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Stubble Management Rohtak: फसल अवशेषों को आग न लगाएं किसान, प्रति एकड़ 1,200 रुपये की आर्थिक मदद दे रही सरकार

Stubble Management Rohtak: फसल अवशेषों को आग न लगाएं किसान, प्रति एकड़ 1,200 रुपये की आर्थिक मदद दे रही सरकार

फसल अवशेषों को आग न लगाएं किसान, प्रति एकड़ 1,200 रुपये की आर्थिक मदद दे रही सरकार

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AAmandeep Singh

Stubble Management Rohtak: धान कटाई के सीजन के बीच हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए प्रशासन और कृषि विभाग पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है।

रोहतक जिले के महम उपमंडल में प्रशासन की ओर से चलाए जा रहे जागरूकता अभियान के तहत शुक्रवार को कई ग्रामीण इलाकों में विशेष शिविरों का आयोजन किया गया। एसडीएम विपिन कुमार के मार्गदर्शन में कृषि विभाग की टीमों ने फरमाना बादशाहपुर, बहलबा और मोखरा गांवों का दौरा किया और किसानों से सीधा संवाद स्थापित कर फसल अवशेषों को आग के हवाले न करने की अपील की।

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खेत में पराली मिलाने से बढ़ती है मिट्टी की ताकत

शिविर के दौरान किसानों को संबोधित करते हुए कृषि विकास अधिकारी मोनिका ने बताया कि किसान अक्सर धान की कटाई के बाद जल्दी खेत खाली करने के चक्कर में पराली में आग लगा देते हैं, जो न सिर्फ पर्यावरण के लिए बल्कि जमीन की सेहत के लिए भी घातक है। यदि किसान पराली को खेतों में ही मिला दें, तो इससे मिट्टी की उपजाऊ शक्ति और नमी दोनों में जबरदस्त सुधार होता है। इससे जमीन का जैविक कार्बन बढ़ता है और मिट्टी के मित्र जीव सुरक्षित रहते हैं। इसके अलावा किसान चाहें तो पराली को पशुओं के चारे के रूप में भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

कृषि यंत्रों पर भारी छूट और प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि

सरकार की योजनाओं की जानकारी देते हुए विभाग ने स्पष्ट किया कि किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए अकेला नहीं छोड़ा जा रहा है। सरकार सुपर सीडर, मल्चर और हैप्पी सीडर जैसे आधुनिक कृषि यंत्रों की खरीद पर 50 प्रतिशत तक का भारी अनुदान दे रही है। इसके साथ ही, जो किसान खेतों में पराली न जलाकर उसका वैज्ञानिक तरीके से उचित प्रबंधन करते हैं, उन्हें सरकार की तरफ से प्रोत्साहन के रूप में प्रति एकड़ 1,200 रुपये की वित्तीय सहायता भी प्रदान की जा रही है।

पराली का धुआं बिगाड़ रहा आबोहवा और सेहत

विशेषज्ञों ने किसानों को आगाह किया कि पराली जलाने से निकलने वाली जहरीली गैसें हवा को भारी कर देती हैं, जिससे स्मॉग और गंभीर वायु प्रदूषण की समस्या पैदा होती है। इससे न केवल बुजुर्गों और बच्चों को सांस लेने में दिक्कत होती है, बल्कि मिट्टी के प्राकृतिक पोषक तत्व और सूक्ष्मजीव भी जलकर राख हो जाते हैं। जागरूकता कार्यक्रमों के अंत में गांवों में एक रैली भी निकाली गई, जिसमें ग्राम पंचायत के प्रतिनिधियों, किसानों और कृषि विभाग के कर्मचारियों ने मिलकर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया और सभी से स्वच्छ एवं प्रदूषणमुक्त वातावरण बनाए रखने में सहयोग की अपील की।

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