भूमिका कितनी होनी चाहिए और स्थायी आश्रय जैसी व्यवस्था बनाने का दायित्व किस सरकारी प्राधिकरण का है। विशेष पीठ की सुनवाई में इन पहलुओं पर आगे तस्वीर साफ होगी।
