टेक्नोलॉजी। देशभर में पारा इन दिनों रिकॉर्ड तोड़ रहा है और इस भीषण गर्मी का सीधा असर आपकी गाड़ियों पर भी पड़ता है। अक्सर कार मालिकों के बीच यह बहस छिड़ी रहती है कि गर्मियों में पेट्रोल या डीजल टैंक को पूरा ऊपर तक भरवाना चाहिए या नहीं। ऑटो एक्सपर्ट्स और वैज्ञानिकों की मानें तो तपती दुपहरी में फ्यूल टैंक को ‘नेक-फुल’ यानी गले तक भरवाना गाड़ी की सेहत के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है। हालांकि, अगर कभी भूलवश ऐसा हो जाए तो पैनिक होने की जरूरत नहीं है, लेकिन इसे अपनी आदत बना लेना सीधे तौर पर बड़ी तकनीकी खराबी या किसी बड़े हादसे को दावत देना है।
ईंधन के फैलने का विज्ञान और टैंक का बढ़ता प्रेशर
इसके पीछे विज्ञान का एक बहुत सीधा और सरल नियम काम करता है। तापमान जैसे-जैसे बढ़ता है, पेट्रोल और डीजल का घनत्व कम होता है और उनका आयतन बढ़ता है, यानी ईंधन फैलने लगता है। जब बाहर का पारा 40 डिग्री सेल्सियस के पार हो, तो टैंक के भीतर का तेल न सिर्फ फैलता है बल्कि तेजी से वाष्प (गैस) में भी बदलने लगता है। अगर आपने टैंक में जरा भी जगह नहीं छोड़ी है, तो इस गैस और फैलाव को फैलने के लिए स्पेस नहीं मिलता। नतीजतन, टैंक के अंदर अत्यधिक दबाव (प्रेशर) बन जाता है, जो कार के वेंटिंग सिस्टम को फाड़ सकता है या फ्यूल लीक होने का कारण बन सकता है।
मॉडर्न कारों के EVAP सिस्टम को पहुंचता है मोटा नुकसान
आजकल बाजार में आने वाली तमाम आधुनिक कारों में पर्यावरण सुरक्षा के लिहाज से EVAP यानी ‘इवेपोरेटिव एमिशन कंट्रोल सिस्टम’ दिया जाता है। इस सिस्टम का मुख्य काम फ्यूल टैंक से निकलने वाली हानिकारक गैसों या भाप को सीधे हवा में उड़ने से रोकना और उसे वापस इंजन में कम्बशन के लिए भेजना होता है। जब आप ऑटो-कट के बाद भी जबरदस्ती तेल डलवाते हैं, तो यह लिक्विड फ्यूल गैस चैंबर को पार करके सीधे EVAP सिस्टम की चारकोल कैनिस्टर में घुस जाता है। इस नाजुक हिस्से में लिक्विड तेल जाने से पूरा सिस्टम चोक हो जाता है, जिसे बदलवाने में आपकी जेब पर मोटा खर्च आना तय है।
एक्सपर्ट्स की सलाह: ‘ऑटो-कट’ को ही मानें अंतिम सीमा
गर्मियों के इस सीजन में किसी भी तरह के नुकसान या अनहोनी से बचने के लिए कार मालिकों को कुछ बुनियादी बातों का ख्याल रखना चाहिए। सबसे जरूरी नियम यह है कि पेट्रोल पंप पर जैसे ही फ्यूल डिस्पेंसर मशीन का नोजल खुद-ब-खुद बंद (ऑटो-कट) हो जाए, कर्मचारियों को वहीं तेल रोकना बोल दें। पंप पर अक्सर लोग 1500 या 2000 रुपये का राउंड फिगर का हिसाब मिलाने के चक्कर में नोजल को थोड़ा बाहर खींचकर जबरदस्ती तेल ठूंसने को कहते हैं, जो कि सरासर गलत है। इसके अलावा, गर्मियों में गाड़ी को हमेशा सीधे सूरज की रोशनी से बचाकर छांव में पार्क करें और हर सफर से पहले यह जरूर जांच लें कि फ्यूल टैंक का ढक्कन (कैप) ठीक से टाइट लगा है या नहीं।

