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सरकार डरी हुई है, इसलिए राहुल गांधी को बोलने नहीं दे रही: प्रियंका गांधी

VVinita Kohli
सरकार डरी हुई है, इसलिए राहुल गांधी को बोलने नहीं दे रही: प्रियंका गांधी
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नई दिल्ली: कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को जानबूझकर बोलने नहीं दिया जा रहा है। उनका कहना है कि सरकार इस बात से डर रही है कि यदि राहुल गांधी को बोलने का अवसर मिला, तो चीन के साथ सैन्य तनाव के समय सरकार की भूमिका और सच्चाई देश के सामने आ जाएगी।

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लोकसभा में राहुल गांधी को क्यों नहीं बोलने दिया गया

प्रियंका गांधी ने बताया कि राहुल गांधी ने सोमवार और मंगलवार को लोकसभा में चीन से जुड़े मुद्दे को उठाने की कोशिश की थी। उन्होंने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम. एम. नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण पर आधारित एक लेख का हवाला दिया था। हालांकि, सदन के आसन से उन्हें इस पर बोलने की अनुमति नहीं दी गई। मंगलवार को राहुल गांधी ने इस लेख को सत्यापित बताते हुए सदन के पटल पर भी रखा, इसके बावजूद चर्चा की अनुमति नहीं मिली। इसी मुद्दे और कुछ अन्य विषयों को लेकर संसद में गतिरोध की स्थिति बनी हुई है।

विपक्षी सांसदों का निलंबन और लोकतांत्रिक सवाल

संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि हर सत्र में विपक्षी सांसदों को निलंबित किया जा रहा है और यह अब कोई नई बात नहीं रह गई है। उनका कहना था कि राहुल गांधी ने किसी गोपनीय या असत्य स्रोत का नहीं, बल्कि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सामग्री का हवाला दिया है, फिर भी उन्हें बोलने से रोका जा रहा है। उन्होंने इस पर सवाल उठाया कि जब सत्ता पक्ष के नेता स्वयं संसद में पुस्तकों और पत्रिकाओं के अंशों का हवाला देते रहे हैं, तो फिर राहुल गांधी को ऐसा करने से क्यों रोका जा रहा है।

प्रधानमंत्री और सत्ता पक्ष पर दोहरा मापदंड का आरोप

प्रियंका गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी स्वयं संजय बारू की पुस्तक का उल्लेख कर चुके हैं। सत्ता पक्ष के लोग भी समय-समय पर किताबों और लेखों के उद्धरण संसद में देते रहे हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि संसद लोकतंत्र का मंदिर है, जिस पर देश के हर नागरिक की आस्था है। ऐसे में संसद के भीतर जरूरी और संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा होना लोकतांत्रिक परंपरा का हिस्सा है।

चीन, पाकिस्तान और विदेश नीति पर चर्चा की परंपरा

कांग्रेस महासचिव ने कहा कि संसद में पहले भी चीन, पाकिस्तान और विदेश नीति से जुड़े अहम मुद्दों पर खुलकर चर्चा होती रही है। यही भारत की संसदीय परंपरा रही है। उनके अनुसार, अगर आज इन विषयों पर चर्चा से बचा जा रहा है, तो यह लोकतंत्र के लिए चिंताजनक संकेत है।

नरवणे की किताब और सरकार की कथित असहजता 

प्रियंका गांधी ने दावा किया कि असल में मोदी सरकार इस बात से डर गई है कि सच्चाई देश के सामने आ जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी कारण पूर्व सेना प्रमुख एम. एम. नरवणे की किताब को प्रकाशित भी नहीं होने दिया जा रहा है। उनका कहना था कि इस किताब में यह लिखा है कि जब चीन की सेना भारत की सीमा पर मौजूद थी, उस समय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और सरकार के शीर्ष नेतृत्व की प्रतिक्रिया क्या थी।

एप्स्टीन फाइल और सरकार पर नए आरोप

प्रियंका गांधी ने यह भी दावा किया कि दूसरी ओर एप्स्टीन फाइल से जुड़े दस्तावेज सामने आ रहे हैं, जिनसे मोदी सरकार के तार जुड़ते दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब ये सभी दस्तावेज सत्यापित बताए जा रहे हैं।

संसद में बहस न होगी तो फिर कहां होगी: प्रियंका 

अपनी बात समाप्त करते हुए प्रियंका गांधी ने सवाल उठाया कि जब ये सभी मुद्दे सत्यापित दस्तावेजों से जुड़े हैं, तो यदि संसद में इन पर चर्चा नहीं होगी, तो फिर कहां होगी। उनका कहना था कि संसद का उद्देश्य ही यही है कि देश से जुड़े गंभीर सवालों पर खुली बहस हो और सरकार जनता के प्रति जवाबदेह बने।

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