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कांग्रेस शुरू करेगी 'मनरेगा बचाओ संग्राम', ‘वीबी-जी राम जी अधिनियम’ को न्यायालय में चुनौती देगी

VVinita Kohli
कांग्रेस शुरू करेगी 'मनरेगा बचाओ संग्राम', ‘वीबी-जी राम जी अधिनियम’ को न्यायालय में चुनौती देगी
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नई दिल्ली: कांग्रेस ने शनिवार को कहा कि वह अगले सप्ताह से करीब 45 दिवसीय ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ की शुरुआत करेगी और ‘विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम’ को न्यायालय में चुनौती भी देगी। कांग्रेस के इस अभियान के तहत ग्राम स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक कई कार्यक्रम करने के साथ ही देश के अलग-अलग हिस्सों में चार बड़ी सभाएं आयोजित की जाएंगी। पार्टी का कहना है कि उसके इस “संग्राम” का मकसद यह है कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) बहाल हो और नए कानून को वापस लिया जाए। पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बताया कि पार्टी का यह अभियान 10 जनवरी से शुरू होकर 25 फरवरी तक जारी रहेगा। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि मनरेगा के स्थान पर बनाए गए ‘विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम’ के तहत सिर्फ “विनाश भारत” और योजना के केंद्रीकरण की गारंटी दी गई है।

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उन्होंने कहा कि ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ दिल्ली केंद्रित नहीं, बल्कि पंचायत, प्रखंड और जिला केंद्रित है। उन्होंने यह भी कहा कि नए कानून को न्यायालय में चुनौती दी जाएगी। बीते 27 दिसंबर को पार्टी की शीर्ष नीति निर्धारक इकाई कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में मनरेगा के पक्ष में अभियान शुरू करने का फैसला किया गया था। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने एक्स पर पोस्ट किया, ” कांग्रेस साफ तौर पर तीन मांगें करती है। ‘जी राम जी क़ानून’ वापस लिया जाए, मनरेगा को अधिकार आधारित कानून के तौर पर बहाल किया जाए और काम के अधिकार और पंचायतों के अधिकार को बहाल किया जाए। इसीलिए हमने देशव्यापी “मनरेगा बचाओ संग्राम” शुरू किया है।” खरगे ने कहा, “मनरेगा कोई चैरिटी नहीं है। यह एक कानूनी गारंटी है। करोड़ों सबसे गरीब लोगों को उनके अपने गांवों में काम मिला, भूख और मजबूरी में पलायन कम हुआ, ग्रामीण मज़दूरी बढ़ी, और महिलाओं की आर्थिक गरिमा मज़बूत हुई। ‘जी राम जी’ कानून इस अधिकार को खत्म करने के लिए बनाया गया है। कांग्रेस इसका कड़ा विरोध करती है ।”

वेणुगोपाल ने संवाददाताओं से कहा, “कार्य समिति की बैठक में फैसला किया गया था कि मनरेगा बचाओ संग्राम शुरू किया जायेगा।” उन्होंने दावा किया कि नया कानून इस तरह से बनाया गया है, ताकि मनरेगा को खत्म किया जा सके। वेणुगोपाल ने कहा कि कोविड और कई दूसरे संकटों के समय मनरेगा एक बड़ा सुरक्षा कवच बनकर सामने आया था। उनके मुताबिक, ‘विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम’ के तहत सब कुछ केंद्र सरकार तय करेगी और गांव में रहने वालों को इसकी मार झेलनी पड़ेगी। वेणुगोपाल ने कहा कि नए कानून के तहत कार्य दिवस को 100 से बढ़ाकर 125 दिन करने की बात की गई है, लेकिन यह दावा बकवास है, क्योंकि केंद्र के हिस्से धन आवंटन का अनुपात 90 प्रतिशत से घटाकर 60 प्रतिशत किया गया है। रमेश ने कहा कि ‘वीबी-जी राम जी अधिनियम’ की एकमात्र गारंटी योजना का केंद्रीकरण है। उन्होंने कहा, “हमारी सिर्फ यही मांग है कि मनरेगा को वापस लाया जाए और नए कानून को वापस लिया जाए।”

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